विजयादशमी के अवसर पर आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने अपने भाषण में क्या कहा, क्यों गरमाई बिहार की राजनीति , जानिए बड़ी बातें !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के विजयादशमी कार्यक्रम
के मौके पर प्रमुख मोहन भागवत ने गुरूवार को सबरीमाला, एससी-एसटी समुदाय, शहरी माओवाद, पाकिस्तान और रक्षा मुद्दे से लेकर राम मंदिर पर अपनी बेबाक
राय रखी. संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि देश के रक्षा बलों को सशक्त बनाने और
पड़ोसियों के साथ शांति स्थापित करने के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता है.
उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बगैर यह भी कहा कि वहां नई सरकार आ जाने के बावजूद
सीमा पर हमले बंद नहीं हुए हैं. वहीं संघ प्रमुख मोहन भागवत ने राम मंदिर को लेकर
कहा कि राम मंदिर का बनना गौरव की दृष्टि से आवश्यक है, मंदिर बनने से देश में सद्भावना व एकात्मता का वातावरण
बनेगा. गौरतलब है कि आज आरएसएस का स्थापना दिवस कार्यक्रम है, जिसमें नोबेल पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी भी शामिल
हुए. तो चलिए पढ़ते हैं कि किन-किन बड़े मुद्दों पर संघ प्रमुख मोहन भागवत ने अपनी
बेबाक राय रखी है. मोहन भागवत ने यह बयान तो नागपुर में दिया, लेकिन इससे बिहार की राजनीति गरमा गई है। राष्ट्री य
जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ राज्य सरकार में
शामिल जनता दल यूनाइटेड (जदयू) ने इससे किनारा कर लिया है। जदयू के राष्ट्री य
महासचिव केसी त्यातगी ने कहा कि राम मंदिर निर्माण पर उनकी पार्टी का स्टैंरड
बिलकुल साफ है। उन्होंमने कहा कि इस मसले का हल या तो दोनों समुदायों के धार्मिक
प्रतिनिधि मिल-बैठकर हल निकालें, या फिर सुप्रीम कोर्ट का फैसला मान्यस हो। जदयू को इसके
अलावा कुछ भी स्वींकार्य नहीं। केसी त्याागी ने मोहन भागवत के बयान पर प्रतिक्रिया
देने से इनकार करते हुए कहा कि सभी को अपनी राय रखने का अघिकार है। वे तो केवल
अपनी पार्टी का स्टैं ड स्पिष्टी कर सकते हैं। त्या गी ने भले ही भागवत के बयान पर
सीधी प्रतिक्रिया नहीं दी,
लेकिन जदयू का स्टैंैड उनके बयान से इत्तकफाक रखता नहीं
दिखता। मोहन भागवत ने राम मंदिर बनाने की मांग उठाते हुए परोक्ष रूप से मोदी सरकार
को भी नसीहत दी। मोहन भागवत ने कहा, 'भगवान राम किसी एक
संप्रदाय के नहीं है। वह भारत के प्रतीक नहीं हैं। सरकार को किसी भी तरह करे, कानून लाए। लोग यह पूछ रहे हैं कि उनके द्वारा चुनी गई
सरकार है फिर भी राम मंदिर क्यों नहीं बन रहा।' मोहन भागवत ने कहा कि
भगवान राम भारत के गौरवपुरुष हैं और बाबर ने हमारे आत्म सम्मान को खत्म करने के
लिए राम मंदिर गिराया। राम मंदिर पर मोहन भागवत के इस बयान के राजनीतिक मतलब
निकाले जा रहे हैं। एक तरह से भागवत ने 2019 के आम चुनावों से पहले मोदी सरकार को
संदेश देने की कोशिश की है कि राम मंदिर को किसी भी तरह बनाया जाना चाहिए। आपको
बता दें कि राम मंदिर का निर्माण बीजेपी के लिए हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है।
बीजेपी के घोषणा पत्र में भी अयोध्या में राम मंदिर बनवाने की बात है। फिलहाल
अयोध्या विवाद सुप्रीम कोर्ट की दर पर है। सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि
मामला जमीन विवाद के तौर पर ही निपटाया जाएगा। अयोध्या जमीन विवाद मामले की सुनवाई
अब 29 अक्टूबर से शुरू होगी। मुख्य पक्षकार राम लला विराजमान, निर्मोही अखाड़ा, सुन्नी सेंट्रल वक्फ
बोर्ड और हिंदू महासभा हैं। इसके अलावा अन्य कई याची जैसे सुब्रमण्यन स्वामी आदि
की अर्जी है जिन्होंने पूजा के अधिकार की मांग की हुई है लेकिन सबसे पहले चार
मुख्य पक्षकारों की ओर से दलीलें पेश की जाएंगी। 6 दिसंबर 1992 को अयोध्या में
बाबरी मस्जिद को गिरा दिया गया था। इस मामले में आपराधिक केस के साथ-साथ दिवानी
मुकदमा भी चला। टाइटल विवाद से संबंधित मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। 30
सितंबर 2010 को इलाहाबाद हाई हाई कोर्ट ने दिए फैसले में कहा था कि तीन गुंबदों
में बीच का हिस्सा हिंदुओं का होगा जहां फिलहाल रामलला की मूर्ति है। निर्मोही
अखाड़ा को दूसरा हिस्सा दिया गया इसी में सीता रसोई और राम चबूतरा शामिल है। बाकी
एक तिहाई हिस्सा सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड को दिया गया। इस फैसले को तमाम
पक्षकारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी। 9 मई 2011 को सुप्रीम कोर्ट ने
इलाहाबाद हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगा यथास्थिति बहाल कर दी थी। भागवत ने साफ
किया कि हम किसी एक पार्टी के पीछे नहीं खड़े हैं, हमारा मकसद देश को सही
तरीके से चलाना है. भागवत ने कहा, 'रामजन्मभूमि पर जल्द से जल्द राम मंदिर बने इसलिए सरकार को
कानून बनाकर मंदिर निर्माण करना चाहिए.' उन्होंने कहा, 'यह हिंदू-मुसलमान का मसला नहीं है. यह भारत का प्रतीक है और
जिस रास्ते से मंदिर निर्माण संभव है, मंदिर का निर्माण होना
चाहिए. सबरीमाला मुद्दे पर भागवत ने कहा, स्त्री पुरुष समानता
अच्छी बात है, लेकिन सालों से चली आ रही परंपरा का सम्मान नहीं किया गया.
