सीबीआइ में घमासान: शीर्ष अधिकारियों पर भी उछला कीचड़, ट्रांसफर किए गए CBI ऑफिसर ने SC से कहा - राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ जांच में दख़ल दे रहे थे अजीत डोभाल , मंत्री ने भी ली थी रिश्वत !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : सीबीआई में अफसरों की जंग की आंच अब राष्ट्रीय सुरक्षा
सलाहकार और केंद्रीय मंत्री तक पड़ने लगी है। सीबीआई में DIG रैंक के अफसर मनीष कुमार
सिन्हा ने सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल कर अपने नागपुर तबादले को चुनौती दी और
जांच एजेंसी में सरकार के दखल के गंभीर आरोप लगाए।इनमें केंद्रीय मंत्री हरिभाई चौधरी और
राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल समेत कुछ सचिव भी शामिल हैं। चौधरी
पर तो उन्होंने रिश्वत का भी आरोप जड़ दिया। सिन्हा मीट कारोबारी मोइन कुरैशी केस
में अस्थाना पर 2.95 करोड़ घूस लेने के आरोपों की जांच कर रहे थे। सिन्हा का
आरोप है कि इस जांच में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने दो मौकों
पर तलाशी अभियान रोकने के निर्देश दिए थे। अस्थाना की शिकायत करने वाले हैदराबाद
निवासी सतीश बाबू सना ने उन्हें यह भी बताया था कि गुजरात से सांसद और मौजूदा
कोयला व खनन राज्यमंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी को भी कुछ करोड़ रिश्वत दी गई थी।
सिन्हा ने केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (CVC) पर भी दखल के आरोप लगाए।आंध्र प्रदेश कैडर के अधिकारी सिन्हा विशेष सीबीआइ निदेशक राकेश अस्थाना के
खिलाफ चल रही जांच की निगरानी कर रहे थे। इस बीच, सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा
ने सीलबंद लिफाफे में अपना जवाब सुप्रीम कोर्ट में दाखिल कर दिया है। सुप्रीम
कोर्ट इस पर मंगलवार को सुनवाई करेगा। सिन्हा का आरोप है कि जांच में राकेश
अस्थाना को मदद पहुंचाने के लिए ही उन्हें नागपुर भेजा गया। उनके वकील ने सुप्रीम
कोर्ट से कहा कि ऐसे सबूत हैं, जो चौंका देंगे। लेकिन कोर्ट ने कहा कि अब हमें कुछ नहीं
चौंकाता। कोर्ट ने अर्जी पर तुरंत सुनवाई से इनकार किया, लेकिन कहा कि याची
मंगलवार को सीबीआई चीफ की सुनवाई के दौरान मौजूद रहे।डीआइजी सिन्हा ने हालांकि किसी भी मामले में
सीधे इन अधिकारियों के हस्तक्षेप की बात नहीं की है। उन्होंने आरोपित से पूछताछ के
दौरान इनके नाम सामने आने की बात कही है। आपसी लड़ाई में जुड़े अधिकारियों को
हटाने के सिलसिले में सिन्हा का नागपुर तबादला कर दिया गया है। इससे पहले राकेश
अस्थाना मामले की जांच से जुड़े डीएसपी एके बस्सी अपने तबादले को सुप्रीम कोर्ट
में चुनौती दे चुके हैं। उनका तबादला पोर्ट ब्लेयर किया गया है।मनीष सिन्हा की ओर
से वकील सुनील फर्नाडीस ने मंगलवार को अर्जी पर तुरंत सुनवाई की गुहार लगाई।
फर्नाडीस का कहना था कि इसके तथ्यों को देखकर सुप्रीम कोर्ट चौंक जाएगा। लेकिन,
चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने
यह कहते हुए जल्द सुनवाई से इन्कार कर दिया कि कुछ भी हमें चौंकाता नहीं है। मनीष
सिन्हा सीबीआइ के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ दर्ज एफआइआर की जांच कर रही
टीम के मुखिया थे और जांच की निगरानी कर रहे थे। 24 अक्टूबर को बिना कारण
बताए उनका तबादला कर दिया गया। मनीष कुमार के अनुसार, वे 2013 में प्रतिनियुक्ति पर
सीबीआइ आए थे और कई महत्वपूर्ण केस जांच से जुड़े रहे। इनमें नीरव मोदी और मेहुल
चोकसी केस भी शामिल है। मनीष कुमार सिन्हा ने अर्जी में राकेश अस्थाना के खिलाफ
जांच के दौरान ऊंचे ओहदे पर बैठे बड़े लोगों पर दखलअंदाजी का आरोप लगाया। उनके
अनुसार, 16 अक्टूबर की सुबह दुबई से
लौटते ही मोइन कुरैशी मामले में मनोज प्रसाद को गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ के
दौरान उसने बड़े-बड़े लोगों से संबंध होने की बात कहते हुए अधिकारियों को डराने की
