ऑनलाइन फ्रॉड से ऐसे रहें सावधान, एटीएम से लेकर डिजिटल वॉलेट तक, अपराधी ऐसे बनाते हैं लोगों को अपना शिकार, नेट बैंकिग फ्रॉड से बचने के लिए जरूर अपनाएं ये टिप्स !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा :बदलते जमाने के साथ लोगों में ऑनलाइन शापिंग का
रुझान बढ़ा है, लेकिन ऑनलाइन खरीदारी करने वाले ग्राहकों को बेहद सावधानी
बरतने की आवश्यकता है।इंटरनेट के जरिए खरीदारी में जरा सी चूक ग्राहकों को चूना
लगा रही है। इंटनेट पर सस्ते दामों में सामान बेचने वाली वेबसाइट के जाल में फंस
कर उपभोक्ता ठगी का शिकार हो रहे हैं। किसी पार्सल में फटी साड़ियां तो किसी में
मोबाइल की डमी निकल रही है। पुलिस के पास इस तरह की शिकायतें आ रही हैं। फेस्टिव
सीजन शुरू हो चुका है। इस दौरान ई-कॉमर्स कंपनियों के लुभावने ऑफर्स के कारण लोग
ऑनलाइन शॉपिंग करना ज्यादा पसंद करते हैं। घर बैठे हो जाने के कारण ऑनलाइन शॉपिंग
सुविधाजनक तो होता है, लेकिन इसके साथ ऑनलाइन ठगी के मामले भी बढ़ जाते हैं। टेक
कंपनी माइक्रोसॉफ्ट के एक ताजा सर्वे में यह बात सामने आई है कि ऑनलाइन फ्रॉड के
कारण भारत के 68 फीसदी लोगों ने किसी न किसी तरीके से अपनी मेहनत की कमाई
ठगों के हाथों गंवा दी है। माइक्रोसॉफ्ट के टेक सपोर्ट स्कैम सर्वे 2018 के मुताबिक, हैकर या ठग गैंग फोन कॉल
के जरिए लोगों से जुड़ते हैं और टेक्निकल सपोर्ट सर्विस का हवाला देकर उनसे
बैंकिंग से जुड़ी तमाम जरूरी जानकारियां हासिल कर बैंक खातों से पैसा उड़ा लेते
हैं। ऑनलाइन फ्रॉड करने वालों का शिकार सिर्फ वही लोग नहीं बनते हैं, जिन्हें ऑनलाइन बैंकिंग
और मोबाइल एप्स की कम जानकारी है, बल्कि इंटरनेट सेवी और टेक फ्रेंडली लोग भी अनजाने में इन
फ्रॉड के शिकार हो जाते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत के करीब 40 फीसदी लोग इस ऑनलाइन
स्कैम का शिकार लगभग बन ही गए थे, लेकिन उन्होंने कोई महत्वपूर्ण जानकारी ठगों को नहीं दी,
जबकि 28 फीसदी लोगों ने अलर्ट
होकर उस ऑनलाइन फ्रॉड से किनारा कर लिया। ऑनलाइन गतिविधियां बढ़ने से ठगी की
घटनाएं भी तेजी से बढ़ रही हैं। अगर ऑनलाइन पेमेंट के दौरान सेफ वेबसाइट या पेमेंट
चैनल नहीं चुनते हैं तो कार्ड से संबंधित जानकारी चुरा कर ठग आपको बड़ी चपत लगा
सकते हैं। कई बार ठग लोकप्रिय वेबसाइट के नाम से मिलती-जुलती एक दूसरी साइट बना
देते हैं। आप जब उसे ओपन करेंगे, तो शुरुआत में ओरिजनल साइट से अंतर करना मुश्किल हो जाता
है। यहां प्रोडक्ट पर दिए गए आकर्षक ऑफर्स में फंसकर ग्राहक ऑनलाइन पेमेंट कर देते
हैं या फिर ऑनलाइन शॉपिंग के लिए यूज किए गए आपके बैंक एकाउंट, क्रेडिट कार्ड नंबर,
सीवीवी नंबर आदि को ठग
धोखे से हासिल कर लेते हैं। इस तरह की ठगी से बचने के लिए यूआरएल ब्राउजर के
