Republic Day 2019: 70वां गणतंत्र दिवस पर पहली बार 90 साल से अधिक उम्र के सैनिक होंगे परेड में शामिल, जानिए गणतंत्र दिवस का इतिहास और इससे जुड़े रोचक तथ्य !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा :70वां गणतंत्र दिवस की परेड
में राजपथ पर ऐतिहासिक डेयरडेविल टीम के तहत असम राइफल्स की एक टुकड़ी की अगुवाई
में नारी शक्ति का प्रदर्शन होगा. इसमें एक अकेली महिला अधिकारी बाइक पर स्टंट
दिखाएंगी. चीफ ऑफ स्टाफ (हेडक्वार्टर दिल्ली एरिया) मेजर जनरल राजपाल पुनिया ने यहां
संवाददाता सम्मेलन में यह जानकारी दी. उन्होंने यह भी बताया कि पहली बार आजाद हिंद
फौज के 90 साल से अधिक उम्र के चार
सैनिक भी इस परेड में हिस्सा लेंगे. उन्होंने कहा, "यह गणतंत्र दिवस परेड
नारी शक्ति का विस्मयकारी प्रदर्शन भी होगा क्योंकि असम राइफल की एक पूर्ण महिला
टुकड़ी के अलावा कई टुकड़ियों का महिलाएं नेतृत्व करेंगी.'' नौसेना, सेना सेवा कोर की
टुकड़ियों और कोर ऑफ सिंगल्स की इकाई की भी अगुवाई महिला अधिकारी करेंगी. जब
पुनिया से पूछा गया कि क्या इस गणतंत्र दिवस परेड में अबतक महिलाओं की सबसे बड़ी
भागीदारी नजर आएगी तो उन्होंने कहा, ‘‘इस साल की परेड में उनकी भागीदारी के स्तर खासकर असम
राइफल्स की महिला टुकड़ी और अन्य टुकड़ियों की कमान महिलाओं के हाथों में होने को
देखते हुए यह परेड में महिलाओं की सबसे बड़ी भागीदारी है.'' सिग्नल कोर की कप्तान
शिखा सुरभि अपनी टीम के पुरुष सहयोगियों के साथ बाइक स्टंट करेंगी. मेजर खुशबू
कंवर (30) देश के सबसे पुराने
अर्द्धसैनिक बल असम राइफल्स की टुकड़ी की अगुवाई करेंगी. उन्होंने कहा, ‘‘असम राइफल्स की महिला
टुकड़ी की अगुवाई करना मेरे लिए सम्मान और गर्व की बात है. मैं राजस्थान के एक बस
कंडक्टर की बेटी हूं और यदि मैं यह दायित्व पूरा कर सकती हूं तो कोई भी लड़की अपना
सपना पूरा कर सकती हैइस बार गणतंत्र दिवस पर
दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा मुख्य अतिथि होंगे. विदेश मंत्रालय
ने बताया कि रामफोसा के साथ उनकी पत्नी डॉ. शेपो मोसेपे, नौ मंत्रियों सहित
उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, वरिष्ठ अधिकारी और 50 सदस्यों का व्यावसायिक
प्रतिनिधिमंडल भी होगा. बता दें कि नेल्सन मंडेला के बाद वह दक्षिण अफ्रीका के
दूसरे राष्ट्रपति होंगे जो गणतंत्र दिवस पर मुख्य अतिथि होंगे. उन्होंने बताया कि
तोप एम 777 अमेरिकन अल्ट्रा लाइट
होवित्जर और के 9 वज्र भी इस साल की परेड में शामिल किये गए हैं. हाल ही में
अमेरिका से एम 777 अमेरिकन अल्ट्रा लाइट होवित्जर खरीदा गया है. पुनिया ने
कहा कि स्वचालित वज्र प्रधानमंत्री की मेक इन इंडिया पहल का प्रतीक है.गणतंत्र दिवस परेड की फुल ड्रेस रिहर्सल हुई.