कोशिश की। मनोज का कहना था कि उसके पिता, जो कि रॉ के सेवानिवृत्त संयुक्त सचिव हैं, केएनएसए अजीत डोभाल से
अच्छे संबंध हैं। उसने रॉ के विशेष सचिव सामंत गोयल का भी नाम लिया। यह भी कहा कि
उसके भाई सोमेश और सामंत गोयल ने एक निजी मामले में डोभाल की मदद की थी। मनीष
कुमार सिन्हा के अनुसार 20 अक्टूबर की दोपहर को सीबीआइ निदेशक आलोक वर्मा ने डिप्टी
एसपी देवेंद्र कुमार के आफिस और घर की तलाशी बीच में रोक दी थी। बाद में आलोक
वर्मा ने बताया कि इसके लिए निर्देश अजीत डोभाल ने दिया था। मनीष कुमार सिन्हा के
अनुसार सतीश बाबू सना ने पूछताछ के दौरान कोयला एवं खनन राज्य मंत्री हरिभाई
पारथीभाई चौधरी को जून 2018 के पहले पखवाड़े में रिश्वत दिए जाने की बात कही थी।
सिन्हा ने सना के हवाले से विधि सचिव सुरेश चंद्रा का भी नाम लिया है। हालांकि,
सुरेश चंद्रा ने इन
आरोपों को खारिज किया है। सिन्हा ने सतीश बाबू सना के हवाले से विधि सचिव सुरेश
चंद्रा का भी नाम लिया है। हालांकि, चंद्रा ने इन आरोपों को खारिज किया है। चंद्रा ने कहा कि
पहली बात कि मुझे कैबिनेट सचिव से कोई निर्देश नहीं मिला था। दूसरी बात कि मैं
लंदन में नहीं था, जैसा कि सिन्हा ने आरोप लगाया है। और तीसरी बात कि मैं
इनमें किसी व्यक्ति को नहीं जानता हूं। कोयला एवं खनन राज्य मंत्री हरिभाई चौधरी
ने सिन्हा द्वारा लगाए गए रिश्वत के आरोपों को निराधार और दुर्भावना से प्रेरित
बताया है। उन्होंने कहा कि न तो मैं सतीश बाबू सना को जानता हूं और न ही उनसे कभी
मिला हूं, जिनके बारे में कहा जा
रहा है कि उन्होंने मुझे रिश्वत दिया है। मैं इस घटिया प्रयास की निंदा करता हूं।
मैं इस सिलसिले में किसी भी जांच का स्वागत करूंगा और दोषी पाया गया, तो राजनीति छोड़ दूंगा।मौजूदा
कोयला-खनन राज्यमंत्री हरिभाई पार्थीभाई चौधरी को भी कुछ करोड़ रिश्वत दी गई थी।
उनके दफ्तर ने ऐसे किसी केस में शामिल होने से इनकार किया है।CVC के. वी. चौधरी पर भी जांच में दखल का आरोप लगाया, लेकिन उन्होंने आरोप पर
अब तक कोई सफाई नहीं दी है। न्यूज़ ग्राउंडकी खबर के मुताबिक विधि सचिव और सीवीसी दोनों ने सिन्हा के आरोपों को
बेबुनियाद करार दिया है. केंद्रीय सतर्कता आयुक्त (सीवीसी) केवी चौधरी ने द
वायरसे बात करते हुए कहा कि मामला
सुप्रीम कोर्ट में है इसलिए इस बारे में मीडिया से कुछ बोलना उचित नहीं होगा. द
वायरद्वारा राज्यमंत्री हरिभाई पार्थीभाई
चौधरी को भी सवाल भेजे गए हैं, जिनका जवाब आने पर इस खबर को अपडेट किया जायेगा. मालूम हो
कि सीबीआई के निदेशक आलोक वर्मा और विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के बीच मचे घमासान
के बाद केंद्र की मोदी सरकार ने बीते 24 अक्टूबर को दोनों को छुट्टी पर भेज दिया था. दोनों
अधिकारियों ने एक-दूसरे के ख़िलाफ़ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं.
हवाला और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों में मीट कारोबारी मोईन
क़ुरैशी को क्लीनचिट देने में कथित तौर पर घूस लेने के आरोप में सीबीआई ने बीते
दिनों अपने ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कराई गई थी.
अस्थाना पर आरोप है कि उन्होंने मोईन क़ुरैशी मामले में हैदराबाद के एक व्यापारी
से दो बिचौलियों के ज़रिये पांच करोड़ रुपये की रिश्वत मांगी थी. जिसके बाद राकेश
अस्थाना ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा पर ही इस मामले में आरोपी को बचाने के लिए दो
करोड़ रुपये की घूस लेने का आरोप लगाया. दोनों अफसरों के बीच मची रार सार्वजनिक हो
गई तो केंद्र सरकार ने दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया. साथ ही अस्थाना के
ख़िलाफ़ जांच कर रहे 13 सीबीआई अफसरों का भी तबादला कर दिया गया था. सुप्रीम कोर्ट
ने बीते 26 अक्टूबर को केंद्रीय
सतर्कता आयोग (सीवीसी) से कहा था कि सुप्रीम कोर्ट जज की निगरानी में वह निदेशक
आलोक वर्मा के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोपों की जांच दो हफ्ते में पूरी करे.