दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय गोरखपुर में मनाया गया महात्मा गांधी एवं लाल बहादुर शास्त्री का जन्मदिवस7
गोरखपुर (न्यूज़ ग्राउंड) जसप्रीत : महात्मा गांधी जी की 150वीं जन्म -जयंती एवं लाल बहादुर शास्त्री जी की जन्म -जयंती का स्मरणोत्सव समारोह का आयोजन दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय, गोरखपुर के अधिष्ठाता, छात्र-कल्याण द्वारा संवाद भवन में पूर्वाहन 10:30 बजे सम्पन्न हुआ। मुख्य वक्ता के रूप में वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय, जौनपुर के पूर्व कुलपति प्रोफेसर उदय प्रताप सिंह जी ने उद्बोधन में कहा कि महात्मा गांधी जी और गोलोक वासी लाल बहादुर शास्त्री जी की जन्म -जयंती को केवल स्मरण करने के लिए ही नहीं हम एकत्रित हुए हैं बल्कि उनके द्वारा आचरित आदर्श एवं मूल्यों के अनुपालन संकल्प - व्रत हेतु हम यहां उपस्थित हुए हैं । उन्होंने कहा कि गांधी जी का प्रिय भजन "रघुपति राघव राजा राम, सबको सन्मति दे भगवान" वस्तुतः ज्यादा प्रासंगिक है क्योंकि वर्तमान सामाजिक आदर्शों-मर्यादाओ में सन्मत का सर्वथा लोप दिखाई पड़ता है । दक्षिण अफ्रीका में अपने सफलतम वकालाती व्यवसायिक जीवन के साथ साथ दक्षिण अफ्रीका के प्रशासकों की नस्लभेद रीति- नीति का, खासकर हिंदुस्तानी नागरिकों के प्रति प्रशासकों के दुर्व्यवहार के विरुद्ध संघर्षों की एक लंबी लड़ाई प्रारंभ किए। गांधी जी के सार्वजनिक जीवन का आदर्श था कि समाज की भलाई प्रति व्यक्ति की भलाई में निहित है , वकील का जीवन नाई के जीवन के समतुल्य है तथा श्रमजीवी जीवन जीने लायक है। मुख्य वक्ता ने बारीकी से गांधीजी के सामाजिक अवदानों का जिक्र करते हुए कहा कि गांधी जी की एक सामाजिक पैथोलॉजिस्ट थे क्योंकि हिंसा के मूलभूत कारणों का विश्लेषण करते हुए गांधी जी लिखते हैं कि पवित्र कर्म के बिना कमाया हुआ धन, संचेतना के बिना आनंद, चरित्र के बिना शिक्षा, मानवता बिना विज्ञान नैतिकता बिना व्यापार , त्याग बिना पूजा तथा सिद्धांत विना राजनीति हिंसा की जननी है । गांधी जी सनातनी हिंदू थे, वैदिक वरनाश्रम में विश्वासी , ईश्वर के जन्म तथा मनुष्यों के पुनर्जन्म में विश्वास, सत्य के अप्रतिम शोधार्थी के साथ साथ वैसे हिंदू धर्म के हिमायती थे जो मुसलमानों और ईसाइयों को आत्मसात करें । मुख्य वक्ता ने लाल बहादुर शास्त्री जी को स्मरण करते हुए बताया कि शास्त्री जी बेहद गरीब परिवार से ताल्लुक रखते थे और रामनगर से तैरकर कर बनारस आते थे। बेहद सरल, सहज , निष्ठावान देश प्रेमी और राष्ट्र भक्ति से ओतप्रोत अनुपम गुणों के व्यक्तित्व थे। शास्त्री जी पड़ोसी देश पाकिस्तान के साथ सन 1965 के युद्ध के विजयी नायक थे । जय जवान जय किसान के उद्घोषक गांधीवादी राजनेता का जीवन प्रेरणादाई