जम्मू-कश्मीर : राज्यपाल के विधानसभा भंग करने पर , सियासी दलों की जल्द चुनाव करवाने की मांग, आखिर बीजेपी या NC-पीडीपी: कौन कहलाएगा कश्मीर की सियासत का बाजीगर !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा : लोकसभा चुनाव
2019 से पहले बीजेपी के खिलाफ जम्मू-कश्मीर में महागठबंधन बनने की कवायद शुरू हुई
थी. लेकिन अमली जामा पहनाए जाने से पहले राज्यपाल ने विधानसभा भंग करने की सिफारिश
कर इन कोशिशों की हवा निकाल दी.बता दें
कि जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी के बीच गठबंधन टूटने के बाद से राज्यपाल
शासन लगा था. कांग्रेस, नेशनल कान्फेंस और पीडीपी विधानसभा भंग करने की मांग लगातार
उठा रही थीं, लेकिन चुनाव के लिए तैयार नहीं थी. जबकि बीजेपी पीपुल्स
कान्फ्रेंस अध्यक्ष सज्जाद गनी लोन के नेतृत्व में तीसरे मोर्चे की सरकार बनाने की
कवायद में थी, लेकिन बहुमत का आंकड़े के लिए उन्हें 18 अन्य विधायकों की
जरूरत थी. ऐसे में विपक्ष की पार्टी में टूट के बिना मुमकिन नहीं था.
1) गठबंधन की कोशिशें तेज हुईं : जम्मू-कश्मीर में बुधवार
को पीडीपी, नेशनल कॉन्फ्रेंस और
कांग्रेस ने गठबंधन सरकार बनाने के संकेत दिए। पीडीपी नेता अल्ताफ बुखारी ने कहा-
हमें कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस का समर्थन है। 60 विधायक हमारे साथ हैं। इससे
पहले कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा- हमारा ये कहना था कि क्यों ना एक होकर
सरकार बनाएं। इस सुझाव पर बातचीत चल रही है। जम्मू-कश्मीर में 16 साल बाद इस तरह
के हालात बने थे। 2002 में भी पीडीपी-कांग्रेस ने मिलकर सरकार बनाई थी और नेशनल
कॉन्फ्रेंस ने बाहर से समर्थन दिया था। यह सरकार पांच साल चली थी।
2) महबूबा ने दावा पेश किया : महबूबा ने चिट्ठी में
राज्यपाल को लिखा- आप जानते हैं कि पीडीपी राज्य में सबसे बड़ी पार्टी है। हमारे
पास 29 विधायकों की ताकत है। आपको मीडिया के जरिए पता लगा होगा कि नेशनल
कॉन्फ्रेंस और कांग्रेस भी सरकार बनाने में हमारा समर्थन करने की इच्छा रखती हैं।
नेशनल कॉन्फ्रेंस के 15 और कांग्रेस के 12 विधायक हैं। सभी मिलकर हमारी संख्या 56
हो जाती है। मैं अभी श्रीनगर में हूं और मेरे लिए आपसे अभी मुलाकात संभव नहीं है।
इस पत्र के जरिए हम आपको ये सूचित कर रहे हैं कि हम सरकार बनाने का दावा पेश करने
के लिए जल्द ही आपसे मिलना चाहते हैं।
3) सज्जाद लोन ने भी दावा किया : राज्यपाल के निजी सचिव
जीवन लाल को वॉट्सऐप पर भेजे पत्र को सज्जाद ने ट्विटर पर शेयर किया। इसमें सज्जाद
ने दावा किया कि भाजपा के सभी विधायकों का समर्थन हमें हासिल है। इसके अलावा 18 से
ज्यादा अन्य विधायक भी हमें सपोर्ट कर रहे हैं। ये संख्या बहुमत से ज्यादा है। मैं
भाजपा और दूसरे सदस्यों के समर्थन के पत्र पेश कर रहा हूं। हम भरोसा दिलाते हैं कि
राज्य में शांति स्थापित करने के लिए मजबूत और टिकाऊ सरकार बनाएंगे। पीपुल्स
कॉन्फ्रेंस के 2 विधायक हैं, भाजपा के सदस्यों की संख्या 25 और इसके अलावा लोन ने 18
अन्य के समर्थन की बात कही। इस तरह सज्जाद ने 45 सदस्यों के समर्थन का दावा किया।
4) पीडीपी के बागी इमरान अंसारी का दावा : इन दावों के बीच
पीडीपी के बागी नेता इमरान अंसारी ने कहा कि महबूबा 18 पीडीपी विधायकों के समर्थन
का दावा नहीं कर सकती हैं। इन विधायकों का विश्वास महबूबा मुफ्ती को हासिल नहीं
है। अंसारी ने सज्जाद लोन को समर्थन देने की बात भी कही।
