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न्यूज़ ग्राउंड विशेष
By   V.K Sharma 03/01/2019 :14:12
रूस की इमारत में धमाका, अब तक 26 लोगों की मौत, 35 घंटे जिन्दगी मौत से लड़ने के बाद जिंदा निकला मलबे के नीचे से 11 माह का मासूम बच्चा , खुशी से छलकी लोगो की आंखें !
 



 

 

 

नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : रूस की एक बिल्डिंग में नए साल के एक दिन पहले गैस विस्फोट में मरने वालों की संख्या 26 हो गई है. उरल पहाड़ियों में स्थित मैगनितोगोर्स्क शहर में इमारत में विस्फोट के बाद से 15 लोग अब भी लापता हैं. रूस की संवाद समिति ने आपातकालीन मंत्रालय का हवाला देते हुए बताया कि जो शव बाहर निकाले गए उनमें तीन वर्ष की एक बच्ची का शव भी शामिल है. भवन क्षतिग्रस्त होने के करीब 36 घंटे बाद मलबे से जिंदा निकाले गए 11 महीने के दुधमुहे बच्चेि की हालत मॉस्को के एक अस्पताल में गंभीर है , लेकिन स्थिर बनी हुई है. उसे स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा भेजे गए विमान से राजधानी लाया गया. बच्चेी को जीवित देख और उसकी किलकारी सुनकर सही मायने में बचावकर्मियों की चेहरे पर जो मुस्कासन दिखाई दी वह देखने लायक थी। इसको नए वर्ष का चमत्काेर कहा जा रहा है। न्यूसयॉर्क टाइम्सद की खबर के मुताबिक पिछले दिनों मेग्नीवटोगोरस्केे सिटी में हुए जबरदस्तज धमाके के बाद करीब 25 इमारतें ध्वास्तन हो गई थीं। इनमें दस मंजिला इमारत भी थी। धमाके की वजह गैस रिसाव बताई जा रही है। इस धमाके ने पुलिस और प्रशासन की नींद उड़ा दी थी। धमाका इतना जबरदस्ती था कि इसकी आवाज काफी दूर तक सुनी गई। इस घटना के कुछ देर के बाद पूरे इलाके में पुलिस और बचावकर्मियों की गाडि़यों के सायरन की आवाजें गूंजने लगी। जिस जगह यह हादसा हुआ है वह मास्को् से करीब एक हजार मील दूर दक्षिण में स्थित है। यह इंडस्ट्रियल सिटी के नाम से रूस में मशहूर है। कुछ मीडिया के जरिए सामने आई खबरों में इस धमाके को आतंकी हमले से भी जोड़कर देखा जा रहा है।  इस घटना में 18 लोगों की मौत हो गई जबकि दर्जनभर से अधिक लोग अब भी लापता बताए जा रहे हैं। पिछले दो दिनों से दिन और रात यहां पर बचावकर्मी मलबे में जिंदगी तलाश रहे हैं। बचाव का काम कुछ धीमी गति से चलने के पीछे भी एक बड़ी वजह है। वो ये कि मशीनों की मदद लेने से इसमें दबे लोगों की परेशानी बढ़ सकती है। इसलिए बचावकर्मी एहतियात से आगे बढ़ रहे हैं। बचाव की धीमी गति की दूसरी बड़ी वजह यहां का तापमान है जो लगातार परेशानी खड़ी कर रहा है। आपको बता दें कि यहां का दिन का तापमान माइनस 17 डिग्री सेल्सियस और रात में माइनस 30 डिग्री सेल्सियस तक चला जाता है। यहां पर 35 घंटों की मशक्क त के बाद एक 11 माह के बच्चे  के साथ पांच अन्यज लोगों को भी बचाया गया। 11 माह के बच्चेक का नाम वान्याव है। बचावकर्मियों को इस बच्चे‍ के मलबे में दबे होने का पता उसकी चीख से चला था। इसके बाद ही इस बच्चेक को बचाने के लिए बचावकर्मियों ने अपनी पूरी ताकत झौंक दी है। बचावकर्मियों को यह नहीं पता था बच्चेे की लॉकेशन क्या् है। यहां के इमरजेंसी मिनिस्टचर के मुताबिक इस पूरे रेस्यू‍ बा प्रोग्राम में करीब सौ लोग जुटे थे। स्वास्थ्य मंत्री वेरोनिका स्कवोर्तसोवा ने बुधवार को बताया कि बच्चे के सिर में चोट लगी है, लेकिन मस्तिष्क को नुकसान नहीं पहुंचा है. अधिकारियों ने कहा कि भवन में रहने वाले 20 लोग लापता हैं जिनमें पांच बच्चे शामिल हैं. इस बच्चे  को सकुशल देख वहां मौजूद बचावकर्मियों की आंखें खुशी से नम हो गईं। इस बच्चेे ने पीले रंग की टीशर्ट और सफेद जुराब पहने हुए थे। यह बच्चाे पूरी तरह से मलबे की डस्टह से अटा पड़ा था और हाथ-पांव मार कर चीख रहा था। बच्चे  को निकालना बेहद मुश्किल इसलिए भी था क्योंथकि उस तक पहुंचने के लिए बचावकर्मियों को टनों मलबा हटाना था। बच्चेु की बेहद धीमी सी आवाज बचावकर्मियों को सुनाई दे रही थी। यह बच्चाक यूं तो पालने में था, जो लगभग टूट चुका था। उसके पांव कंबल से ढके थे और सिर बाहर निकला हुआ था। जिस वक्त  बचावकर्मियों ने पहली बार इस बच्चेा की झलक देखी तो सभी लोगों को एक उम्मीेद जगी की वह इस बच्चेब को सकुशल निकालने में कामयाब हो जाएंगे। लेकिन वक्ती तेजी से गुजर रहा था और तापमान लगातार गिर रहा था। यह दोनों ही चीजें बच्चेह को सकुशल बाहर निकालने में आड़े आ रही थीं। लेकिन इन चुनौतियों को दूर कर बचावकर्मी इसको निकालने में जुटे रहे। अंत में वह कामयाब भी हुए। बच्चेच को निकालने के बाद उसको अस्पाताल के लिए एयरलिफ्ट किया गया। फिलहाल यह बच्चाब डॉक्टचरों की निगरानी में है। उसके सिर में चोट लगी है और बच्चेा को बचाने की भी कोशिश की जा रही है। इस हादसे में बच्चेक की मां और बाप बच गए। जिस वक्त  यह हादसा हुआ उस वकत दोनों ही घर पर नहीं थे। यह हादसा दो दिन पहले हुआ था। उस दिन रूस में छुट्टी थी



V.K Sharma
Editor in Chief
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