एड्रेस बार में टाइप करके ही साइट पर जाएं और खरीदारी करें। सिर्फ सुरक्षित
वेबसाइट्स पर ही अपने क्रेडिट या डेबिट कार्ड का ब्यौरा दें। सुरक्षित वेबसाइट्स
के यूआरएल की शुरुआत https://से होती है, न कि http:// से। कई बार आपने भी गौर किया होगा कि प्ले स्टोर पर
लोकप्रिय एप्स से मिलते-जुलते कई सारे दूसरे एप्स भी होते हैं। कई बार लोग क्लोन
एप को ही असली एप समझ कर डाउनलोड कर लेते हैं और उन्हीं पर शॉपिंग करने लगते हैं।
ठग इसी के जरिए लोगों का पैसा गायब कर देते हैं। अगर बहुत ज्यादा टेक फ्रेंडली
नहीं हैं, तो फिर जिस ई-कॉमर्स साइट
का एप डाउनलोड करना चाहते हैं, उसकी साइट पर जाकर वहां से डाउनलोड करें। यह ऑनलाइन ठगी का
नया ट्रेंड है। इसमें ठग आपका एक नकली आइडी प्रूफ लेकर मोबाइल ऑपरेटर के पास जाता
है और आपके नाम का डुप्लिकेट सिम कार्ड हासिल कर लेता है। ऑपरेटर आपका ओरिजनल सिम
डी-एक्टिवेट कर देता है। इसके बाद ठग आपके फोन के जरिए वन टाइम पासवर्ड बनाता है
और ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर लेता है। इतना ही नहीं, आजकल ठग बैंक जाकर भी
किसी और के खाते को अपना बताकर फोन नंबर चेंज करा लेता है, फिर ओटीपी हासिल पर
एकाउंट खाली कर देता है। इस तरह की ठगी से बचने के लिए जरूरी है कि किसी भी अनजान
व्यक्ति के कहने पर किसी भी नंबर पर मैसेज न करें। किसी के साथ अपने क्रेडिट कार्ड,
डेबिट कार्ड की डिटेल्स
शेयर न करें और न ही किसी को ओटीपी बताएं। बिना वजह लंबे समय तक मोबाइल की घंटी न
बजे तो सतर्क हो जाएं। इसके अलावा, आजकल फोन कॉल करके कस्टमर का सीवीवी नंबर या ओटीपी जुटाना
और फिर पैसे निकाल लेना, इस तरह की घटनाएं पिछले कुछ वक्त में काफी बढ़ गई हैं।
ऑनलाइन ट्रांजैक्शन करने से पहले यह ध्यान रखें कि आपका इंटरनेट कनेक्शन पासवर्ड
से सुरक्षित हो। साइबर कैफे या फ्री वाई-फाई से इंटरनेट बैंकिंग या ऑनलाइन
ट्रांजैक्शन कतई नहीं करना चाहिए। अधिकांश ऑनलाइन बैंकिंग वेबसाइट्स घर से या ऑफिस
से एक्सेस की जाती हैं। इसे सुरक्षित बनाने के लिए कंप्यूटर से लॉग-ऑफ करना और
कैशे मेमोरी को समय-समय पर क्लियर करना जरूरी होता है। कई बार ठग खुद को बैंक का
अधिकारी बताकर कार्ड से जुड़ी सूचनाएं मांगते हैं। जब भी इस तरह की फोन कॉल आएं तो
सावधान रहें। ऐसी हर कॉल को संदेह की नजर से देखें और संबंधित व्यक्ति का ब्यौरा
दर्ज करके रखें। कार्ड से जुड़ी जानकारी बिल्कुल भी शेयर न करें। शक होने पर
टेलीफोन काट कर बैंक से बात करें। इसके साथ जब आप पेट्रोल पंप, रेस्टोरेंट वगैरह में
क्रेडिट/डेबिट कार्ड के जरिए भुगतान करते हैं, तो उस समय खुद वहां मौजूद
रहें। कई बार लोग कार्ड को भीतर ले जाते हैं। ऐसी स्थिति में कार्ड को क्लोन कर
