हिंदी सिनेमा के बेहतरीन अभिनेता कादर खान का 81 वर्ष की उम्र में हुआ निधन, कनाडा में होगा अंतिम संस्कार !
अपनी बुलंद आवाज़ और ग़ज़ब की कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाने वाले कादर खान ने कई सुपरहिट फिल्में दी. उन्होंने कॉमेडी के साथ-साथ विलेन के किरदार भी बड़े गजब अंदाज में निभाए.
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा :बॉलीवुड में नए साल
का पहला दिन बेहद दुखद साबित हुआ. लंबे वक्त से बीमार चल रहे मशहूर अभिनेता कादर
खान अपनी बुलंद आवाज़ और ग़ज़ब की कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाने वाले कादर खान
ने कई सुपरहिट फिल्में दी. उन्होंने कॉमेडी के साथ-साथ विलेन के किरदार भी बड़े
गजब अंदाज में निभाए, हालांकि बेटे के साथ हुई एक घटना के बाद उन्होंने फिल्मों
में नेगेटिव रोल करना ही बंद कर दिया था उनका का कनाडा में निधन हो गया. उनके बेटे
सरफराज खान ने निधन की पुष्िर द करते हुए कहा, 'मेरे पिता अब नहीं रहे.कादर खान (Kader Khan) की 81 साल की उम्र में निधन हो
गया है। हालत गंभीर होने पर उन्हें कुछ ही दिन पहले अस्पताल में भर्ती करवाया गया
था। उन्हें सांस लेने में दिक्कत होने के बाद वेंटिलेटर (BIPAP) पर रखा गया था। उनका इलाज
कनाडा के एक अस्पताल में चल रहा था। कादर खान को आखिरी बार 2015 में आई फिल्म 'दिमाग का दही' में देखा गया था।कनाडा के हॉस्पिटल और बेटे सरफराज ने बताया,
'मेरे पिता अब नहीं रहे।
लंबी बीमारी के कारण कनाडा के समय के अनुसार 31 दिसंबर को शाम 6 बजे उनका निधन हो गया।
वह दोपहर में कोमा में चले गए थे। वह 16-17 सप्ताह तक अस्पताल में थे।' कादर खान का अंतिम
संस्कारर कनाडा में ही किया जाएगा। सरफराज ने बताया, 'हम अंतिम संस्काेर कनाडा
में ही करेंगे। यहां हमारा पूरा परिवार काफी लंबे समय से रह रहा है, इसलिए हम सभी अंतिम
क्रियाएं सिर्फ यहीं करेंगे।'हिंदी सिनेमा के मशहूर
अभिनेता कादर खान लंबे समय से बीमार चल रहे थे और कनाडा के अस्पताल में उनका इलाज
चल रहा था। कादर खान को सांस लेने में समस्या थी और इसी कारण डॉक्टरों ने उन्हें
वेंटिलेटर पर रखा था। कादर खान की तबीयत खराब को लेकर चल रही खबरों के बाद बॉलीवुड
सिलेब्रिटीज भी उनके अच्छे स्वास्थ्य की दुआएं करने लगे थे। अमिताभ बच्चन ने ट्वीट
किया, 'कादर खान, बेहद प्रतिभाशाली एक्टर
और राइटर अस्पताल में हैं। उनकी सेहत के लिए दुआ करता हूं।'कादर खान का जन्म 22 अक्टूबर, 1937 को काबुल में हुआ। उन्होंने 1973 में ‘दाग’ फिल्म से अपने अभिनय
करियर की शुरुआत की। इसमें राजेश खन्ना मुख्य भूमिका में थे। इससे पहले वह रणधीर
कपूर और जया बच्चन की फिल्म ‘जवानी-दिवानी’ के लिए संवाद लिख चुके थे। एक पटकथा लेखक के तौर पर खान ने
मनमोहन देसाई और प्रकाश मेहरा के साथ कई फिल्में लिखी।कादर खान ने मनमोहन देसाई के साथ मिलकर 'धर्म वीर', 'गंगा जमुना सरस्वती',
'कुली' 'देश प्रेमी', 'सुहाग', 'अमर अकबर एंथनी' और मेहरा के साथ 'ज्वालामुखी', 'शराबी', 'लावारिस' और 'मुकद्दर का सिकंदर'
जैसी फिल्में लिखी। खान
ने 'कुली नंबर 1', 'मैं खिलाड़ी तू अनाड़ी',
