श्रीमद्भागवत गीता हिंदुओं की पवित्र ग्रंथ : मुरारी
गुरुग्राम अशोक विहार स्थित कामधेनु गऊशाला में श्रीमद् भागवत कथा में आचार्य पंडित श्रीकृष्ण मुरारी जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता हिन्दुओं के पवित्रतम ग्रन्थों में से एक है। महाभारत के अनुसार कुरुक्षेत्र युद्ध में भगवान श्री कृष्ण ने गीता का सन्देश अर्जुन को
सुनाया था। यह महाभारत के भीष्म पर्व के अन्तर्गत दिया गया एक उपनिषद् है।
भगवत गीता में एकेश्वरवाद, कर्म योग, ज्ञानयोग, भक्ति योग की बहुत सुन्दर ढंग से चर्चा हुई है। कथा के पांचवे दिन पंडित श्री कृष्ण मुरारी जी ने कहा कि श्रीमद् भागवत गीता की पृष्ठभूमि महाभारत का युद्ध है। जिस प्रकार एक सामान्य मनुष्य अपने जीवन की समस्याओं
में उलझकर किंकर्तव्यविमूढ़ हो जाता है और जीवन की समस्यायों से लडऩे की बजाय उससे भागने का मन बना लेता है। उसी प्रकार अर्जुन जो महाभारत के महानायक थे, अपने सामने आने वाली समस्याओं से भयभीत होकर जीवन और क्षत्रिय धर्म से निराश हो गए थे। अर्जुन की तरह ही हम सभी क भ ी - क भ ी अनिश्चय की स्थिति में या तो हताश हो जाते हैं या फिर अपनी समस्याओं से विचलित होकर भाग खड़े होते हैं। उन्होंने कहा कि भारत वर्ष के ऋ षियों ने गहन विचार के पश्चात जिस ज्ञान को आत्मसात किया उसे उन्होंने वेदों का नाम दिया। इन्हीं वेदों का अंतिम भाग उपनिषद् कहलाता है। मानव जीवन की विशेषता मानव को प्राप्त बौद्धिक शक्ति है और उपनिषदों में निहित ज्ञान मानव की बौद्धिकता की उच्चतम अवस्था तो है ही, साथ में बुद्धि की सीमाओं के परे मनुष्य क्या अनुभव कर सकता है उसकी एक झलक भी दिखा देता है।