उन्होंने कहा, बोस ने आजाद हिंद फौज की स्थापना की और स्वतंत्र भारत की पहली
सरकार विदेश में बनाई. उसे भी 150 साल हुए हैं. उन्होंने कहा, भारत के अंदर होने वाली हिंसा हमारे देश के लिए ठीक नहीं है, इस पर काम करना होगा. मोहन भागवत ने कहा, 'हमारे देश को तोड़ने वाली शक्तियों को पाकिस्तान और इटली से
समर्थन मिलता है.'उन्होंने कहा, 'सुप्रीम कोर्ट ने कुछ कहा
लेकिन सरकार ने वह नहीं किया इससे विभेद होता है इसे समाज ही ठीक कर सकता है.'उन्होंने कहा, 'माओवाद हमेशा अर्बन ही
रहा है, ये समाज के उपेक्षित तबके का फायदा उठाता है, जिन छात्रों के पास सुविधाएं नहीं हैं, उन्हें भड़काता है.भागवत ने कहा कि अगर मदद
समय पर न मिले तो वह मदद नहीं रह जाती. अनुसूचित जातियों के लिए योजनाएं बनती हैं
लेकिन हर जगह समय पर लागू नहीं हो पाती. भागवत ने कहा, 'कुछ शक्तियां देश को अंदर से खोखला करना चाहती हैं. अपने ही
देश के लोग इन शक्तियों के साथ खड़े हो जाते हैं, इन वजहों को दूर करने की
जरूरत है. देश में पुलिस की हालत में सुधार की जरूरत है. भागवत नेकहा, 'दूसरे देशों से लेन-देन
के तरीके को बंद ना करें. बल्कि उसे इस तरह चलाएं कि अपनी सुरक्षा के लिए किसी पर
निर्भर ना रहना पड़े. हमें देश में ही अपनी सुरक्षा से जुड़ी चीजों को बनाना
चाहिए.'RSS
प्रमुख ने कहा, 'पश्चिम बंगाल से लेकर
हिंद महासागर तक कई द्वीप ऐसे हैं, जो सामरिक दृष्टि से काफी
अहम हैं. ऐसे सभी द्वीपों की नाकाबंदी होनी चाहिए.' उन्होंने बिना नाम लेते
हुए चीन पर निशाना साधते हुए कहा, 'कुछ शक्तियां मालदीव, श्रीलंका को अपनी तरफ
करने की कोशिश कर रही हैं.' मोहन भागवत ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा, 'वहां सत्ता परिवर्तन हुआ लेकिन उनकी हरकतों में कोई अंतर
नहीं आया. इसलिए हमें इतना शक्तिशाली होना होगा जिससे कोई हम पर हमला करने की
हिम्मत ना कर पाए. बीते सालों में पूरी दुनिया में भारत की प्रतिष्ठा बढ़ी है.' भागवत ने कहा, 'महात्मा गांधी ने सत्य और
अहिंसा के आधार पर राजनीति की कल्पना की थी. इसी वजह से पूरा देश अंग्रेजों के
खिलाफ एकजुट हुआ. हम किसी की दुश्मनी नहीं करते लेकिन जो हमसेदुश्मनी करते हैं, उनके लिए कुछ तो करना होगा.'संघ प्रमुख मोहन भागवत ने
कहा कि भारत एक बार फिर विश्वगुरू बन सकता है लेकिन ऐसा तब होगा जब वह पंचामृत के
मंत्र पर आगे बढ़ेगा. उन्होंने कहा, 'बाबर के रूप में एक भयानक
आंधी आई थी और उसने हमारे देश के हिंदू-मुसलमानों को नहीं बख्शा. उसके जरिए समाज
को रौंदा जाने लगा. उत्सव में मौजूद कैलाश सत्यार्थी ने कहा कि गरीब बच्चों के लिए
शिक्षा बहुत जरूरी है. यह समृद्धि लाती है. सत्यार्थी ने कहा, 'इस कार्यक्रम में बुलाकर आरएसएस ने हमारे सभी बच्चों के
प्रति प्रेम और समर्थन प्रदर्शित किया है.' सत्यार्थी ने चाइल्ड
पोर्नोग्राफी पर चिंता जताते हुए कहा, 'जो लोग शेल्टर होम चलाते
हैं वह बच्चों का शोषण करते हैं लेकिन यह कहते हुए डर लगता है कि जो लोग बच्चों के
लिए वेलफेयर इंस्टीट्यूट चला रहे हैं, वह भी उनका शोषण करते
हैं.'