26/11 मुंबई हमले में सहीद हुए जवानों की 10 वी बरसी पर भारत ने 'अमेरिका की पहल का स्वागत किया और साजिशकर्ता के खिलाफ धीमी कार्रवाई के लिए पाकिस्तान को सुनाई खरी-खोटी !
नई दिल्ली(न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा :26/11 हमले की 10वीं बरसी पर सोमवार को भारत
ने एक बार फिर से पाकिस्तान से कहा कि वह अपना दोहरा मापदंड छोड़ दे और खौफनाक
हमले के साजिशकर्ताओं को जल्द से जल्द सजा दे। विदेश मंत्रालय ने कहा कि पाकिस्तान
की सड़कों पर खुलेआम घूम रहे हमले के साजिशकर्ताओं को सजा में संवेदनशीलता नहीं
दिखा रहा है। उसने नवाज शरीफ की टिप्पणी का उल्लेख करते हुए कहा कि पाकिस्तान के
पूर्व प्रधानमंत्री इस साल की शुरुआत में खुद कुबूला था कि आतंकियों को पाक से
भेजा गया था। उसने कहा कि यह केवल आतंकियों का शिकार बने निर्दोष लोगों के
परिवारों के प्रति पाकिस्तान की जिम्मेदारी ही नहीं है बल्कि एक अंतरराष्ट्रीय
प्रतिबद्धता भी है। भारत ने अमेरिका के उस कथन की भी सराहना की जिसमें उसने
पाकिस्तान से लश्कर-ए-ताइबा व अन्य सहित 26/11 के लिए जिम्मेदार आतंकियों पर
प्रतिबंध लगाने की मांग की। गौरतलब है कि साल 2008 में हुए उस आतंकी हमले में 166
लोगों की मौत हो गई थी, जबकि सैकड़ों लोग घायल
हुए थे। विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने अमेरिका के उस बयान का स्वागत किया है, जिसमें उसने पाकिस्तान से आतंकी संगठनों पर प्रतिबंध के
खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कहा। साथ ही हमले से जुड़े लोगों की सूचना देने वालों
को अमेरिका 35.5 करोड़ रुपए (50 लाख डॉलर) तक का इनाम देने का ऐलान किया है। भारत
ने कहा- 26/11 की साजिश रचने वाले बिना माफी के साथ खुलेआम पाकिस्तान की गलियों
में घूम रहे हैं। इस हमले की साजिश पाक में रची गई, साथ ही इसे अंजाम भी वहीं
से दिया गया। पाक को दोहरा रवैया छोड़कर आतंकियों को सजा दिलानी चाहिए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मुंबई हमले और सर्जिकल स्ट्राइक को लेकर सोमवार को
जयपुर में एक सभा के दौरान कांग्रेस पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आज 26
नवंबर है और देश 26/11 व उसके गुनहगारों को कभी नहीं भूलेगा। मैं देश को भरोसा
दिलाता हूं कि हम निश्चित तौर पर मुंबई हमले के गुनहगारों को सजा दिलाकर रहेंगे।
10 साल पहले हुई आतंकवाद की इस घटना से पूरी दुनिया हिल गई थी। उस समय कांग्रेस की
सरकार थी और पूरा देश एक था। वहीं, जब भारत ने सर्जिकल
स्ट्राइक की तो कांग्रेस ने देश को दो फाड़ कर दिया। मोदी ने कहा कि 2014 में
चुनाव जीतने के लिए देश भक्ति का पाठ पढ़ाने वाली कांग्रेस अब देश के जांबाजों के
शौर्य पर सवाल उठा रही है। कांग्रेस कह रही है कि सर्जिकल स्ट्राइक का वीडियो
