हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे तक दरोगा ने पहुंचाई थी पुलिस के आने की जानकारी, जानिए कौन है विकास दुबे और क्या है पूरा मामला ?
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : उत्तर प्रदेश के कानपुर के बिकरू गांव में हुई मुठभेड़ को लेकर चौंकाने वाली बात सामने आई है। कहा जा रहा है कि अपराधी विकास दुबे को पहले से ही पुलिस के बिकरू गांव आने की जानकारी मिल गई थी। जिसके बाद शुक्रवार की सुबह पुलिस और विकास दुबे गिरोह के बीच मुठभेड़ हुई थी और इस मुठभेड़ में 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। इस मुठभेड़ में पुलिस ने दो हमलावर को भी मार गिराया था। वहीं इस मुठभेड़ के बाद से विकास दुबे फरार है और पुलिस उसे पकड़ने में लगी हुई है।
दारोगा ने दी थी पुलिस के आने की खबर : मुठभेड़ की जांच करने के दौरान कई सारी हैरान जनक बातें सामने आई हैं। सूत्रों के अनुसार एक दारोगा ने विकास दुबे को फोन कर पुलिस के आने की जानकारी उसे दी थी। जिसके बाद विकास दुबे ने योजना के तहत पहले जेसीबी मशीन को लगाकर पुलिस का रास्ता बंद कर दिया। वहीं जैसे ही पुलिसकर्मी आगे बढ़ी, तो विकास के इशारों पर पुलिस वालों पर फायरिंग की गई। जिसमें डीएसपी, 3 एसआई सहित 8 पुलिसकर्मी शहीद हो गए थे। वहीं इसके बाद से पुलिस विकास दुबे की तलाश कर रही है।
12 लोगों को लिया हिरासत में : शुक्रवार सुबह को हुई इस मुठभेड़ के बाद से पुलिस की करीब 20 से अधिक टीमें यूपी के अलग-अलग जिलों में विकास दुबे की तलाशी कर रही हैं। जिन जगहों पर तलाशी की जा रही है वहां पर विकास दुबे के रिश्तेदार और परिचित लोग रहते हैं। वहीं अभी तक पुलिस ने इस मामले में 12 लोगों को हिरासत में लिया है और उनसे पूछताछ कर रही है। पुलिस ने इन लोगों से विकास दुबे के मोबाइल कॉल डिटेल के आधार पर हिरासत में लिया है।
विकास के कॉल डिटेल में मिला पुलिसकर्मी का नंबर : विकास दुबे की बात कई सारे पुलिसकर्मियों से भी हुई थी। ऐसे में पुलिस को शक है कि चौबेपुर थाने के ही एक दारोगा ने विकास दुबे को पुलिस रेड की सूचना पहले ही दे दी थी। सूत्रों के अनुसार पुलिस ने इस मामले में चौबेपुर थाने के एक दरोगा, सिपाही और होमगार्ड के मोबाइल नंबर की कॉल डिटेल खंगाल रही है। ताकि ये पता लगाया जा सके की किसने पुलिस के आने की सूचना विकास दुबे को दी थी।
सूचना देने वालों को दिया जाएगा इनाम : विकास दुबे की जानकारी देने वाले व्यक्ति को पुलिस ने 50,000 का इनाम देने का एलान किया है। पुलिस महानिरीक्षक मोहित अग्रवाल के अनुसार जो विकास दुबे की सूचना देगा उसका नाम गुप्त रखा जाएगा और उसे 50,000 का इनाम मिलेगा। विकास दुबे की सूचना 9454400211 पर संपर्क करके दी जा सकती है।
60 FIR हैं दर्ज : विकास दुबे एक बड़ा अपराधी है और उसके खिलाफ कानपुर के थाने में 60 एफआईआर दर्ज हैं। वहीं शुक्रवार को एक मामले की जांच के लिए कानपुर पुलिस बिकरू गांव गई थी। लेकिन इस दौरान पुलिस पर ही फायरिंग कर दी गई। वहीं इस फायरिंग में घायल हुए पुलिसकर्मियों से पूछताछ करने पर और मौके पर मिले सबूत के आधार पर ये आशंका जताई जा रही है कि पुलिस रेड की जानकारी विजय दुबे को दी गई थी। वहीं ये जानकारी किसने विकास दुबे तक पहुंचाई है, उसके नाम का पता पुलिस लगाने में जुट गई है।