चंडीगढ़ से प्राप्त समाचार के अनुसार 1919 का जालियांवाला बांग नरसंहार इस साल गणतंत्र दिवस परेड में
पंजाब की सरकारी झांकी का विषय होगा.पंजाब की झांकी लगातार तीसरी बार परेड में
प्रदर्शित होगी. "गणतंत्र दिवस हर साल 26 जनवरी (26
January) को बड़े ही उत्साह के साथ
देश भर में मनाया जाता है. गणतंत्र दिवस (Republic Day 2019) की तैयारियां जोरो-शोरो
पर हैं. गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra
Modi) इंडिया गेट स्थित अमर
जवान ज्योति पर शहीदों को पुष्पचक्र चढ़ाकर करेंगे. गृह मंत्रालय के एक ज्ञापन में
बताया गया कि इस साल के गणतंत्र दिवस के मौके पर विभिन्न राज्यों की झांकियों के
साथ सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और विकास पर आधारित केंद्र सरकार के विभागों की
झांकियां परेड का हिस्सा होंगी. सांस्कृतिक विषय पर आधारित कुछ झांकियों में लोक
नृत्य भी होगा. साथ ही राष्ट्रीय पुरस्कार से नवाजे गए 26 बच्चे भी खुली जीप में
बैठकर झांकी का हिस्सा बनेंगे. बता दें कि महात्मा गांधी (Mahatma Gandhi) की ‘समाधि' को सुरक्षा कवच मुहैया
कराने वाले केंद्रीय अर्ध सैनिक बल सीआईएसएफ की झांकी भी इस बार 11 साल के अंतराल के बाद
गणतंत्र दिवस परेड में हिस्सा ले रही है. बल की झांकी में महात्मा गांधी की समाधि
पर सुरक्षा में तैनात जवानों को दिखाया जाएगा.
क्या आप जानते है 26 जनवरी गणतंत्र दिवस का इतिहास :- गणतंत्र
दिवस (Republic Day) देश में हर साल 26 जनवरी को मनाया जाता है. 26 जनवरी 1950 को हमारे देश में
संविधान लागू हुआ, जिसके उपलक्ष्य में हम 26 जनवरी (26th
January) को गणतंत्र दिवस के रूप
में मनाते हैं. एक स्वतंत्र गणराज्य बनने के लिए भारतीय संविधान सभा द्वारा 26 नवंबर 1949 को संविधान अपनाया गया
था, लेकिन इसे लागू 26 जनवरी 1950 में किया गया था. भीमराव
अंबेडकर (B. R. Ambedkar) ने संविधान को दो साल, 11 महीने और 18 दिनों में तैयार कर
राष्ट्र को समर्पित किया था. हमारा संविधान विश्वो का सबसे बड़ा संविधान माना जाता
है. बता दें कि संविधान को बनाने वाली संविधान सभा के अध्यक्ष भीमराव अंबेडकर थे,
जबकि जवाहरलाल नेहरू,
डॉ राजेन्द्र प्रसाद,
सरदार वल्लभ भाई पटेल,
मौलाना अबुल कलाम आजाद
आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे. गणतंत्र दिवस का इतिहास बड़ा ही रोचक है. एक
स्वतंत्र गणराज्य बनने और देश में कानून का राज स्थापित करने के लिए संविधान को 26 नवंबर 1949 को भारतीय संविधान सभा
द्वारा अपनाया गया और 26 जनवरी (26 January) 1950 को इसे एक लोकतांत्रिक
सरकार प्रणाली के साथ लागू किया गया था. साल 1929 में दिसंबर में लाहौर
में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का अधिवेशन पंडित जवाहरलाल नेहरू की अध्यक्षता में
हुआ. इस अधिवेशन में प्रस्ताव पारित कर इस बात की घोषणा की गई कि यदि अंग्रेज
