अयोध्या विवाद मध्यस्थता की नहीं होगी रिपोर्टिंग, टीम ने लगाया प्रतिबंध
नई दिल्ली उत्तर प्रदेश के अयोध्या में राम मंदिर निर्माण मुद्दे को आपसी सहमति से सुलझाने के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मध्यस्थ टीम ने अपना कार्य शुरू कर दिया है। पर इस मामले की मध्यस्थता की रिपोर्टिंग नहीं की जाएगी ।
मध्यस्थों ने प्रिंट और और मीडिया की रिपोर्टिंग को प्रतिबंधित कर दिया है। दरअसल, यह फैसला सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस कलीफुल्ला की अध्यक्षता वाली मध्यस्थ पैनल ने लिया है। मालूम हो कि सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या मामले को मध्यस्थता के लिए भेज दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि पैनल मध्यस्थता के माध्यम से विवाद निपटाने के प्रयास शुरू करे और 4 सप्ताह में पक्षकारों के बीच मध्यस्थता की स्तिथि को लेकर प्रगति रिपोर्ट दायर करे। क्योंकि 8 हफ्ते बाद सुप्रीम कोर्ट मुख्य मामले की सुनवाई करने वाला है। मध्यस्थता
पैनल में जस्टिस कलीफुल्ला, राम पंचू, और श्री श्री रवि शंकर को शामिल किया गया है। कोर्ट ने कहा था कि विवाद निपटारे के दौरान मध्यस्थता प्रयासों पर मीडिया रिपोर्टिंग होगी या नहीं इस पर मध्यस्थ पैनल आखिरी निर्णय लेंगे।
वहीं एक और हिंदू पक्षकार निर्मोही अखाड़े ने कहा था कि वह मध्यस्थता के लिए तैयार है। मुस्लिम पक्ष ने भी मध्यस्थता पर सहमति जताई। सुनवाई के दौरान सबसे पहले एक हिन्दू पक्ष के वकील ने कहा था कि अयोध्या केस को मध्यस्थता के लिए भेजने से पहले पब्लिक नोटिस जारी किया जाना चाहिए। हिंदू पक्षकार की दलील थी अयोध्या मामला धार्मिक और आस्था से जुड़ा मामला है, यह केवल सम्पत्ति विवाद नहीं है। इसलिए मध्यस्थता का सवाल ही नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम हैरान हैं कि विकल्प आजमाएं बिना मध्यस्थता को खारिज क्यों किया जा रहा है। कोर्ट ने कहा कि अतीत पर हमारा नियंत्रण नहीं है लेकिन हम बेहतर भविष्य की कोशिश जरूर कर सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जब वैवाहिक विवाद में कोर्ट मध्यस्थता के लिए कहता है तो किसी नतीजे की नहीं सोचता। बस विकल्प आजमाना चाहता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि हम ये नहीं सोच रहे कि किसी पक्ष को किसी चीज का त्याग करना पड़ेगा। हम जानते हैं कि ये आस्था का मसला है। हम इसके असर के बारे में जानते हैं।