उत्तर प्रदेश पुलिस आक्रोश में : लंबे समय बाद पुलिस ने कानपुर के किसी दुर्दांत अपराधी के खिलाफ आगे बढ़कर फैसला लिया है। न ही कुर्की के आदेश का इंतजार किया और न ही काली कमाई से खड़े किए गए आलीशान मकान को सील करने का इंतजार...। अफसरों के आदेश पर सीधे विकास दुबे के मकान को जेसीबी से ढहा दिया गया। आठ साथियों की शहादत से झल्लाए पूरे पुलिस महकमें ने अफसरों के इस फैसले से राहत की सांस ली है। हर कोई इस हमले से गुस्से में है। इसी बीच पुलिस ने बिकरू कांड के अगले दिन ही एडीजी जेएन सिंह और आईजी मोहित अग्रवाल ने विकास के किलेनुमा मकान को ढहाने का आदेश दिया। सुबह करीब 9:30 बजे जेसीबी से मकान ढहाने की कार्रवाई शुरू हुई तो पुलिस कर्मियों ने राहत की सांस ली। इकसे साथ ही हर वर्ग के लोगों में पुलिस की इस कार्रवाई की प्रशंशा देखने को मिली।मोहित अग्रवाल, आईजी रेंज का कहना है कि अपराधियों के खिलाफ इसी तरह सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। इससे कि फिर कोई बदमाश पुलिस पर इस तरह का हमला करने की हिम्मत नहीं जुटा सके। विकास के अन्य संपत्ति का भी ब्योरा जुटाया जा रहा है।
क्या था पूरा मामला : चौबेपुर बिकरू के विकास दुबे को तीन थानों की पुलिस सीओ के साथ पकड़ने गई थी। इस दौरान पहले से जाल बिछाए बैठे अपराधी ने पुलिस पर चौतरफा ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी और सीओ, एसओ समेत आठ पुलिस कर्मी शहीद हो गए थे। इससे पूरे पुलिस महकमें ही नहीं देश और प्रदेश के लोगों में भी आक्रोश छाया हुआ है। कानपुर चौबेपुर के बिकरू गांव में पुलिस पर हुआ यह हमला किसी आतंकी या नक्सली हमले से कम नहीं था। सोशल मीडिया से लेकर सड़क तक लोगों में आक्रोश देखने को मिला।
गांव के लोगों में भी खुशी की लहर : कहने के लिए भले ही गांव के लोग उसका समर्थन करते थे, लेकिन बातचीत के दौरान ग्रामीणों ने बताया कि गुंडे, बदमाशों से कौन नहीं डरता है। गांव में रहना है तो उनकी सुननी ही पड़ेगी। अगर उसके खिलाफ गए तो गांव छोड़ना पड़ेगा। मजबूरी में विकास का साथ देना पड़ता था। बुजुर्ग महिला और उनके पति यह बात कहते हुए भावुक हो गए। इससे एक बात तो साफ है कि कोई खुल के भले ही नहीं विकास का विरोध कर रहा, लेकिन गांव के लोगों में भी खुशी की लहर है और राहत की सांस ली है।
कौन है अपराधी विकास दुबे ? : बताया जाता है कि विकास दुबे उत्तरप्रदेश के राजनीतिक गलियारे में काफी पैठ रखता है. वह अपनी दबंगता से गैर कानूनी तरीके से काफी सारी संपत्ति बना चुका है. कई जमीनों पर उसने आजतक अवैध कब्जे किए. उसकी दबंगता की कहानी एक दशक से अधिक समय की है. साल 2000 के दौरान शिवली थानाक्षेत्र स्थित ताराचंद इंटर कॉलेज के सहायक प्रबंधक सिद्धेश्वर पांडेय की हत्या हुई. जिसमें विकास दुबे का नाम काफी उछला. इसी साल शिवली थानाक्षेत्र में ही रामबाबू यादव की हत्या हुई. जिसमें विकास दुबे पर जेल के भीतर रहकर साजिश रचने का आरोप लगा.
दर्जाप्राप्त कद्दावर राज्यमंत्री संतोष शुक्ला की थाने में हुई हत्या का था आरोपी : हिस्ट्रीशीटर विकास दुबे पर संगीन अपराध के मामले बढ़ते ही गए. साल 2001 में विकास दुबे के उपर दर्जाप्राप्त कद्दावर राज्यमंत्री संतोष शुक्ला के हत्या का भी आरोप लगा. संतोष शुक्ला भाजपा के नेता थे. वो तत्कालीन श्रम संविदा बोर्ड के चैयरमेन थे. जिनकी हत्या के बाद एसटीएफ ने विकास दुबे को लखनऊ से गिरफ्तार किया था. मंत्री संतोष शुक्ला कानपुर देहात के शिवली थाने के अंदर बैठे थे. विकास दुबे ने थाने के अंदर घुसकर संतोष शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी थी.
भाजपा नेता संतोष शुक्ला से इस तरह हुई थी दुश्मनी : हालांकि कोई गवाह न मिलने के कारण विकास दुबे इस केस में बरी हो गया था. उस दौरान पुछताछ के क्रम में विकास दुबे ने बताया था कि वर्ष 1996 में कानुपर की चौबेपुर विधानसभा क्षेत्र से हरिकृष्ण श्रीवास्तव व संतोष शुक्ला चुनाव लड़े थे. जिसमें हरिकृष्ण श्रीवास्तव विजयी हुए थे. विजय जुलूस निकलने के दौरान दोनो गुटों में विवाद हुआ था. इस विवाद में विकास दुबे का भी नाम आया था. उसके खिलाफ मुकदमा भी दर्ज हुआ था. कहा जाता है कि यहीं से उसकी रंजिश भाजपा नेता संतोष शुक्ला से शुरू हुई और विकास ने उन्हें निशाने पर ले लिया था. और 11 नवंबर 2001 को विकास दुबे ने कानपुर के थाना शिवली के अंदर घुसकर संतोष शुक्ला की गोली मारकर हत्या कर दी थी.