दिखाओ। पीएम ने लोगों से पूछा, मौत को मुट्ठी में लेकर
निकला देश का जवान हाथ में कैमरा लेकर जाएगा क्या? पीएम ने राजस्थान में
यूपीए सरकार के लिए कहा कि जब दिल्ली सरकार रिमोट कंट्रोल से चलती थी और
महाराष्ट्र में भी कांग्रेस की सरकार थी, तब 26/11 को मुंबई में
आतंकवादियों ने हमला कर लोगों को गोलियों से भून दिया था। आज हमने आतंकियों का
कश्मीर से बाहर निकलना तक मुश्किल कर दिया है। आतंकियों को उनकी मौत दिखाई दे रही
है। विदेश मंत्री माइकल आर पोम्पियो ने रविवार को ऐलान किया कि जो भी व्यक्ति हमले
की साजिश रचने वालों या इसमें मदद करने वालों की जानकारी देगा, उसे पुरस्कार मिलेगा। अमेरिकी सरकार और सभी नागरिकों की ओर
से मैं भारत और मुंबई शहर के प्रति हमदर्दी जता रहा हूं। हम आतंकी हमले में अपनों
को खोने वाले परिवारों और उनके दोस्तों के साथ खड़े हैं। इसमें छह अमेरिकी नागरिकों
की भी जान गई थी। 26/11 के आतंकी हमले ने पूरी दुनिया को दहला दिया था।’’ पोम्पियो ने कहा, ‘‘पाकिस्तान से कहा जाएगा
कि वह अमानवीय हमले के लिए जिम्मेदार लश्कर-ए-तैयबा और दूसरे आतंकी संगठनों पर
प्रतिबंध लगाए। पीड़ित परिवारों के लिए यह बेहद दुख की बात है कि हमले की साजिश
में शामिल लोगों के खिलाफ 10 साल बाद भी कार्रवाई नहीं हो पाई।’’ 26 नवंबर 2008 को 10 आतंकी कराची से समुद्र के रास्ते मुंबई
पहुंचे थे। उन्होंने छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताज होटल, ट्राइडेंट होटल और यहूदी केंद्र पर हमला किया था। इसमें 166
लोग मारे गए थे। इनमें 28 विदेशी नागरिक भी शामिल थे। करीब 60 घंटे मुठभेड़ चली
थी। एक आतंकी कसाब को जिंदा पकड़ा गया था। हमलों की 10वीं बरसी पर शहीदों को
श्रद्धांजलि देने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस दक्षिण मुंबई स्थित
पुलिस जिमखाना पहुंचे। उन्होंने कहा- “मुंबई की सुरक्षा के लिए
लड़ने और अपनी जान देने वालों पर हमें गर्व है और हम आगे भी अपने राज्य की सुरक्षा
के लिए मेहनत करते रहेंगे।” इस मौके पर उनके साथ
राज्य के गवर्नर सी विद्यासागर राव और अन्य कई कैबिनेट मंत्री मौजूद थे। राज्य के
पुलिस प्रमुख दत्ता पडसालगिकर और मुंबई पुलिस कमिश्नर सुबोध कुमार जयसवाल भी
समारोह में मौजूद थे। मुंबई में हुए 26/11 आतंकी हमले से निपटने की रणनीति एनएसजी
की टीम ने दिल्ली से मुंबई की उड़ान के दौरान ही बना ली थी। हमारे के लिए सबसे
बड़ी चुनौती होटल में मौजूद मेहमानों की रक्षा करते हुए आतंकियों को मारना था। अगर
उस वक्त ऐसा न करते तो जो बचा उसे बचा पाना भी मुश्किल था। यह कहना है 26/11 आतंकी
हमले के बाद जवाबी कार्रवाई की कमान संभालने वाले तत्कालीन एनएसजी डीआईजी
ब्रिगेडियर गोविंद सिंह सिसौदिया का। उन्होंने कहा कि निश्चित तौर पर इस हमले के
बाद पूरी दुनिया एकजुटता से आतंक के खिलाफ खड़ी हुई। दून के सीमाद्वार निवासी
