दिल्ली : वजीराबाद के प्राइमरी स्कूल में धर्म के आधार पर बाटे गये छात्र , स्कूल के वरीष्ठ अधिकारी को किया निलंबित , क्या है इसके पीछे की पूरी सचाई !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा : स्कूलों में जहां बच्चों
को नैतिकता और भाइचारा का पाठ पढ़ाया जाता, वहीं उत्तरी दिल्ली के एक
सरकारी स्कूल में स्टूडेंट्स के बीच धर्म की लकीर खींच दी गई। मामला वजीराबाद के
एमसीडी स्कूल का है। उधर, शुरुआती जांच के बाद स्कूल के इंचार्ज को निलंबित कर दिया
गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस स्कूल में हिंदू और मुस्लिम स्टूडेंट्स को अलग-अलग सेक्शन
में विभाजित कर बिठाया जा रहा है। खबर बाहर आने के बाद उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने
मामले में जांच के आदेश दिए हैं। इस घटना पर दिल्ली सरकार ने भी कड़ा रुख अख्तियार
किया है। सरकार ने मामले की जांच के आदेश देते हुए 12 अक्टूबर तक रिपोर्ट मांगी
है। उत्तरी दिल्ली नगर निगम के मेयर आदेश गुप्ता ने इस पूरे मामले पर कहा,
'हमने इस संबंध में
रिपोर्ट मांगी है, जो भी दोषी पाया जाएगा दंडित किया जाएगा। यह दुर्भाग्यपूर्ण
घटना है, एमसीडी धर्म के आधार पर
भेदभाव नहीं करती, सभी समान हैं।'पांचवी कक्षा में पढ़ने
वाला दस साल का अमन वजीराबाद में अपने म्युनिसिपल स्कूल के दरवाजे पर खड़ा था. वह
45 मिनट पहले स्कूल पहुंच गया था. दोपहर एक बजे तक उनका स्कूल शुरू नहीं हुआ था.
समय के साथ मेन गेट के पास बातूनी बच्चों का एक समूह इकट्ठा हो गया और प्रिंसिपल
के बारे में बात करनी शुरू कर दी. अमन ने कहा, "एक दिन उन्होंने हम सभी
को खड़ा किया और कहा 'मुस्लिम बच्चे अपना हाथ ऊपर उठाओ." फिर उन्होंने हम
सभी को अलग कर दिया. वजीराबाद के गली नंबर 9 स्थित अमन का नॉर्थ दिल्ली म्यूनिसिपल
कॉर्पोरेशन स्कूल बुधवार को राष्ट्रीय समाचार पत्रों की सुर्खियां बन गया. स्कूल
के इंचार्ज सीबी सिंह शेहरावत ने छात्रों को उनके धर्म के आधार पर बांट दिया था.
हिन्दुओं को अलग एवं मुस्लिमों को अलग समूहों में विभाजित किया गया था. जब दिल्ली
सरकार और म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन को इसके बारे में पता चला तो शेहरावत को सस्पेंड
कर दिया गया. गुरुवार को अधिकारियों ने अलग-अलग सेक्शन को भंग कर दिया और इस मामले
की जांच शुरू कर दी.निशान्त की उम्र भी
10 साल है, उसने बताया कि धर्म के
आधार पर बांटने की शुरुआत कुछ महीने पहले उस वक्त शुरू हुई जब जुलाई में शेहरावत
ने चार्ज लिया. निशान्त ने कहा, "उन्होंने कहा कि वह ऐसा इसलिए कर रहे हैं क्योंकि हिन्दू और
मुस्लिम लड़ते हैं." उसके दोस्त दानिश को दूसरे सेक्शन में भेज दिया गया.
म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन स्कूल में सुबह 07:30 से दोपहर 12:30 तक लड़कियों का
कक्षाएं चलती हैं. शाम की शिफ्ट में लड़कों को पढ़ाया जाता है, जो दोपहर 1:00 से शाम
6:00 बजे तक चलती है. दोनों शिफ्टों के लिए अलग-अलग अध्यापक हैं. लड़कियों के
सेक्शन में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया था. केवल लड़कों की शिफ्ट को धर्म
के आधार पर बांटा गया था. सुबह की शिफ्ट में काम करने वाले टीचर्स ने कहा कि उन्हें
इस बारे में कोई जानकारी नहीं है कि शाम की शिफ्ट में स्कूल में क्या हो रहा था.
यहां तक कि स्कूल में पढ़ने वाली लड़कियों के माता-पिता ने भी कहा कि उन्हें इस
बारे में तभी पता चला जब यह मामला समाचारों में आया. इरशाद हुसैने की बेटी स्कूल
में दूसरी कक्षा में पढ़ती है. वह नहीं जानते थे कि हर दिन 12:30 बजे जब वह अपनी
बेटी को लेने स्कूल जाते हैं तो उसके बाद स्कूल बदल जाता है. उन्होंने कहा,
"मुझे बिल्कुल भी अंदाजा
नहीं था. दो दिन पहले सबकुछ जानने के बाद मैंने अपनी बेटी से पूछा जो स्कूल में
आठवीं कक्षा में पढ़ती है. उसने कहा कि यह सच है. उसकी दोस्त ने उसे बताया था.
