सुप्रीम कोर्ट के डांट लगाने पर प्रशासन हरकत में दिल्ली पुलिस ने सिग्नेचर ब्रिज पर अश्लीलता फैलाने के आरोप में चार को पकड़ा,
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : दिल्ली का सिग्नेचर
ब्रिज आम लोगों के लिए खुला हुआ है. सफ़र को आसान बनाने के लिए बना ये ब्रिज अब
लोगों के लिए इंग्लिश का SUFFER यानी दिक़्क़त बना हुआ है. बीच ब्रिज में गाड़ियों को रोककर
ज़िंदगी को ख़तरे में डालते हुए सेल्फ़ी लेने की घटनाएं लगातार हो रही हैं. इसी
क्रम में ताज़ा घटना वो वीडियो हैं जिसमें कुछ लोग अपने कपड़े उतारकर सिग्नेचर
ब्रिज में मस्ती करते हुए दिख रहे हैं. सोशल मीडिया पर वायरल इन वीडियो के बारे
में दो तरह की बातें की जा रही हैं. पहली ये कि वीडियो में कपड़े उतारने वाली
लड़कियां हैं. दूसरी ये कि कपड़े उतारने वाले ट्रांसजेंडर्स हैं. दिल्ली के
सिग्नेचर ब्रिज पर नंग अवस्था में होकर फोटोग्राफी और सेल्फी लेने का एक विडियो
वायरल हो रहा है। दिल्ली पुलिस का मानना है कि सरेआम अश्लील हरकत करने वाले ये लोग
किन्नर हैं। पुलिस ने सार्वजनिक जगह पर अश्लीलता फैलाने समेत कई अन्य धाराओं में
मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। ऐसा ही एक मामला तीन महीने पहले दक्षिण
दिल्ली के हौज खास इलाके में भी सामने आया था, जब किन्नरों ने नग्न होकर
वहां काफी हंगामा काटा था। परेशान सिर्फ सीधे इंस पुलिस सूत्र बता रहे हैं कि
क्रेजी टाइप का यह ग्रुप सेल्फी का दीवाना है और ये एरिया में पहले भी ऐसी हरकतें
करते देखे जा चुके हैं। पुलिस को पता लगा है कि विडियो में दिख रहे किन्नरों ने
ब्रेस्ट इंप्लांट करवा रखे हैं, इसलिए जगह-जगह टॉप लैस होकर फोटो करवाते हैं। बताया जा रहा
है कि ये देर रात स्कूटी पर 'धूम' मचाते हुए निकलते हैं। तमाशा देखने वालों की इनको बिलकुल
परवाह नहीं होती। सूत्र तो इतना तक कह रहे हैं कि ये इतने बेशर्म और बेबाक हैं कि
पुलिस और मनचले भी 'उचित दूरी' रखने में भलाई समझते हैं। और तो और, ये घर-घर जाकर 'बधाई' या 'शगुन' नहीं मांगते, बल्कि बड़े शादी-समारोह
में इतने सज-धज कर जाते हैं, कि देखने वाले दांतों तले अंगुली दबा लें। फिर वहां से मोटा
नेग लेकर ही निकलते हैं। इतनी जानकारी जुटाने के बाद पुलिस अधिकारियों को उम्मीद
है कि जल्द पूरा ग्रुप पुलिस की गिरफ्त में होगा। पुलिस सूत्रों ने बताया कि यह
ग्रुप स्कूटियों से सिग्नेचर ब्रिज पर पहुंचा था, जिनके रजिस्ट्रेशन नंबर
भी मिले हैं। एक आशंका यह है कि यह वही ग्रुप है, जिसने तीन महीने पहले हौज
खास में नग्न होकर रोड पर हंगामा किया था। ये पहले भी भजनपुरा व वजीराबाद पुल के
आसपास देखे जा चुके हैं। चूंकि इस बार सिग्नेचर ब्रिज पर इन्होंने कपड़े उतार दिए,
इसलिए ये सुर्खियों में आ
गए। यह पुल पहले ही सेल्फी क्रेज के लिए जबरदस्त चर्चा में है। किन्नरों से बहुत
लोग अच्छी तरह 'वाकिफ' हैं। उन्होंने भी पुलिस को उनके बारे में जानकारी दी है।
सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में ये स्पष्ट नहीं है कि कपड़े उतारने वाले कौन हैं?