5) विधानसभा भंग : रात 9 बजे राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने
जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग कर दी। आधिकारिक सूचना में राजभवन ने कहा कि राज्यपाल
ने जम्मू-कश्मीर के संविधान की धारा 53 के तहत विधानसभा भंग की। गुलाम नबी आजाद ने
कहा- राज्य की सभी पार्टियां सरकार बनाने के बारे में सोच रही थीं। लेकिन अफवाहों
पर ही विधानसभा भंग कर दी गई। यह भाजपा की तानाशाही है।
6) आगे क्या होगा : विधानसभा भंग होने के बाद राज्य में
निर्वाचन के जरिए ही नई सरकार बनाई जा सकती है। माना जा रहा है कि 2019 में होने
वाले लोकसभा चुनाव के साथ ही राज्य में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। जिस तरह
पीडीपी ने कांग्रेस और नेशनल कॉन्फ्रेंस के साथ समर्थन का दावा किया, ऐसे में आगामी चुनावों
में इनके साथ आने के भी कयास हैं।
जम्मू-कश्मीर विधानसभा में कुल सीटें : 87
पार्टी
सीटें
पीडीपी
28
भाजपा
25
नेकां
15
कांग्रेस
12
अन्य
7
कुल
87
बहुमत के लिए जरूरी : 44
जम्मू-कश्मीर की सियासत में बीजेपी पहली बार 2015 में25 विधायक जीतने में सफल रही थी. पीडीपी के बाद
दूसरी सबसे बड़ी पार्टी थी. ऐसे में बीजेपी-पीडीपी गठबंधन की सरकार बनी थी. लेकिन
दोनों के बीच 40 महीने ही सरकार चल सकी. दोनों पार्टियों के बीच सरकार में रहते
हुए भी बेहतर तालमेल नहीं दिखे. वहीं, बीजेपी 25 सीटें जीतने के बाद भी पांच साल राज्य की सत्ता
में नहीं रह सकी. पार्टी के कई विधायक पहली बार चुनाव जीते थे, लेकिन वे बतौर विधायक 6
साल का कार्यकाल पूरा नहीं कर पाए.बीजेपी
की तीसरे मोर्चे की सरकार बनाने की कोशिश के बीच एक-दूसरे के कट्टर विरोधी नेशनल
कान्फ्रेंस और पीडीपी व कांग्रेस मिलकर सरकार बनाने की कवायद में जुट गए थे.लेकिन इनकी सरकार बनती इससे पहले राज्यपाल ने
विधानसभा को भंग कर दिया. इस तरह से विपक्ष मिलकर भी सरकार नहीं बना सका. अगर ऐसा
होता तो यह गठबंधन 2019 के आम चुनाव में भी बड़ी ताकत बन सकता था. जम्मू-कश्मीर
में पीडीपी 28 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी, लेकिन बहुमत के आंकड़े से
दूर होने के चलते उसे बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनानी पड़ी. लेकिन 40 महीने के
उठापटक के बाद गठबंधन से अलग होना पड़ा. सत्ता से बाहर होने के बाद 6 विधायक और एक
सांसद ने पार्टी से बगावत की. किसी भी टूट से बचने और सत्ता में वापसी के लिए
पीडीपी नेशनल कान्फ्रेंस और कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाने की कवायद कर रही थी,
लेकिन राज्यपाल ने इस
मंसूबे पर पानी फेर दिया. हालांकि, पीडीपी खुद को टूट से बचाने में सफल हुई.नेशनल कान्फ्रेंस के पास 15 विधायक थे. पार्टी
प्रमुख उमर अब्दुल्ला लगातार विधानसभा भंग करने की सिफारिश कर रहे थे, लेकिन चुनाव के लिए राजी
नहीं थे. अगर तीसरे मोर्चे की सरकार वजूद में आती तो नेशनल कान्फ्रेंस के विधायक
भी टूट सकते थे. ऐसे में विधानसभा भंग होने से विधायकों की टूट से पार्टी बच गई,
लेकिन पार्टी को यह नुकसान
हुआ कि महागठबंधन की सरकार नहीं बन सकी.जम्मू-कश्मीर में कांग्रेस के पास 12 विधायक थे. कांग्रेस सरकार बनाने की
स्थिति में नहीं थी. हालांकि विधायकों के टूटने का खतरा पार्टी पर लगातार बना हुआ
था. विधानसभा भंग होने से कांग्रेस को यह नुकसान हुआ कि 2019 के चुनाव से पहले
राज्य में महागठबंधन वजूद में नहीं आ सका. हालांकि, पीडीपी की तरह कांग्रेस
अपने विधायकों को टूटने से बचा ले गई.