प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी के सम्मान में उनके जन्मदिन से पहले जारी किया 100 रुपये का स्मारक सिक्का, जानिए सिक्के की खासियत !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : पूर्व प्रधानमंत्री अटल
बिहारी वाजपेयी की जयंती से एक दिन पूर्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके
सम्मान में 100 रुपये का स्मारक सिक्का जारी किया. 25 दिसंबर को अटल बिहारी
वाजपेयी को 95वां जन्मदिवस है, ऐसे में केंद्र सरकार इस दिन को सुशासन दिवस के रूप में मना
रही है. सिक्का जारी करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि हमारा मन आज भी
नहीं मानता है कि अटलजी हमारे बीच में नहीं हैं, राजनीतिक मंच से करीब एक
दशक दूर रहने के बावजूद भी देश ने इतने शानदार तरीके से उन्हें विदाई दी वह काफी
खास है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिवंगत पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी
वाजपेयी की स्मृति में सौ रुपये का सिक्का जारी किया। संसद के एनेक्सी भवन में
आयोजित समारोह में इस दौरान कार्यक्रम में लंबे वक्त तक अटल बिहारी के सहयोगी रहे
और वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, भाजपा अध्यक्ष अमित शाह
समेत वित्त मंत्री अरुण जेटली और संस्कृति मंत्री महेश शर्मा भी मौजूद रहे। गौरतलब
है कि पिछले साल वित्त मंत्रालय ने सौ रूपये के सिक्के के बारे में अधिसूचना जारी
की थी। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के चित्र वाला 100 रुपए का सिक्का सरकार ने
उनके जम्मलदिन से ठीक पहले जारी किया है. संसद के एनेक्सीि भवन में आयोजित समारोह
में यह सिक्काब जारी किया गया. इस सिक्के का वजन 35 ग्राम है. सिक्के के एक
सिरे पर अटलजी के नाम के साथ उनका चित्र है. नाम अंग्रेजी और देवनागरी में लिखा
है. तस्वीर के नीचे अटलजी के जन्म का साल 1924 और मृत्यु का साल 2018
लिखा है. स्मारक सिक्के
पर सामने की तरफ भारत का प्रतीक चिह्न है। इस पर अशोक स्तं2भ और इसके नीचे देवनागिरी
लिपी में 'सत्यिमेव जयते' अंकित है। सिक्के पर
देवनागिरी लिपी में 'भारत' और रोमन अक्षरों में 'INDIA'लिखा है। प्रतीक चिह्न के
नीचे सिक्के का मूल्य '100' अंकित है। सिक्के के दूसरी तरफ पूर्व प्रधानमंत्री अटल
बिहारी वाजपेयी की तस्वीर और देवनागिरी व रोमन लिपि में उनका नाम लिखा गया है।
उनके जन्म और निधन का साल 1924-2018 भी इस पर अंकित है।पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का निधन इसी साल 16 अगस्त को हुआ था. वे 93
साल के थे. अटलजी तीन बार
देश के प्रधानमंत्री रहे. उनके सम्मान में कई जगहों के नाम बदले गए हैं. हिमालय की
चार चोटियों के नाम भी उनके नाम पर रखे गए. छत्तीसगढ़ के नए रायपुर का नाम अटल नगर
रखा गया.इसके अलावा उत्तराखंड सरकार ने देहरादून एयरपोर्ट का नाम बदलकर अटलजी के
नाम पर रखा. उत्तरप्रदेश सरकार ने भी लखनऊ में हजरतगंज चौराहे का नाम बदलकर अटल
चौक रखने का फैसला किया. पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन पर 25
दिसंबर को हर साल 'सुशासन दिवस' मनाया जाता है। वाजपेयी
को 2014 में देश के सर्वोच्च
नागरिक सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। इससे पहले एक हजार रुपए का
सिक्काा भी जारी किया जा चुका है. इस सिक्केक को वर्ष 2010 में जारी किया गया था. इस
सिक्केा को तमिलनाडु के तंजावुर में वृहदीश्वर के नाम से विख्यात मंदिर के एक हजार
साल पूरा होने पर बनाया गया था. भारतीय आयकर विभाग के 150 साल पूरा होने पर 150
रुपये का सिक्काभ जारी
किया गया था. 2010 में जारी हुआ यह सिक्काक अर्थशास्त्रीो चाणक्यय को समर्पित
किया गया था. इसके अलावा गुरु रविन्द्र नाथ टैगोर और सीएजी के 150 साल पूरा होने के
उपलक्ष्य में 2011 में जारी किया गया था. साल 2014 में जवाहर लाल नेहरू की 125वीं वर्षगांठ के अवसर पर 125
रुपए का सिक्काजारी किया गया था. इसके बाद पूर्व राष्ट्रकपति
सर्वपल्ली राधाकृष्णन की 127वीं वर्षगांठ पर भी 125 रुपये का सिक्का4 जारी किया गया था. इसके
अलावा 6 दिसंबर, 2015 में बाबासाहेब आंबेडकर की
125वीं वर्षगांठ पर भी इस
विशेष सिक्केष को जारी किया गया. 60 रुपए के इस सिक्केा को साल 2012 में जारी किया गया था. यह
सिक्काष भारत सरकार के 60 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जारी किया गया था. 60 रुपए के इस सिक्के की
ढलाई कोलकाता मिंट में की गई थी. सरकार ने बतौर निशानी इस सिक्के. को संग्रहालय
में रखा हुआ है. प्रधानमंत्री ने कहा कि सिद्धांतों और कार्यकर्ता के बल पर अटलजी
ने इतना बड़ा राजनीतिक संगठन खड़ा किया और काफी कम समय में देशभर में उसका विस्तार
भी किया. उन्होंने कहा कि अटलजी के बोलने का मतलब देश का बोलना और सुनने का मतलब
देश को सुनना था. उन्होंने कहा कि अटलजी ने लोभ और स्वार्थ की बजाय देश और
लोकतंत्र को सर्वोपरि रखा और उसे ही चुना. कार्यक्रम में पीएम मोदी बोले कि अटलजी
का सिक्का हमारे दिलों पर 50 साल चला और आगे भी चलेगा. उन्होंने कहा कि अटलजी ने जो चाहा
है उसे हर हाल में पूरा करेंगे. उन्होंने कहा कि वाजपेयी जी हमेशा लोकतंत्र को
मजबूत करना चाहते थे, यही कारण रहा कि जब जरूरत पड़ी तो उन्होंने भारतीय जनता
पार्टी का गठन किया. प्रधानमंत्री ने कहा कि आज कुछ लोगों के लिए सत्ता ऑक्सीजन की
तरह है, वो सत्ता के बिना नहीं रह
सकते हैं. लेकिन अटलजी के राजनीतिक कार्यकाल का अधिकतर समय विपक्ष में बीता और
उन्होंने कभी भी अपनी विचारधारा से समझौता नहीं किया. आपको बता दें कि पूर्व
प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर, 1924 को मध्य प्रदेश के
ग्वालियर में हुआ था. वहीं, इसी साल 16 अगस्त को 94 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया था. अटल बिहारी वाजपेयी
2009 से ही लंबी बीमारी से जूझ
रहे थे और पिछले करीब 8-9 साल से राजनीति से दूर थे.