ब्रिगेडियर सिसौदिया का कहना है कि आज मुंबई हमले को एक दशक पूरा हो गया। हमले की
सूचना के बाद हमें अपनी टीम को मानेसर से दिल्ली होते हुए मुंबई ले जाना था। उड़ान
भरने से पहले ही हमने प्राथमिक सूचनाएं एकत्र कर लीं थी। उड़ान के दौरान दो घंटे
में हमने हमले से निपटने की रणनीति भी बना ली थी। ब्रिगेडियर सिसौदिया ने कहा कि
जब वे मुंबई पहुंचे तो चौबीस घंटे चलते रहने वाला शहर खामोश था। सड़कों पर सन्नाटा
था। मौके पर पहुंचे तो वहां मौजूद अफसरों ने पूरा मामला समझाया। अब चुनौती यह थी
कि होटल में मौजूद आतंकियों से निपटने के साथ ही करीब 600 कमरों में फंसे निर्दोष
लोगों को भी बचाना था। इस चुनौतीपूर्ण काम में निश्चित तौर पर समय लगना ही था।
उन्होंने कहा कि जो लोग सवाल उठाते हैं कि ऑपरेशन में लंबा समय लगा था, वह गलत हैं। वहां आम जन को बचाना था। ब्रिगेडियर सिसौदिया
की टीम ने अपनी जान पर खेलकर होटल ताज ओबेरॉय और नरीमन प्वाइंट से आतंकवादियों का
सफाया कर दिया था। जवाबी हमले में शहीद हुए अपनी टीम के सदस्यों मेजर उन्नीकृष्णन
और गजेंद्र सिंह बिष्ट को याद करते हुए ब्रिगेडियर सिसौदिया को आज भी बहुत दुखी हो
जाते हैं। उन्होंने कहा कि मुझे गर्व भी है कि उन्होंने देश की रक्षा के लिए प्राण
न्यौछावर किए। ब्रिगेडियर सिसौदिया का कहना है कि 26/11 आतंकी हमले के बाद आतंकवाद
को पूरी दुनिया ने माना। पूरी दुनिया ने माना कि इसके खिलाफ एकजुटता के साथ लड़ाई
जरूरी है। उन्होंने कहा कि पहले सरकार की विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय नहीं
होता था, लेकिन इस ऑपरेशन के बाद
से ही समन्वय बढ़ गया। खुफिया एजेंसियों की सूचनाएं भी साझा होने लगीं। कई राज्यों
ने अपनी कमांडो फोर्स बना ली थी और अगर अबसुरक्षा की बात करे तो 26/11 का हमला हमें कभी न भरने वाले जख्म के साथ-साथ
कई सबक भी दे गया। इन्हीं से सबक लेते हुए देश ने अपनी समुद्री सीमाओं के निगरानी
तंत्र को पुख्ता किया है।वर्ष 2014 में
समुद्री सुरक्षा पर निगरानी तंत्र को पुख्ता करने के लिए गुरुग्राम में सूचना
प्रबंधन एवं विश्लेषण केंद्र (आईएमएसी) का गठन किया गया। यह नेशनल कमांड कंट्रोल
कम्युनिकेशन एंड इंटेलिजेंस नेटवर्क की नोडल संस्था है, जो 51 तटरक्षक थानों को एक साथ जोड़ती है। तटीय निगरानी
नेटवर्क (सीएसएन) के तहत राडार, कैमरे और सेंसर सुरक्षा
के लिए लगाए जा रहे हैं। 2009 में सागर प्रहरी बल का गठन किया गया।मुंबई हमले ने यह दिखा दिया था कि एक छोटी नाव
भी कितना बड़ा खतरा हो सकती है। देश में करीब 2,20,000 छोटी नावें हैं। राज्यों के
हिसाब से मछुआरों को अलग-अलग रंग के पहचान पत्र और बायोमैट्रिक कार्ड भी जारी किए
गए। मछुआरे सुरक्षा बलों की ‘आंख-कान’ बन रहे हैं।वर्ष