रहा है । लाल बहादुर शास्त्री जी ने देश के प्राचीन गौरव को पुनः स्थापित किया। ललित कला एवं संगीत विभाग की अध्यक्षा प्रोफेसर उषा सिंह के नेतृत्व में इसी विभाग के छात्र-छात्राओं ने "वैष्णव जन तो तीनों कहिए पीर पराई जाने रे एवं रघुपति, राघव राजा राम गांधी जी के प्रिय भजनों का सुरमई गायन प्रस्तुत कर स्मरणोत्सव शो के श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। अध्यक्षीय उद्बोधन में प्रोफेसर विजय कृष्ण सिंह ने कहा कि विश्व का कोई देश नहीं है जहां पर कहीं न कहीं गांधी जी से संबंधित कोई न कोई स्मारक ना हों। वस्तुतः गांधी जी का जीवन वैश्विक चरित्र का है ।अमेरिका के मार्टिन लूथर किंग जूनियर, तिब्बत के धार्मिक गुरु दलाई लामा , दक्षिण अफ्रीका के रंगभेद नीति के खिलाफ लड़ाई लड़ने वाले योद्धा नेलसन मंडेला, म्यानमार की आंग सान सू की और अमेरिका के बराक ओबामा ने अपने सामाजिक जीवन और राजनीतिक जीवन के आदर्श रूप में महात्मा गांधी जी के चिंतन को स्वीकार किया है । गांधी जी हमेशा शाश्वत मूल्यों की स्थापना के लिए अपने ही ऊपर सामाजिक प्रयोग किया करते थे और वही उपदेश देते थे जो वे अपने जीवन में चरितार्थ कर पाते थे । गांधीजी के कथनी और करनी में कोई अंतर नहीं था। विद्यार्थियों से कुलपति ने आग्रह किया कि सर्व समावेशी वैचारिकी को अपनाकर भविष्य के पथिक बनिए । उन्होंने बताया कि सन 1930 में अमेरिका की धरती से प्रकाशित टाइम मैगजीन ने गांधी जी को पर्सन ऑफ द ईयर खिताब से नवाजा और 1999 में इसी पत्रिका ने अल्बर्ट आइंस्टाइन को पर्सन ऑफ द सेंचुरी तथा द्वितीय स्थान पर महात्मा गांधी जी को स्थापित किया है। अलबर्ट आइंस्टाइन ने गांधीजी के बारे में कहा है कि आने वाली पीढ़ी शायद ही यह विश्वास करें कि कभी धरती पर हाड मांस का बना हुआ यह शरीर विचरण करता होगा। लाल बहादुर शास्त्री जी को स्मरण करते हुए कुलपति ने कहा कि शास्त्री जी के नेतृत्व में देश अन्न उत्पादन में आत्म निर्भर बन पाया। जन्म जयंती के स्मरण उत्सव में शिक्षक संघ के अध्यक्ष विनोद कुमार सिंह, प्रोफेसर चितरंजन मिश्र, प्रोफेसर ओ पी पांडे , प्रोफेसर जीतेंद्र मिश्र, प्रोफेसर उमेश नाथ त्रिपाठी, प्रोफेसर राजवंत राव , प्रोफेसर गोपीनाथ , प्रोफेसर विनय कुमार सिंह, प्रोफेसर उमा श्रीवास्तव, प्रोफेसर शिखा सिंह प्रोफेसर सुधा यादव और प्रोफेसर हर्ष कुमार सिन्हा , प्रोफेसर हिमांशु चतुर्वेदी के साथ साथ नवनियुक्त शिक्षकों , कर्मचारी संघ के पदाधिकारी बीएन सिंह, निर्भय नारायण सिंह एवं संतोष आदि बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने अपनी सहभागिता सुनिश्चित । कार्यक्रम का संचालन अधिष्ठाता छात्र कल्याण प्रोफेसर रविशंकर सिंह एवं धन्यवाद ज्ञापन प्रोफेसर उमा श्रीवास्तव द्वारा संपन्न हुआ।