'कर्मा', 'सल्तनत' जैसी फिल्मों के संवाद
लिखे। उन्होंने करीब 300 फिल्मों में काम किया और 250 से ज्यादा फिल्मों के
संवाद लिखे थे। कादर खान को प्रोग्रेसिव सुपरान्यूक्लियर पाल्सी नामक बीमारी थी,
जिसकी वजह से उन्हें
बैलेंस बनाने में, चलने-फिरने में दिक्कत होती थी। इसके अलावा उन्हें
डिमेंसिया (भूलने की बीमारी) भी थी। बता दें कि कादर खान का जन्म अफगानिस्तान के
काबुल में हुआ था और साल 1973 में राजेश खन्ना अभिनीत 'दाग' से उन्होंने बॉलीवुड में
अपने करियर की शुरुआत की थी। उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया है। उन्होंने 250 से ज्यादा फिल्मों में
डायलॉग भी लिखे हैं। फिल्मों में एक्टिंग करियर शुरू करने से पहले उन्होंने रणधीर
कपूर और जया बच्चन अभिनीत फिल्म 'जवानी दिवानी' में भी काम किया था। 1973 में राजेश खन्ना और
शर्मिला टैगोर लीड रोल्स में थे, मगर उनका पहला बड़ा किरदार 'ख़ून पसीना' में ठाकुर ज़ालिम सिंह
था। इस फ़िल्म में अमिताभ बच्चन लीड रोल में थे। इस फ़िल्म के लेखक कादर ख़ान ही
थे। इसके बाद कादर ख़ान ने अमिताभ की कई फ़िल्मों में एक्टिंग करने के साथ संवाद
भी लिखे। अमिताभ की परवरिश, मिस्टर नटवरलाल, सुहाग, सत्ते पे सत्ता, नसीब और मुकद्दर का सिकंदर जैसी सफल फ़िल्मों के लिए संवाद
लिखे थे। अमिताभ और कादर ख़ान ने कुछ ऐसी फ़िल्मों में भी काम किया है, जिनमें कादर ख़ान सियासत
के स्याह पक्ष का प्रतिनिधित्व करते हैं, जबकि अमिताभ भ्रष्ट सियासत के शिकार बनते हैं। संयोग देखिए,
रियल लाइफ़ में अमिताभ ने
कुछ समय के लिए सियासत ज्वाइन की थी, तब कादर ख़ान को उनका यह रूप अच्छा नहीं लगा था। कई साल
पहले एक इंटरव्यू में कादर ख़ान ने कहा था- ''अमिताभ के साथ जो मेरा
रिश्ता था... जब वो एमपी बन गया... तो मैं ख़ुश नहीं था। क्योंकि यह सियासत ऐसी है
कि इंसान को बदलकर रख देती है। वो वापस जब आया तो मेरा अमिताभ बच्चन नहीं था। मुझे
बहुत दुख हुआ।'' कादर ख़ान के जाने से अमिताभ बहरे दुख में हैं। अपने दुख को
उन्होंने शब्दों के रूप में ट्विटर पर बयां किया है। बिग बी लिखते हैं- ''कादर ख़ान गुज़र गये।
दुखद और निराशाजनक ख़बर। मेरी प्रार्थनाएं और संवेदनाएं। एक उम्दा मंच कलाकार और
फ़िल्मों का संपूर्ण हुनर। मेरी ज्यादातर कामयाब फ़िल्मों के शानदार लेखक। खुशनुमा
साथा और एक मैथमेटिशियनकादर खान के निधन
के बाद कादर खान के फैंस और कई बड़े फ़िल्मी और राजनेतिक सितारोंसोशल मीडिया में उनकी फिल्मों के वीडियो साझा
कर रहे हैं. अमिताभ बच्चन ने कादर खान के निधन पर शोक जताया है. उन्होंने इसे
हिंदी सिनेमा की बड़ी क्षति करार दिया.अमिताभ ने कादर खान के साथ दो और दो पांच,
मुकद्दर का सिकंदर,
मि. नटवरलाल, सुहाग, कूली और शहंशाह में काम
किया है. कादर खान को फिल्मफेयर समेत सिनेमा के कई बड़े सम्मान मिले हैं. 2017 में कादर खान कनाडा गए
थे घुटने का इलाज कराने. लेकिन वापस नहीं लौटें. शक्ति कपूर ने आजतक से बातचीत में
कहा, कादर खान की जगह कोई नहीं
ले सकता. प्रेम चोपड़ा ने भी कादर खान के निधन की खबर को सदमा करार दिया. उन्होंने
कहा, वो बहुत बड़ी हस्ती थे.