यहां तक कि कुछ लड़कों के पेरेंट्स को भी इस बात की जानकारी नहीं थी. अजीत थापा के
बेटे ने कभी उन्हें इस तरह की कोई जानकारी नहीं दी. थापा कहते हैं, "अगर कुछ ऐसा किया गया तो
यह गलत है. बच्चे साथ और समान होने चाहिए. स्कूल को शिक्षा की गुणवत्ता को सुधारने
पर ध्यान देना चाहिए." अमन ने बताया कि कुछ बच्चे घर वापस गए और अपने
माता-पिता को बताया. अमन ने कहा, "कुछ माता-पिता आए और उन्होंने पूछा कि ऐसा क्यों किया?
उन्होंने (शेहरावत) कहा
कि वह हेड टीचर हैं वह जैसे चाहें वैसे पढ़ा सकते हैं." जिन लोगों ने न्यूज18
से बात की उन्होंने कहा कि शेहरावत का व्यवहार स्कूल के शिक्षक होने के नाते काफी
खराब था. छात्रों ने कहा कि शेहरावत ने उनपर हाथ उठाया और अपमानजनक भाषा का प्रयोग
किया. एक छात्र ने आरोप लगाते हुए कहा, "सर अक्सर छात्रों को
मारते और आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करते थे. वह स्कूल परिसर में बीड़ी पीते
थे." नाम न छापने की शर्त पर स्कूल के एक टीचर ने कहा कि बाकी टीचर शेहरावत
से डरते थे कि कहीं वह उनकी रैंक कम न कर दे.टीचर ने कहा, "वे चिल्लाते थे और आक्रमक हो जाते थे. इसलिए हम उनसे इस
बारे में बात करने से डर रहे थे. उन्हें लग रहा था कि जो उन्होंने किया वह सही
था." जब दूसरे टीचरों ने छात्रों को धर्म के आधार पर अलग करने के बारे में
चिंता प्रकट की तो शेहरवात ने कहा कि यह उनका निर्णय है और उन्हें इस पर चिंता
करने की कोई जरूरत नहीं है. टीचर ने कहा, "हम जूनियर टीचर हैं. हम
बहुत अधिक नहीं कह सकते हैं. ऐसा कभी नहीं होना चाहिए था. यह भारत है. यहां तक कि
एक अति सांप्रदायिक व्यक्ति को भी बच्चों के साथ ऐसा नहीं होने देना चाहिए."
वजीराबाद में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता शकुन्तला ने भी शेहरावत के आक्रमक आचरण के बारे
में बात की और कहा, "मैं उनके साथ चुनाव ड्यूटी पर थी तब मेरी उनसे बातचीत हुई
थी. उनकी भाषा बहुत असभ्य थी और उनकी सोच बहुत पिछड़ी थी." आंगनबाड़ी में
शकुन्तला के साथ काम करने वाली शगुफ्ता ने बताया कि कुछ साल पहले म्यूनिसिपल स्कूल
से उनके दो बेटों ने पढ़ाई की थी. उन्होंने कहा, "उस समय वहां ऐसी कोई
समस्या नहीं थी. उस वक्त के प्रिंसिपल काफी अच्छे व्यक्ति थे. जब मैंने हिन्दू और
मुस्लिमों को अलग करने के बारे में सुना तो मैं जांच के लिए आई." स्कूल के
आसपास के दुकानदारों का कहना है कि वह नहीं जानते थे कि बंद मेन गेट के पीछे कक्षा
में क्या चल रहा है. वकील एवं वजीराबाद के निवासी मनोज त्यागी का कहना है कि
म्युनिसिपल कॉरपोरेशन को धार्मिक आधार पर सेक्शन के बंटवारे के बारे में पता होना
चाहिए. उन्होंने पूछा, "हम तो बाहर रहते थे लेकिन ये अधिकारी नियमित तौर पर निरीक्षण
के लिए स्कूल आया करते थे. स्कूल मैनेजमेंट कमेटी भी वहां थी. क्या वे यह कहना
चाहते हैं कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी?" त्यागी ने कहा कि
म्यूनिसिपल काउंसलर और यहां तक कि नॉर्थ दिल्ली के म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन के
कमिश्नर अतीत में स्कूल का दौरा कर चुके हैं. उन्होंने कहा, "इन अधिकारियों की भी जांच
होनी चाहिए." क्षेत्र की म्यूनिसिपल काउंसलर अमर लता सांगवान ने कहा कि भले
ही वह कुछ महीने पहले स्कूल के निरीक्षण के लिए आई थी लेकिन उन्हें धार्मिक आधार
पर छात्रों को अलग-अलग सेक्शन में बांटने के बारे में जानकारी नहीं मिली. उन्होंने
कहा कि अगर नगर निगम को इस बारे में पता चलता तो यह बात यहां तक नहीं पहुंचती.
काउंसलर यह जानने के लिए स्कूल में थी कि अगर वास्तव में बच्चों को अलग-अलग सेक्शन
में बांटा गया है तो उन्हें फिर से एक कर दिया जाए. "सभी सुधारात्मक कदम उठाए
गए हैं और जांच चल रही है. एक नया प्रिंसिपल भी स्कूल में स्थानांतरित कर दिया गया
है." सांगवान ने कहा कि इस पूरे प्रकरण के पीछे कोई राजनीतिक कारण हो सकता
है. क्या शेहरावत ने इसका कोई कारण बताया? काउंसर ने कहा, "उन्होंने केवल इतना कहा
कि यह उनकी सोच थी."