RSS की आर्थिक शाखा प्रमुख बोले - उर्जित पटेल मोदी सरकार के साथ मिल कर काम करें या फिर RBI गवर्नर पद से इस्तीफा दें !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : केन्द्र सरकार और रिज़र्व
बैंक ऑफ इंडिया के बीच सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है. पिछले कुछ दिनों से इस बात के
साफ संकेत मिल रहे हैं'आरबीआई (RBI) के गवर्नर उर्जित पटेल(Urjit
Patel) या तो सरकार के साथ मिलकर
आर्थिक विकास के लिए काम करें या फिर इस्तीफा दें.' यह कहना है आरएसएस के
आर्थिक मामलों के संगठन स्वदेशी जागरण मंच (Swadeshi Jagaran Manch)के अध्यक्ष अश्वनी
महाजनका. आरएसएस(RSS) ही केंद्र में मोदी सरकार
का वैचारिक सलाहकार है. स्वदेशी जागरण मंच के अध्यक्ष अश्वनी महाजन (Ashwani
Mahajan) ने बुधवार को कहा-आरबीआई
गवर्नर उर्जित पटेल अपने अफसरों को भी सार्वजनिक रूप से मतभेदों को उजागर करने से
रोकें. यदि वह अनुशासन में नहीं रह सकते तो उचित होगा कि वह पद छोड़ देंउन्होंने कहा कि भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर
को सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिये अन्यथा वह अपने पद से इस्तीफा दे सकते हैं.
मंच के सह-संयोजक अश्विनी महाजन के मुताबिक, "आरबीआई के गवर्नर को
सरकार के साथ मिलकर काम करना चाहिये वरना वह इस्तीफा दे सकते हैं." उन्होंने
कहा कि केंद्रीय बैंक के डिप्टी गवर्नर के साथ-साथ अन्य अधिकारियों को सरकार के
साथ किसी भी तरह की असहमति होने पर सार्वजनिक तौर पर बोलने से बचना चाहिए. महाजन
ने कहा यदि सरकार के साथ किसी मुद्दे पर असहमति है तो उसे सार्वजनिक तौर पर नहीं
बल्कि बैंक के निदेशक मंडल में उठाना चाहिए. गौरतलब है कि आरबीआई के डिप्टी गवर्नर
विरल आचार्य ने हाल में केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से संबंधित मुद्दा उठाया था.
उन्होंने चेताया कि केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता से छेड़छाड़ ‘विनाशकारी’ साबित हो सकती है. दरअसल,
बुधवार(31 अक्टूबर) को मीडिया में
कुछ खबरें आईं, जिसमं उर्जित पटेल के आरबीआई गवर्नर पद से इस्तीफा देने की
संभावना जताई गई. खबरों में कहा गया कि सरकार से इधर बीच खराब हुए रिश्तों के चलते
उर्जित पटेल इस्तीफे का कदम उठा सकते हैं. सरकार और आरबीआई के बीच मतभेद तब उजागर
हुए, जब बीते शुक्रवार को
मुंबई के एक इवेंट में आरबीआई के डिप्टी गवर्नर डॉ. विरल आचार्य ने कहा था कि
केंद्रीय बैंक की स्वायत्तता को कमजोर करना 'विनाशकारी' हो सकता है. जिस पर बाद
में वित्तमंत्री अरुण जेटली ने आरबीआई पर भड़ास निकालते हुए कहा था कि जब एनपीए
बंट रहा था, तब आरबीआई भी चुप रहा. हालांकि बाद में वित्तमंत्रालय ने
अपने बयान में कहा कि आरबीआई की स्वायतत्ता जरूरी है और इसका सरकार सम्मान करती
है. सरकार और आरबीआई को मिलकर जनहित में काम करना चाहिए.स्वदेशी जागरण मंच के प्रमुख अश्विनी महाजन ने
कहा कि सरकार को आरबीआई एक्ट के इस्तेमाल का अधिकार है वित्त मंत्रालय द्वारा जारी
बयान में कहा गया है कि केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक दोनों के लिए जरूरी है कि वह
जनहित और देश की अर्थव्यवस्था की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए काम करें. सरकार
ने कहा है कि आरबीआई एक्ट के इस पक्ष के चलते केन्द्र सरकार और रिजर्व बैंक के बीच
कई मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाती है. ऐसी व्यवस्था सभी नियामकों के लिए
बनाई गई है.