2009 से पहले तटरक्षक के विमान साल में औसतन 10 हजार घंटे उड़ते थे, जो अब बढ़कर 21 हजार घंटे हो गए हैं। इसके अलावा 2009 के बाद
से हर रोज औसतन 35-40 नाव या जहाज और 10-15 विमान निगरानी रखते हैं।
हमले में सहीद हुए जवानों की मुख्या सूचि :
मेजर संदीप उन्नीकृष्णन : भारतीय सेना में मेजर जो बाद में नेशनल सिक्योरिटी गार्ड
में स्पेशल टास्क फोर्स का हिस्सा बने। वे नवंबर 2008 में मुंबई के हमलों में
आतंकवादियों से लड़ते हुए मारे गए। उन्होंने इस ऑपरेशन में अपने साथियों को यह
कहते हुए पीछे कर दिया था कि ऊपर मत आना, मैं उन्हें संभाल लूंगा। उन्नीकृष्णन ने न सिर्फ आतंकियों
की गोलियां अपने ऊपर लीं बल्कि अपने एक घायल साथी को भी सुरक्षित बाहर तक पहुंचा
दिया। उनकी बहादुरी के लिए उन्हें 26 जनवरी 2009 को अशोक चक्र से सम्मानित किया
गया।
हेमंत करकरे : 1982 बैच के आईपीएस
अधिकारी थे। उनकी कार्यकुशलता को देखते हुए ही उन्हें मुंबई एटीएस का प्रमुख बनाया
गया था। उन्होंने नक्सलियों के खिलाफ भी काबलियत का परिचय दिया था। वह मुंबई हमले
के दौरान 29 सितंबर 08 को मालेगांव में हुए बम विस्फोट की गुत्थी सुलझाने में जुटे
हुए थे। कामा अस्पताल में आतंकियों के पहुंचने और लोगों को मारे जाने की सूचना पर
वह अपने जांबाज साथियों के साथ वहां पहुंचे थे। कामा अस्पताल के बाहर पहुंचते ही
उन्हें आतंकियों के हमले का शिकार होना पड़ा। इस मुठभेड़ में वह वीरगति को प्राप्त
हुए।
अशोक कामटे : मुंबई हमले की रात मैट्रो
सिनेमा के पास आतंकियों को जवाब देने के लिए कामटे को वहां भेजा गया था। आतंकियों
से आमने सामने की मुठभेड़ में उन्होंने तब तक जवाबी कार्यवाही की जब तक उनके शरीर
में जान रही। 28 नवंबर को पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार कर दिया
गया।
अरुण जाधव : पुलिस अधिकारी अरुण जाधव
आतंकियों से सीधी चली मुठभेड़ में घायल हो गए थे। उन्होंने कामा अस्पताल में
मरीजों को सुरक्षित बाहर निकालने में अहम भूमिका निभाई थी। घायल अवस्था में उन्हें
अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां बाद में वह ठीक हो गए।
एएसआई तुकाराम ओंबले : मुंबई हमले के दौरान
ओंबले गिरगांव चौपाटी में तैनात थे। सेना से रिटायर होने के बाद उन्होंने मुंबई
पुलिस ज्वाइन की थी। आतंकी हमले के दौरान उनके पास केवल एक लाठी ही थी, लेकिन वह इससे घबराए नहीं
और आतंकियों को रोककर उनका सामना किया। उन्होंने आतंकियों की सारी गोलियां अपने
सीने पर लीं और एक आतंकी को अंत तक नहीं छोड़ा। यह आतंकी था अजमल कसाब जिसको 2111
को फांसी दी गई। 26 जनवरी 2009 को उन्हें अशोक चक्र से सम्मानित किया गया।
विजय सालस्कर : सालस्कर उसी टीम का
हिस्सा थे जो टीम कामा अस्पताल में आतंकियों से मुठभेड़ करने निकली थी। कामा
अस्पताल पहुंचते ही आतंकियों ने अपनी बंदूकों का रुख इनकी ओर कर दिया, जिसमें उनकी मौत हो गई।