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राष्ट्रीय
By   V K SHARMA 30/04/2026 :10:32
गाजियाबाद में भीषण अग्निकांड: सिस्टम, सुरक्षा और जागरूकता पर बड़ा सवाल
 

गाजियाबाद: महानगर के रिहायशी और व्यावसायिक इलाकों में सुरक्षा के दावों की पोल एक बार फिर धधकती हुई आग ने खोल दी है। हाल ही में हुए भीषण अग्निकांड ने न केवल करोड़ों की संपत्ति को खाक किया, बल्कि प्रशासन के आपदा प्रबंधन और नागरिक सुरक्षा के दावों पर भी गहरे सवाल खड़े कर दिए हैं।

1. सिस्टम की विफलता: कागजों पर एनओसी, जमीन पर खतरा

घटनास्थल पर हुई शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि कई इमारतों में फायर एनओसी (NOC) या तो थी ही नहीं, या फिर उसे रिन्यू नहीं कराया गया था।

  • लचर चेकिंग: प्रशासन की ओर से नियमित फायर ऑडिट की कमी आज कई परिवारों पर भारी पड़ रही है।

2. सुरक्षा मानकों की अनदेखी: क्या हम 'टाइम बम' पर रह रहे हैं?

अग्निकांड के समय यह देखा गया कि अधिकांश परिसरों में लगे फायर एक्सटिंग्विशर या तो एक्सपायर हो चुके थे या उन्हें चलाना किसी को नहीं आता था।

  • फायर एग्जिट का अभाव: इमारतों में आपातकालीन निकास द्वारों को या तो गोदाम बना दिया गया है या उन पर ताले लटके मिलते हैं।

  • उपकरणों की कमी: क्या हमारी सोसायटियों और बाजारों में प्राथमिक बचाव के लिए न्यूनतम 1-2 फायर सिलेंडर भी उपलब्ध हैं?

3. जागरूकता पर सुलगते सवाल

हादसा होने पर अफरा-तफरी का सबसे बड़ा कारण सुरक्षा को लेकर जागरूकता का अभाव है।

  • मॉक ड्रिल की कमी: लोगों को यह नहीं पता कि आग लगने की स्थिति में लिफ्ट का प्रयोग करना है या सीढ़ियों का।

  • प्रशिक्षण का अभाव: आम नागरिकों में यह "व्यक्तिगत विचार" विकसित होना जरूरी है कि सुरक्षा केवल सरकार की नहीं, बल्कि हमारी भी जिम्मेदारी है।

न्यूज़ग्राउंड का नज़रिया: "सबक लेने का समय"

गाजियाबाद का यह अग्निकांड कोई पहली घटना नहीं है और न ही यह आखिरी होगी, जब तक हम 'चलता है' वाले रवैये को नहीं छोड़ेंगे। 

निष्कर्ष: सिस्टम की सुस्ती और आम आदमी की लापरवाही का संगम ही इन बड़े हादसों की जड़ है। यदि अब भी सुरक्षा मानकों को गंभीरता से नहीं लिया गया, तो अगली बार नुकसान इससे भी बड़ा हो सकता है।



V.K Sharma
Editor in Chief
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