सरकार द्वारा 26 जनवरी 1930 तक भारत को डोमीनियन का दर्जा नहीं दिया गया तो भारत को
पूर्ण रूप से स्वदतंत्र देश घोषित कर दिया जाएगा. 26 जनवरी 1930 तक जब अंग्रेज सरकार ने
कुछ नहीं किया तब कांग्रेस ने उस दिन भारत की पूर्ण स्वतंत्रता के निश्चय की घोषणा
की और अपना सक्रिय आंदोलन आरंभ किया. उस दिन से 1947 में स्वतंत्रता प्राप्त
होने तक 26 जनवरी गणतंत्र दिवस के
रूप में मनाया जाता रहा. इसके बाद स्वतंत्रता प्राप्ति के वास्तविक दिन 15 अगस्त को भारत का
स्वतंत्रता दिवस मनाया जाने लगा. भारत के आज़ाद हो जाने के बाद संविधान सभा की
घोषणा हुई और इसने अपना कार्य 9 दिसम्बर 1947 से शुरू कर दिया. संविधान सभा के सदस्य भारत के राज्यों की
सभाओं के निर्वाचित सदस्यों के द्वारा चुने गए थे. डॉ० भीमराव आंबेडकर, जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेन्द्र प्रसाद,
सरदार वल्लभ भाई पटेल,
मौलाना अबुल कलाम आजाद
आदि इस सभा के प्रमुख सदस्य थे. संविधान निर्माण में कुल 22 समितीयां थी जिसमें
प्रारूप समिति (ड्राफ्टींग कमेटी) सबसे प्रमुख एवं महत्त्वपूर्ण समिति थी और इस
समिति का कार्य संपूर्ण ‘संविधान लिखना' या ‘निर्माण करना' था. प्रारूप समिति के अध्यक्ष डॉ० भीमराव आंबेडकर थे.
प्रारूप समिति ने और उसमें विशेष रूप से डॉ. आंबेडकर जी ने 2 साल, 11 महीने और 18 दिन में भारतीय संविधान
का निर्माण किया और संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र प्रसाद को 26 नवंबर 1949 को भारत का संविधान
सुपूर्द किया. जिसके बाद अनेक सुधारों और बदलावों के बाद सभा के 308 सदस्यों ने 24 जनवरी 1950 को संविधान की दो
हस्तलिखित कॉपियों पर हस्ताक्षर किये. इसके दो दिन बाद संविधान 26 जनवरी को देश भर में
लागू हो गया. 26 जनवरी का महत्व बनाए रखने के लिए इसी दिन संविधान
निर्मात्री सभा (कांस्टीट्यूएंट असेंबली) द्वारा स्वीकृत संविधान में भारत के
गणतंत्र स्वरूप को मान्यता प्रदान की गई. इसलिए 26 जनवरी को हर साल गणतंत्र
दिवस के रूप में मनाया जाता है.
1. देश में राजपथ पर गणतंत्र दिवस की परेड आयोजित होती है. यह
परेड आठ किमी की होती है और इसकी शुरुआत रायसीना हिल से होती है. उसके बाद राजपथ,
इंडिया गेट से होते हुए
ये लाल किला पर समाप्तहोती है.
2. 26 जनवरी, 1950 को पहली गणतंत्र दिवस परेड राजपथ के बजाय तत्का लीन इर्विन
स्टेेडियम (अब नेशनल स्टेोडियम) में हुई थी. उस वक्ता इर्विन स्टेैडियम के चारों
तरफ चारदीवारी नहीं थी और उसके पीछे लाल किला साफ नजर आता था.
3. 26 जनवरी 1950 को सुबह 10.18 मिनट पर भारत का संविधान लागू किया गया.
4. पूर्ण स्वराज दिवस (26 जनवरी 1930) को ध्यान में रखते हुए
भारतीय संविधान 26 जनवरी को लागू किया गया था.
5. राष्ट्रगान के दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाती
है. 21 तोपों की ये सलामी
राष्ट्रगान की शुरूआत से शुरू होती है और 52 सेकेंड के राष्ट्रगान के
खत्म होने के साथ पूरी हो जाती है.