विधायक के रूप में सिल्वर जुबली पूरी निर्दलीय होकर भी 25 साल तक सत्ता में रहे राजा भैया ,लखनऊ में बाहुबली विधायक राजा भैया दिखाएंगे सियासी ताकत !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : निर्दलीय राजनीति छोड़कर दलगत राजनीति की शुरुआत करने वाले बाहुबली विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया ने लखनऊ के रमाबाई मैदान में शुक्रवार को एक विशाल जनसभा को संबोधित किया. रैली को संबोधित करते हुए राजा भैया ने कहा कि रेप और हत्या के बाद पीड़ित को जाति के आधार पर मिलने वाला मुआवजा बंद होना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार पर इस पर ध्यान देना चाहिए. क्योकि किसी भी पीड़ित परिवार में दुर्घटना होने के बाद उसकी जाति पूछकर मदद नहीं करनी चाहिए. हम इसका विरोध करते हैं. आज की इस रैली में करीब 2 लाख से अधिक भीड़ जमा हुई. दरअसल पूरी कवायद राजा भैया को उत्तर भारत में बतौर क्षत्रिय नेता स्थापित करने की है. माना जा रहा है कि विशाल रैली के जरिए वह शक्ति प्रदर्शन करेंगे. दरअसल उनकी राजनीति अगड़ा बनाम पिछड़ा ही रहेगी. पिछले दिनों उन्होंने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के चलते सवर्णों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया था. बता दें, राजा भैया पिछले 25 वर्षों से कुंडा से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर यूपी विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. निर्दलीय रहते हुए भी राजा भैया की धमक सत्ता के गलियारों में हमेशा महसूस की गई. बसपा को छोड़ दें तो सत्ता किसी भी पार्टी की हो राजा भैया मंत्री जरूर रहे. वर्ष 2009 में बसपा सरकार से टकराव के बाद 18 महीने जेल में भी रहे, लेकिन उनका कद नहीं घटा. हालांकि अपने सियासी जीवन में वे कभी भी सीधे तौर पर किसी राजनीतिक दल में न तो शामिल हुए और न ही अपनी पार्टी खड़ी की. 2004 और 2013 में बनी समाजवादी पार्टी की मुलायम सिंह और अखिलेश यादव सरकार में मंत्री बने. भारतीय जनता पार्टी की कल्याण सिंह सरकार में भी शामिल रहे थे. लेकिन 2002 में बीजेपी के समर्थन से बनी बसपा सरकार में वह शामिल नहीं हुए. इस तरह तकरीबन 25 वर्ष से वह निर्दलीय विधायक के तौर पर ही राजनीति करते रहे. सपा-बसपा में गठबंधन के बाद ज्यसभा चुनाव में उन्होंने अखिलेश का साथ छोड़ दिया और बीजेपी समर्थित प्रत्याशी के पक्ष में वोट देकर समीकरण बिगाड़ दिया. इसके बाद कयास लगने लगे थे कि राजा भैया जल्द ही योगी सरकार में मंत्री बने नजर आएंगे. लेकिन उन्होंने एक बार फिर अलग दांव चला. उन्होंने समर्थकों से विचार विमर्श कर अलग राजनीतिक दल बनाकर मैदान में कूदने की घोषणा की दी. रैली को संबोधित करते हुए राजा भैया ने कहा कि 25 साल विधानसभा में पूरे होने पर सर्वे कराया गया. इसमें 20 लाख लोगों ने भाग लिया और 80 फीसदी से ज्यादा लोगों ने नए दल के गठन के लिए रजामंदी दी. पार्टी के नाम के लिए चुनाव आयोग में प्रक्रिया चल रही है. राजा भैया ने कहा कि जनसत्ता दल, जनसत्ता पार्टी या जनसत्ता लोकतांत्रिक पार्टी में से कोई नाम मिलेगा. उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी मजदूर, किसान और जवान के लिए संकल्पित है. साथ ही सेना और अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए भी हम काम करेंगे. हमारी पार्टी का एजेंडा है कि सेना और अर्धसैनिक बल के जवानों के सीमा पर शहीद होने पर 1 करोड़ रुपये की सहायता राशि दी जाए. दरअसल पूरी कवायद राजा भैया को उत्तर भारत में बतौर क्षत्रिय नेता स्थापित करने की है. वहीं उनकी राजनीति अगड़ा बनाम पिछड़ा ही रहेगी. पिछले दिनों उन्होंने एससी/एसटी एक्ट में बदलाव के चलते सवर्णों के उत्पीड़न का मुद्दा उठाया था. बता दें, राजा भैया पिछले 25 वर्षों से कुंडा से निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर यूपी विधानसभा में प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. राजा भैया का प्रतापगढ़, सुल्तानपुर, अमेठी और इलाहबाद में अच्छी पकड़ मानी जाती है. राजा के समर्थकों का दावा है कि आज की रैली में करीब एक लाख समर्थक जुटेंगे.