यूपी की सियासत में उभरेगी एक और नई पार्टी, 'जनसत्ता' से सत्ता के शिखर तक पहुचाने में बाहुबली विधायक राजा भैया की पूरी तैयारी !
प्रतापगढ़,यूपी (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : लोकसभा चुनाव
2019 के लिए विपक्षी दलों ने तैयारी शुरू कर दी है. सपा से अलग होकर शिवपाल यादव
ने प्रगतिशील समाजवादी पार्टी का गठन किया. उसी राह पर चलते हुए उत्तर प्रदेश के
पूर्व कैबिनेट मंत्री और निर्दलीय विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने
अपनी नई पार्टी बनाने की तरफ कदम बढ़ा दिए हैं. बाहुबली विधायक राजा भैया ने नई
पार्टी के गठन के लिए चुनाव आयोग में आवेदन किया है. इस सिलसिले में बुधवार (10
अक्टूबर) को राजा भैया अपना शपथपत्र जमा कर सकते हैं. मंगलवार (09 अक्टूबर) को
राजा भैया की तरफ से अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल ने आवेदन किया है. पार्टी बनाने को
लेकर अक्षय प्रताप उर्फ गोपाल जी और राजा भैया के मास्टर बैन केएन ओझा ने दिल्ली
में डेरा जमाया हुआ है. इस साल राजा भैया के राजनीति पारी के 25 साल पूरे हो रहे
हैं. इसीलिए आगामी 30 अक्टूबर को अपनी नई राजनीतिक पार्टी ने गठन का ऐलान कर सकते
हैं और लखनऊ में अपनी शक्ति का प्रदर्शन करेंगे. कहा जा रहा है कि राजा भैया 2019
के चुनाव मे अपने राजनीतिक दल के उम्मीदवारों को चुनाव लड़ाएंगे और इससे पहले सभी
औपचारिकताएं पूरी कर ली जाएंगी। जानकारी के मुताबिक राजा भैया ने अपने करीबियों से
सलाह करने के बाद नई पार्टी का नाम 'जनसत्ता' रखने का फैसला किया है। इस फैसले के बाद राजा भैया के करीबी
और राजनीतिक सलाहकार कैलाशनाथ ओझा ने चुनाव आयोग के पास पार्टी के पंजीकरण के लिए
नामांकन भी किया है। यूपी के भदरी राजघराने से ताल्लुक रखने वाले रघुराज प्रताप
सिंह अब तक निर्दलीय विधायक के रूप में बीजेपी और समाजवादी पार्टी को समर्थन देते
रहे हैं। कहा जा रहा है कि राजनीतिक दायरे के विस्तार के लिए राजा भैया ने लोकसभा
चुनाव से पहले अपने राजनीतिक दल के गठन का निर्णय लिया है। राजा भैया के राजनीतिक
दल के गठन की चर्चा तब से शुरू हुई है, जब से प्रतापगढ़ और आसपास
के जिलों में उनके सर्वे वाले पोस्टर लगाए गए। पोस्टर प्रतापगढ़ ग्राम प्रधानसंघ
की ओर से लगाए गए थे। इसमें लिखा गया था कि क्या राजा भैया को अब नई सियासी पार्टी
बना लेनी चाहिए बता दें कि 26 साल की उम्र में पहली बार विधायक बनने वाले राजा
भैया 1993 से ही प्रतापगढ़ की कुंडा सीट से निर्वाचित होते रहे हैं। उन्होंने
सियासत में पहला कदम 26 साल की उम्र में रखा। पहली बार में कुंडा सीट से चुन लिए
गए। इसके बाद से यूपी की राजनीति में वह धीरे-धीरे अपना पैर पसारते चले गए।
निर्दलीय होने के बावजूद उनका दबदबा सभी सियासी दलों में रहा है। यही वजह है कि
राजा भैया कल्याण सिंह सरकार, मुलायम सरकार और अखिलेश सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं।
राजा भैया ने इस बार विधानसभा चुनाव में खुद तो कुंडा विधानसभा सीट से चुनाव जीता
ही, साथ ही अपने करीबी विनोद सरोज को भी बाबागंज सीट से विधायक
बनवा दिया। उनके करीबी भाई अक्षय प्रताप सांसद भी रह चुके हैं। क्षत्रिय विधायकों
और मंत्रियों में भी उनका प्रभाव साफ देखा जा सकता है। राजा भैया
के इस सियासी कदम से बीजेपी और सपा में हड़कंप मच गया है. समाजवादी पार्टी से
रिश्ते बिगड़ने के बाद राजा भैया का यह बड़ा सियासी दांव है. राजा भैया की इस कवायद
को सवर्णों को लामबंद करने की मुहिम के रूप में देखा जा रहा है. आपको बता दें कि
राज्यसभा चुनाव के दौरान क्रॉस वोटिंग को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव से हुए
मतभेद के बाद से ही वे नई सियासी जमीन तलाश रहे थे.