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संपादक
By   V.K Sharma 18/05/2018 :11:27
यरुशलम में अमेरिकी दूतावास
 
राइल का इंतजार खत्म हुआ। वो वक्त आ गया, जिसका वह पिछले कई महीनों से इंतजार कर रहा था। तब से, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने यरुशलम में अमेरिकी दूतावास खोलने का एलान किया था। करीब 800 मेहमानों की मौजूदगी के बीच यरुशलम में अमेरिकी दूतावास का उद्घाटन हुआ।

गौरतलब है कि अंतरराष्ट्रीय समुदाय के विरोध के बावजूद अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने दूतावास को तेल अवीव से यरुशलम ले जाने का एलान किया था। तब ट्रंप ने यरुशलम को इजराइल की राजधानी के तौर पर मान्यता भी दे दी। उद्घाटन समारोह में शरीक अतिथियों में ट्रंप के वरिष्ठ सलाहकार और दामाद जैरेड कुशनर और उनकी बेटी व सलाहकार इवांका ट्रंप भी थे। लेकिन नया दूतावास बहुत ही संवेदनशील माहौल के बीच रहा है। 15 मई 1948 को इजराइल की स्थापना हुई। तब से ही 15 मई के दिन फिलस्तीनी लोग इस तारीख को शोक दिवस मनाते हैं। दूतावास के मुद्दे पर पर बीते कुछ महीनों में भारी प्रदर्शन भी होते रहे हैं। गजा बॉर्डर पर दर्जनों फिलस्तीनी मारे जा चुके हैं। उद्घाटन से ठीक पहले बड़ी संख्या में फिलस्तीनी गजा बॉर्डर पर प्रदर्शन करने पहुंचे। इस दौरान इजराइल ने भी वहां अपनी सेना की संख्या दोगुनी कर दी। इजराइली सेना को आशंका थी कि प्रदर्शनकारी बाड़ तोडक़र उसके इलाके में घुसने की कोशिश करेंगे। तो इजराइली सने ा के पव्र क्ता न े चते ावनी जारी की कि जो फिलस्तीनी बाड ़ के करीब आएगं ,े उन्ह ें गोली मार दी जाएगी। इजराइली सेना ने गजा पट्टी पर चेतावनी भरे पर्चे भी गिराए। उनमें कहा गया कि अगर आप हिंसक दंगों में हिस्सा लेंगे तो आप अपनी जान को जोखिम में डालेंगे। उधर प्रदर्शनों के पीछे अहम भूमिका निभा रहे इस्लामिक संगठन हमास ने युवाओं से अपील करते हुए कहा था कि वे तूफान की तरह बाड़ को रौंद दें। बहरहाल, अब ये हकीकत है कि यरुशलम में अमेरिकी दूतावास खुल चुका है। इसके लिए 14 मई 2018 की तारीख इजराइल के लिए यादगार बन गई है। इसकी तैयारियां भी काफी जोर-शोर से चल रही थीं। बीते कई दशकों से अमेरिका इजराइल में अपना दूतावास तेल अवीव से चला रहा था। लेकिन पिछले साल अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के एलान ने इजराइल को खुश कर दिया। दूसरी तरफ इससे फिलस्तीन समेत पूरा अरब जगत और पश्चिमी दुनिया के कई देश ट्रंप प्रशासन से नाराज हो गए। मगर उसकी परवाह ना करते हुए ट्रंप प्रशासन ने आखिरकार नीतिगत रूप से अहम अपने फैसले को लागू कर दिया।



V.K Sharma
Editor in Chief
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