Coronavirus Lockdown : दिल्ली से पलायन पर आम आदमी पार्टी और योगी सरकार में छिड़ा ट्वीट वार, आखिर क्यों सड़क पर उतरने को मजबूर हुए हजारों लोग? क्या था केजरीवाल का षड्यंत्र ?
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : दिल्ली से हजारों मजदूरों के पलायन पर दिल्ली की आम आदमी पार्टी और उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार के बीच शनिवार को ट्वीट वार छिड़ गया। मजदूरों के पलायन को लेकर सोशल मीडिया पर केजरीवाल सरकार पर सवाल खड़े हुए तो दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसौदिया बचाव में आगे आए। सिसौदिया को जवाब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार ने दिया।
दिल्ली के उपमुख्यमंत्री सिसौदिया ने ट्वीट किया कि 'मुझे दुख है कि कोरोना महामारी के बीच बीजेपी नेता टुच्ची राजनीति पर उतर आए हैं। योगी आदित्यनाथ की सरकार ने आरोप लगाया है कि अरविंद केजरीवाल ने बिजली-पानी काट दिया, इसलिए लोग दिल्ली से जा रहे हैं। यह गंभीरता से एक होकर देश को बचाने का समय है, घटिया राजनीति का नहीं।'
इस पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मीडिया सलाहकार मृत्युंजय कुमार ने पलटवार करते हुए ट्वीट किया- 'दिल्ली से हो रहा यह भारी पलायन आपकी सरकार की ही देन है। इन्हें आसरा मिला, न खाना, न पानी। मूसलधार बारिश में सिर छिपाने को छत तक नहीं। योगी सरकार ने रातों-रात बसें लगाकर इनके रहने-खाने की व्यवस्था की है। झूठ बोलकर फेस सेविंग मत करिए। चुल्लू भर पानी है या भिजवाऊं?'
क्या थी केजरीवाल की रणनीति : सूत्रों से एक रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली से उत्तर प्रदेश पहुँचे इन लोगों ने बताया कि दिल्ली सरकार ने बिजली-पानी के कनेक्शन काट दिए। लॉकडाउन के दौरान उन्हें भोजन, दूध नहीं मिला जिस कारण भूखे लोग सड़कों पर उतरे। यहाँ तक कि दिल्ली सरकार के अधिकारी बक़ायदा एनाउंसमेंट कर अफ़वाह फैलाते रहे कि यूपी बॉर्डर पर बसें खड़ी हैं, जो उन्हें यूपी और बिहार ले जाएँगी।
इसके बाद बहुत सारे लोगों को मदद के नाम पर डीटीसी की बसों से बॉर्डर तक पहुँचाकर छोड़ दिया गया। लोगों ने आरोप लगाए हैं कि मुफ्त बिजली और पानी देने का वादा करके केजरीवाल सत्ता में आए थे। लेकिन उन्होंने लोगों से विश्वासघात किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ ने रात भर जाग कर नोएडा, गाजियाबाद, बुलंदशहर, अलीगढ़, हापुड़ आदि इलाकों में 1000 से ज्यादा बसें लगाकर इन लोगों को गंतव्य तक पहुँचाने की व्यवस्था कराई। रात में ही मजदूरों और बच्चों के लिए भोजन का इंतज़ाम कराया गया।
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा जारी एक बयान में दिल्ली सरकार पर लोगों के साथ लॉकडाउन के दौरान किए गए व्यवहार पर आपत्ति जताई गई है। इसमें कहा गया है कि लोगों को ना ही दूध और न ही बिजली-पानी उपलब्ध करवाया गया। यही नहीं, उन्हें डीटीसी बसों पर बिठाकर बॉर्डर तक इस आश्वासन के साथ भेज दिया गया कि वहाँ उनके घर जाने का प्रबंध किया गया है। हालात देखते हुए यूपी सरकार ने कानपुर, बलिया, बनारस, गोरखपुर, आजमगढ़, फैजाबाद, बस्ती, प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी, रायबरेली, गोंडा, इटावा, बहराइच, श्रावस्ती सहित कई जिलों की बसें यात्रियों को बैठाकर भेजी। प्रशासन लोगों को खाने-पीने की व्यवस्था भी कर रहा है।
केजरीवाल सरकार की इस हरकत से अब हजारों जिंदगियों पर कोरोना महामारी का खतरा फैल चूका है। अगर उनमें से एक भी मरीज कोरोना पॉजिटिव निकला तो सोचिये ये अपने आप में कितनी बड़ी त्रासदी होगी। योगी सरकार अपने लोगों को यूँ नहीं छोड़ सकती इसलिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने लोगों को अब निकाल रहे हैं लेकिन इतनी भीड़ की वजह से अब कोरोना का खतरा बढ़ गया है। पर आज इस सब वाक्या ने केजरीवाल सरकार के स्वास्थ्य दावों और बड़ी बड़ी बातों की पोल खोल दी है।
गडकरी बोले- मजूदरों को उपलब्ध कराएं भोजन-पानी : केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने शनिवार को एनएचएआइ चेयरमैन और टोल ऑपरेटरों को निर्देश दिया कि वे राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्रवासी मजदूरों को भोजन, पानी और दूसरी जरूरी मदद मुहैया कराएं. संकट के इस समय में हमें अपने साथी नागरिकों के लिए दयावान बनना होगा. उन्होंने उम्मीद जतायी कि टोल ऑपरेटर उनके आह्वान पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देंगे.
हर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध - शाह : केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने शनिवार को कहा कि केंद्र सरकार प्रवासी कामगारों को हर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देशों के मुताबिक सरकार बंद की अवधि के दौरान प्रवासी कामगारों को हर सहायता उपलब्ध कराने के लिए प्रतिबद्ध है. मंत्रालय के एक बयान के मुताबिक, शाह ने राज्यों को बंद के दौरान प्रवासी कामगारों के लिए राज्य आपदा राहत कोष का इस्तेमाल करने को अधिकृत किया है.
ये बातें भी आ रहीं हैं सामने : दरअसल, लोगों को ऐसा लगता है कि लॉकडाउन आगे भी बढ़ सकता है। ऐसे में लोगों को चिंता सता रही है कि इस माह तो मकान मालिक भले ही किराया के लिए परेशान न करें, लेकिन अगले माह से ये किराया कैसे देंगे। काम बंद है, बिना काम के वे इतने दिन कैसे रहेंगे उनके पास खाने-पीने समेत अन्य जरूरी सामान का स्टॉक नहीं है। इतना भी राशन नहीं है कि आने वाला सप्ताह कट जाए। उनके पास जो भी राशन है, वह लेकर चल पड़े हैं। उन्हें उम्मीद कि रास्ते में कोई मदद मिली तो ठीक, और न भी मिली तो भी अपने घर तो पहुंच ही जाएंगे और कुछ लोग का यह भी कहते नजर आ रहे हैं कि दिल्ली में उन्हें मकान मालिकों ने परेशान कर दिया जिसके कारण उन्हें अपने गांवों का रुख करना पड़ रहा है. वहीं कई लोग कह रहे हैं कि लॉकडाउन के कारण उनके पास काम की कमी है. यदि काम नहीं मिलेगा तो रोटी कहां से खाएंगे. आपको बता दें कि पीएम मोदी की अपील के बाद भी दिल्ली की सीमा पर हजारों लोग पहुंचे. ये अपने गांव जाना चाहते हैं ताकि चैन से रह सकें।