ये वीडियो कुछ दूरी से
बनाए गए हैं.पीटीआई को एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, ''सिग्नेचर ब्रिज पर
ट्रांसजेंडर्स के बने वीडियो वायरल होने के बाद दिल्ली पुलिस ने सार्वजनिक जगहों
पर अश्लीलता फ़ैलाने का केस दर्ज कर लिया है.'' डीसीपी नॉर्थ ईस्ट अतुल
ठाकुर ने न्यूज़ ग्राउंड से अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किए जाने की पुष्टि
की है अतुल ठाकुर ने कहा, ''धारा 294 और 34 के तहत केस दर्ज किया गया है. अभी तक किसी की गिरफ़्तारी
नहीं की गई है. जल्दी गिरफ़्तारी की जाएगी. ये दोनों धाराएं सार्वजनिक स्थलों पर
अश्लीलता फैलाने पर लगाई जाती हैं.''अतुल बताते हैं, ''अभी जांच की जा रही है. देखते हैं जांच में क्या आता है.
वैसे तीन महीने की सज़ा होती है. ये केस पुलिस की तरफ से खुद दर्ज किया गया है.
अभी हम इस बात की पुष्टि नहीं करते हैं कि वीडियो में दिख रहे लोग ट्रांसजेंडर्स
हैं या लड़कियां. जांच के आगे बढ़ने पर बेहतर पता चल पाएगा.'' दिल्ली पुलिस ने बताया,
''ये कोई तीन चार लोग थे,
जो सिग्नेचर ब्रिज पर
मौजूद थे. फिलहाल हमने अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ केस दर्ज किया है. घटना की सही
तारीख़ और वक़्त क्या है. इसकी जांच बाकी है.'' ये केस ऑबसिनिटी यानी
अश्लीलता के तहत दर्ज किया गया है.ऐसे केस आईपीसी की धारा 294 के तहत दर्ज किए जाते
हैं. ये धारा है क्या और इसके तहत कितनी सज़ा का प्रावधान है? इस बारे में सुप्रीम
कोर्ट के वरिष्ट वकील अरुण कुमार जी ने न्यूज़ ग्राउंड की टीम को बताया, ''कोई भी इंसान अगर
सार्वजनिक स्थल पर नग्नता करता या करती है. या फिर ऐसा कुछ करता है, जो अश्लील हो तो ये केस
दर्ज किया जाता है. अश्लीलता क्या है, इसको लेकर कई मत हैं. इसे समझने की ज़रूरत है. अश्लीलता की
परिभाषा वक़्त के साथ बदली भी है. किसी भी सार्वजनिक जगह पर कोई भी ऐसा काम करना
जो अश्लील है, वो दंडनीय है.अरुण कुमार जी के मुताबिक़, ''इस क़ानून के पीछे का मकसद ये है कि समाज के नैतिक मूल्यों
की रक्षा की जा सके. कोई कुछ भी अश्लील हरकत सार्वजनिक जगहों पर न करे. अगर कोई
सार्वजनिक जगहों पर कपड़े उतारकर नाचने लगता है तो ये किसी को भी अश्लीलता लग सकता
है. सिग्नेचर ब्रिज में ऐसा लोगों ने ऐसा क्यों किया, ये पता लगाने का विषय है.
हो सकता है कि किसी अभियान के तहत ऐसा किया गया हो.'' हालांकि अश्लीलता क्या है,
ये एक व्याख्या का विषय
है. लेकिन क्या अश्लीलता फैलाने वालों के बीच सज़ा दिए जाने को लेकर कोई फ़र्क़ है?
अरुण कुमार जी बताते हैं,
''इस क़ानून में सभी के लिए
एक सी सज़ा है. फिर चाहे अश्लीलता फ़ैलाने वाला लड़का हो या लड़की या ट्रांसजेंडर.
ऑबसिनिटी आईपीसी का ही हिस्सा है. ऑबसिनिटी एक ऐसा मुद्दा है जिसे उठाए जाने की
ज़रूरत है. आप किसे अश्लील मानते हैं? यह साल 1858 का क़ानून है, वो अभी तक क्यों मान्य है.''सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ट
वकील अरुण कुमार जीके मुताबिक़, कोई भी इंसान अगर
सार्वजिनक जगहों पर अश्लीलता करता है. फिर चाहे ये किसी कला के ज़रिए हो या किसी
काम की वजह से. जिसका मकसद किसी को परेशान करना हो या कोई इसकी वजह से परेशान हो
तो धारा 294 के तहत केस दर्ज होता
है. इस धारा के तहत तीन महीने की सज़ा होती है और ज़मानत मिल सकती है |