लिए जाने की आशंका रहती है। अगर आप मोबाइल से बैंकिंग करते हैं तो पासवर्ड मैनेजर
एप्स का इस्तेमाल कर सकते हैं, जो अलग-अलग पासवर्ड जेनरेट करते हैं। डिजिटल वॉलेट और
नेटबैंकिंग के लिए एक ही तरह के पासवर्ड का इस्तेमाल न करें। ट्रांजैक्शन पूरा
होने के बाद डिजिटल वॉलेट से लॉगआउट करें। विज्ञापनों के दौरान पॉप-अप होने वाले
थर्ड पार्टी एप्स को फोन पर इंस्टॉल न करें। डिवाइस चोरी होने की स्थिति में दूर
बैठे डाटा डिलीट करने के लिए मोबाइल ट्रैकिंग एक्टिवेट करें। छोटी बातें, बड़े फायदे एटीएम का पिन
नियमित रूप से बदलते रहें। साथ ही, अपना पिन किसी से भी साझा न करें। यदि कोई व्यक्ति बैंक
कर्मचारी बनकर आपके कार्ड का नंबर, सीवीवी, पिन, ओटीपी या अंतिम तिथि आदि के बारे में जानकारी मांगे,
तो उससे ऐसी कोई जानकारी
हरगिज शेयर न करें। कभी भी अपना कार्ड और पिन नंबर साथ में न रखें और न ही कार्ड
पर अपना पिन लिखें। कार्ड पर मोबाइलअलर्ट एक्टिव करके रखें। अगर कार्ड खो जाए, तो तुरंत बैंक को सूचित
करें। मशीन में स्वाइप करने के लिए कार्ड कभी भी किसी और के हाथों में न दें। खुद
ही स्वाइप करें। मोबाइल में कार्ड की फोटो खींचकर न रखें। यदि बैंकिंग के लिए अपने
फोन में कोई मोबाइल एप इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे अच्छे एंटीवायरस
से सुरक्षित कर लें। कभी भी स्पैम सॉफ्टवेयर एप इंस्टॉल न करें। कार्य पूरा हो
जाने के बाद लॉगआउट कर दें। इसके साथ ही आज कल जितनी तेजी से हमारे जीवन में
टेक्नोलॉजी का विकास हो रहा है, वही अपनी थोड़ी सी लापरवाही की वजह से आप बड़ी ठगी का शिकार
हो सकते हैं। लेकिन अगर आप सावधानी बरतें तो बड़े नुकसान से सकते हैं। आज हम आपको
बताने जा रहे हैं कि अपराधी किन तरीकों का इस्तेमाल कर लोगों को अपना शिकार बनाते
हैं। एटीएम से पैसा निकालना कई बार ठग एटीएम में छिपे हुए कैमरे लगा देते हैं,
जिसके जरिए पिन नंबर आदि
चुरा लेते हैं। इसके अलावा, कई बार वे एटीएम को जाम भी कर देते हैं। इससे कस्टमर पिन और
दूसरी डिटेल्स तो डाल देता है, लेकिन पैसे नहीं निकल पाते। इसके बाद जब कस्टमर चले जाते
हैं, तो धोखेबाज बाद में पैसे
निकालकर ले जाते हैं। जाली माइक्रो एटीएम इंस्टॉल करके भी कार्ड डिटेल हासिल की जा
सकती है और बाद में उसका इस्तेमाल करके फ्रॉड किया जा सकता है। पीओएस मशीनें
अनअथॉराइज्ड पीओएस डिवाइसेज क्रेडिट और डेबिट कार्ड को स्वाइप करते समय उनकी
डिटेल्स की कॉपी कर सकते हैं। इन डिवाइसेज पर आपके कार्ड के समान जाली कार्ड बनाया
जा सकता है। डिजिटल वॉलेट ऑनलाइन वॉलेट्स साइबर अपराधियों के लिए आसान टारगेट होते
हैं। वॉलेट ट्रांजैक्शन अक्सर कम अमाउंट की होती है और इस वजह से बहुत से वॉलेट्स
एडवांस्ड सिक्योरिटी सिस्टम का इस्तेमाल नहीं करते और ऐसे में साइबर अटैक का खतरा