सलीम जावेद की तरह संवाद लेखक थे कादर खान. अमिताभ बच्चन की कई बड़ी फिल्मों के
संवाद कादर खान ने ही लिखे थे. अपने करियर के शुरुआती दौर में कादर खान ने विलेन
का किरदार निभाया. उनकी गिनती बॉलीवुड के मशहूर विलेन में होती थी. लेकिन एक घटना
ने उन्हें विलेन से कॉमेडियन बनने पर मजबूर कर दिया. दरअसल एक दिन उनका बेटा
सरफराज स्कूल से लड़ाई कर घर लौटा. जब कादर खान ने बेटे से पूछा कि उन्होंने लड़ाई
क्यों की तो सरफराज ने जवाब दिया कि स्कूल में सब उसे विलेन और बुरे आदमी का बेटा
कहकर चिढ़ाते हैं. ये सुनकर कादर खान ठगे से रह गए और उन्होंने उसी वक्त तय किया
कि अब वो फिल्मों में अच्छे रोल करेंगे. बचपन में कादर खान बेहद गरीब थे. एक बार
उनकी मां ने कहा कि गरीबी मिटानी है तो पढ़ाई करो. मां की ये बात कादर खान के
दिलोदिमाग में घर कर गई. उन्होंने पढ़ाई तो की ही साथ में उन्हें लिखने का शौक भी
पैदा हो गया. उन्होंने इस्माइल यूसुफ कॉलेज से इंजीनियरिंग की. वे एमएच सैबू
सिद्दिक कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में सिविल इंजीनियरिंग के प्रोफेसर थे. एक समय पर
कादर खान बॉलीवुड के कॉमेडी किंग कहे जाते थे। अंतिम समय में उनकी सुध लेने वाला
भी कोई नहीं था। हाल ही में खबर आई थी कि उनकी तबीयत काफी खराब हो गई है, जिसके चलते उन्हें कनाडा
ले जाया गया था। कादर खान के साथ काम कर चुके शक्ति कपूर ने बताया है कि उनके
घुटनों में परेशानी चल रही थी। कादर खान का ऑपरेशन भी हुआ था लेकिन बदकिस्मती से
ऑपरेशन गलत हो गया। इससे उनकी तकलीफ घटने की जगह बढ़ गई। आखिरी बार कादर खान को 2015 में अपनी फिल्म 'हो गया दिमाग का दही'
के ट्रेलर लॉन्च में नजर
आए थे। कादर खान के निधन पर जितने गमगीन उनके फैंस हैं, उससे कहीं ज्यादा दुखी
हरिद्वार स्थित बाबा रामदेव के पतंजलि केंद्र के लोग भी हैं। कादर खान करीब दो साल
पहले स्वामी रामदेव के हरिद्वार स्थित पतंजलि केंद्र में भी अपने उपचार के लिए 15 दिन तक दाखिल रहे थे।
वहां के इलाज से कादर खान की तबीयत में काफी सुधार भी आया था। लेकिन फिर हुआ यह कि
कादर खान बीच में इलाज छोड़कर चले गए। कादर खान का मंगलवार को कनाडा में देहांत हो
गया।पतंजलि आयुर्वेद के प्रबंध निदेशक आचार्य बालकृष्ण के मुताबिक, “तब उनकी तबीयत में काफ़ी
सुधार हुआ था”। उन्होंने एक वेबसाइट को दिए इंटरव्यू में कहा, “जब वह आए तब मुश्किल से
बहुत ही कम और धीमे से बोल पाते थे, लेकिन हमारे इलाज से उनको काफी लाभ हो रहा था और वह ठीक से
बोलने लग गए थे। यह ठीक है कि पहले वह खड़े भी नहीं हो पाते थे, लेकिन इलाज के बाद वह
चलने लग गए थे”। उनकी मूल बीमारी अलज़ाइमर थी। दुनिया में अलज़ाइमर को जड़
से ख़त्म करने का कोई इलाज़ नहीं है। पर उनको हमारे यहाँ इलाज से काफी लाभ हो रहा
था।”कादर ख़ान के निधन की
अफ़वाह पहली बार फरवरी 2013 में आई थी। उसके बाद मार्च अप्रैल 2016 में फिर ऐसी खबर आई। फिर
2017 में भी एक दो बार ऐसा
हुआ। अप्रैल 2018 में भी यह अफ़वाह फैली कि कादर खान नहीं रहे। कादर खान और
उनका परिवार इन अफवाहों से इतना परेशान हो उठा था कि कुछ समय पहले कादर खान ने खुद
कहा था-‘मैं जिंदा हूँ। मेरे बारे
में मेरी मौत की अफवाहें न फैलाए, इससे मेरे परिवार को काफी तकलीफ पहुँचती है। एक दिन तो सभी
को जाना है, मौत से किसी को छुटकारा नहीं मिलता। मैं भी आप सभी की दुआओं
को लेकर जाऊँगा।” न्यूज़ ग्राउंड की पूरी टीम की तरफ से मशहुर अभिनेता
स्वर्गीय कादर खान को विनम्र श्रधांजलि:
1. बिछड़ा कुछ इस अदा से कि रुत ही बदल गई इक शख़्स सारे
शहर को वीरान कर गया !
2. एक सूरज था कि तारों के
घराने से उठा आँख हैरान है क्या शख़्स ज़माने से उठा !