इलाहाबाद कुंभ में दिखेगी स्वामी चिदानंद की पर्यावरण संरक्षण की पहल एवम गंगाजल व गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन , जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी से हुई मुलाकात !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : अध्यात्म और परमार्थ का संदेश देने
वाले स्वामी चिदानंद सरस्वती के इस बार इलाहाबाद के कुंभ शिविर में बड़ा संदेश
निकलेगा। उनके शिविर से इस बार परंपराओं के निवर्हन के साथ प्रगतिशीलता और
पर्यावरण संरक्षण का ऐसा सन्देश निकलेगा, जो
भविष्य में पेड़-पौधों को ही नहीं, प्राण-पीढ़ी
और पृथ्वी की भी सांसें बचाये रखेगा।सांस्कृतिक व वैचारिक आधार पर आयोजित होने वाले इलाहाबाद के
कुंभ को उन्होंने स्वच्छता, समरसता
और सद्भाव के साथ योग से भी जोडऩे का एक वृहद कार्यक्रम तैयार किया है।लखनऊ में आज परमार्थ निकेतन, ऋषिकेश के स्वामी चिदानंद ने बताया कि कुंभ में वह गंगाजल और
गोबर से लकड़ी बनाने की मशीन लोगों के सामने लाएंगे। उनके आश्रम के एक सदस्य ने यह
मशीन तैयार की है।
तथा स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज ने केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी से
मुलाकात की। दोनों के बीच गंगा में गिर रहे नालों को टेप करने को लेकर चर्चा हुई।
गुरुवार को परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती महाराज दिल्ली
पहुंचे। वहां उन्होंने केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात की।
उन्होंने कहा कि ऋषिकेश, हरिद्वार, गंगोत्री, यमनोत्री, देवप्रयाग
और बद्रीनाथ के नालों को टेप करने की शुरूआत जल्द से जल्द की जानी चाहिए। इन नालों
की वजह से गंगा में प्रदूषण बढ़ता जा रहा है। कुम्भनगरी इलाहाबाद, वाराणसी
और हरिद्वार के सौंदर्यीकरण एवं हरित तीर्थीकरण पर चर्चा की। केंद्रीय जल संसाधन
मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार सभी जगहों पर नदी में गिर रहे नालों को टेप
करने के लिए कार्य शुरु कर चुकी है। गंगा व पर्यावरण को शुद्ध रखना सरकार का मुख्य
लक्ष्य है। स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती की पुण्यतिथि पर किया अखंड पाठऋषिकेश। गुरुवार
को परमार्थ निकेतन के संस्थापक संरक्षक स्वामी शुकदेवानन्द सरस्वती महाराज की पावन
53 वीं पुण्यतिथि का 07 दिवसीय समारोह श्रीरामचरितमानस के अखण्ड पाठ व यज्ञ से विधिवत
सम्पन्न हुआ। इस दौरान श्रीरामायण पाठ,
आरती, हनुमान
चालीसा पाठ एवं सदगुरुदेव पूजन व समाथि मंदिर की दिव्य आरती की गई। मौके पर स्वामी
शुकदेवानन्द ट्रस्ट के प्रबन्ध न्यासी महामण्डलेश्वर स्वामी असंगानन्द सरस्वती
समारोह, रायबरेली से आये सन्त स्वामी
ज्योतिर्मयानन्द, स्वामी विश्वात्मा नन्द, पंडित
वनवारी लाल शास्त्री, स्वामी विज्ञानानन्द, स्वामी
केशवानन्द, स्वामी शिवानन्द, महामण्डलेश्वर
स्वामी असंगानन्द सरस्वती, स्वामी ज्योतिर्मयानन्द, निकेतन
के प्रबन्धक राम अनन्त तिवारी, नरेन्द्र बिष्ठ, लक्की
सिंह आदि मौजूद थे। स्वामी जी कहते है
कि शवदाह के लिए प्रतिवर्ष आठ से दस करोड़ पेड़ काटे जा रहे है लेकिन, गोबर की लकड़ी अब इसका ऐसा विकल्प बनेगी, जिसमें वही मंत्र वही परंपरा और वही मान्यता होगी, बस प्रक्रिया बदल जाएगी। शवदाह में इसकी स्वीकार्यता के लिए
गोबर की लकड़ी के इस्तेमाल की बात वह कुंभ में संतों के मुख से कहलाएंगे।स्वामी चिदानंद कुंभ में 'अस्थि विसर्जन-आस्था का सर्जन' के मंत्र के साथ एक और नई अवधारणा लाने जा रहे है । वह कहते है कि
परंपराओं का पालन करते हुए ऐसा अस्थि विसर्जन हो, जिसमें मान्यता के साथ पर्यावरण भी बचे।कुंभ में इसका मॉडल वह लोगों के सामने रख कर बतायेंगे कि
गंगा में प्रतीक के तौर पर थोड़ी अस्थियां विसर्जित करें और बाकी अस्थियों को वहीं
खाद के तौर पर प्रयोग कर मिट्टी के साथ बीज रोप दें तो पिता या प्रियजन पेड़े बनकर
फिर लौट आएंगे। घाट पर शोक में डूबे लोग वहीं अस्थियों से अशोक रोप दें तो प्रियजन
वहीं हमारे साथ रहेंगे। यह मंत्र भी वह संतों से दिलाएंगे।स्वामी चिंदानंद बताते हैं कि कुंभ में इस बार उनके शिविर
में जहां 37 देशों की जनजाति के प्रतिनिधि जुटेंगे, वहीं 121 देशों के लोगों के साथ योग कुंभ भी साकार होगा। वह कहते है
कि जल संरक्षण का सन्देश देकर इस बार जन कुंभ को जल कुंभ बनाने की तैयारी है।