बढ़ जाता है। कई वॉलेट वाले एप्स अपने यूजर्स को उनके वॉलेट एकाउंट्स में साइन-इन
रखते हैं और इससे हैकर्स के लिए धोखाधड़ी करने में आसानी होती है। फिशिंग से रहें
एलर्ट: फिशिंग ऐसी ईमेल है जो आपको फंसाने के लिए भेजी जाती है। यह बैंक या किसी
शॉपिंग वेबसाइट या बड़े कारोबारी संस्थान से भेजी हुई प्रतीत होती है। इनके माध्यम
से आपकी व्यक्तिगत जानकारी मांगने की कोशिश की जाती है। इस लिंक पर क्लिक करते ही
नकली वेबसाइट खुल जाती है। जैसे ही आप अपना यूजर आइडी और पासवर्ड दर्ज करते हैं,
आपका मोबाइल नंबर,
लॉग-इन आइडी, पासवर्ड, डेबिट/क्रेडि़ट कार्ड
संबंधी जानकारी, सीवीवी, जन्म दिन आदि की चोरी की जा सकती है। आइये जानते है इन सब
फ्रौड से बचने के तरीके नेट बैंकिंग के साथ साइबर फ्रॉड का खतरा बढ़ गया है है।
नैट बैंकिंग के दौरान साइबर अपराधियों की नजर अपने शिकार पर होती है। अगर आप नेट
बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो जरूरी है कि सावधानी बरतें। आइए हम आपको बताते हैं
सुरक्षित नेट बैंकिंग के टिप्स। नेट बैंकिंग का इस्तेमाल करते हैं, तो अपने पासवर्ड को
नियमित रूप से बदलते रहें। पासवर्ड किसी के साथ भी साझा न करें और पासवर्ड को
ऑनलाइन की बजाय ऑफलाइन सहेज कर रखें। नेट बैंकिंग का उपयोग सार्वजनिक कंप्यूटर पर
न करें। अगर करते हैं, तो कंप्यूटर से कैशे और ब्राउजिंग हिस्ट्री व टेंपरेरी फाइल
डिलीट करना न भूलें। इसके अलावा, लॉगइन के दौरान किसी भी ब्राउजर में रिमेंबर आइडी ऐंड
पासवर्ड पर क्लिक न करें। बैंक कभी भी आपके एटीएम पिन, जन्मतिथि जैसी गोपनीय और
निजी जानकारी के बारे में फोन या ईमेल के जरिए नहीं पूछता है। इस संबंध में लगातार
बैंक एसएमएस अलर्ट भी भेजता है। इसलिए अगर आपको बैंक से ऐसा कोई फोन या ईमेल मिले,
तो कभी भी लॉगइन जानकारी
के बारे में न बताएं। अपनी लॉगइन आइडी और पासवर्ड का इस्तेमाल बैंक के आधिकारिक
लॉगइन पेज पर ही करें। यह एक सुरक्षित वेबसाइट होनी चाहिए। जिस कंप्यूटर से
इंटरनेट बैंकिंग करते हैं, उसमें हमेशा लाइसेंस वाले एंटी वायरस सॉफ्टवेयर का इस्तेमाल
करें। इंटरनेट बैंकिंग के सुरक्षित इस्तेमाल के लिए जरूरी है कि ब्राउजर के एड्रेस
बार में जाकर अपने बैंक का यूआरएल टाइप करें। कभी भी ईमेल में भेजे गए लिंक पर
क्लिक न करें। अगर आप ऐसी किसी फर्जी वेबसाइट पर एक बार लॉगइन जानकारी डाल देते
हैं, तो आपका एकाउंट एक्सेस कर
पैसे चुराए जा सकते हैं। बहुत से लोग शॉपिंग करते वक्त बार-बार कार्ड नंबर एंटर
करने की परेशानी से बचने के लिए अपना कार्ड नंबर और एक्सपायरी वगैरह उस साइट पर
सेव कर लेते हैं। ऐसा कभी भी न करें। अगर आप थोड़ी-सी परेशानी से बचने के लिए ऐसा
करते हैं, तो इससे आपको बड़ी चपत लग
सकती है।