बनारस के इस गांव में पीएम मोदी ने मनाया अपना जन्मदिन, किया बच्चो से संवाद, और बताया चायवाले से प्रधानमंत्री की कुर्सी तक कैसे पहुंचे मोदी !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपना 68वां जन्मदिन के मौके पर सोमवार शाम वाराणसी पहुंचे। पीएम आज
यहां स्कूली बच्चों से मिले। पीएम मोदी ने वाराणसी के नरउर गांव के प्राथमिक
विद्यालय में बच्चों से चर्चा की। अपनी इस दो दिवसीय यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री
मोदी मंगलवार को बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एम्पीथियेटर ग्राउंड में
एक रैली को संबोधित करेंगे और अपने संसदीय क्षेत्र के लिए 650 करोड़ रुपए की विकास योजनाओं की घोषणा करेंगे। पीएम मोदी
को राजनीतिक दलों के नेताओं ने उन्हें शुभकामनाएं दी हैं।प्रधानमंत्री मोदी सोमवार शाम वाराणसी पहुंचे।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हवाईअड्डे पर पीएम मोदी की अगवानी
की। पीएम मोदी के जन्मदिन मनाने की जानकारी जबसे गांव के लोगों को हुई है तब से
गांव में हर तरफ उत्साह की लहर है। गांव मे जोरों से तैयारियां चल रही थी । पीएम
मोदी रोहनिया क्षेत्र के नरउर गांव के प्राथमिक विद्यालय में जन्मदिन मनाएंगे।
प्राथमिक विद्यालय के छात्र प्रधानमंत्री के लिए पोस्टर बना रहे हैं और छात्राएं
उनके आगमन पर स्वागत गीत गाएंगी।मोनी, नेहा, रिमझिम की ओर से मन की वीणा से गुंजित घड़ी मंगलमल, स्वागतम्, स्वागतम्, स्वागतम् गीत से प्रधानमंत्री का स्वागत होगा। प्रधानमंत्री
द्वारा केक काटने पर बच्चों द्वारा गीत बार बार दिन ये आए और जियो हजारो साल भी
गाया जाएगा। विद्यालय के शिक्षकों और छात्र-छात्राओं को जब से ये खबर मिली है कि
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उनके बीच अपना 68वां जन्मदिन मनाएंगे उनकी
खुशी शब्दों में बयां करना मुश्किल थी। इस अवसर को हर कोई यादगार बनाने में जुटा
है। कार्यक्रम के अनुसार प्रधानमंत्री विद्यालय में सोमवार की शाम पांच बजे बच्चों
के साथ संवाद के बाद रीड टू रूम प्रोजेक्ट की लाइब्रेरी और स्मार्ट क्लास भी देखा
। वे विद्यालय में करीब एक घंटे तक रहे। एसपीजी और जिले के प्रशासनिक अधिकारियों
ने प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण किया। डीएम सुरेंद्र सिंह ने आंगनवाड़ी ठीक करने, स्मार्ट क्लास रूम टू रीड को सुंदर करने का निर्देश दिया।
दीवारों पर स्लोगन लिखने और वाल पेंटिग कराने को कहा। सात साल के शुभम कुमार को
खेलने तक की फुरसत नहीं है। वह बहुत व्यस्त थे । ऐसा ही कुछ कक्षा सात साल की
अन्नू पटेल के साथ है जो गुड्डे गुडि़यों का खेल छोड़ एक बेहद जिम्मेदार की तरह
स्कूल की सजावट में टीचर का हाथ बंटाने में जुटी थी ।
मोदी जी का चाय से लेकर प्रधानमंत्री का सफ़र गुजरात के
वडनगर स्टेशन पर चाय बेचने वाले बालक के हाथ में कभी देश की बागडोर होगी, इसका किसी को सपने में भी अंदाजा नहीं रहा होगा.मगर नरेंद्र मोदी ने करिश्मा कर दिखाया.
चायवाले से देश के प्रधानमंत्री बनकर मोदी यह संदेश देने में सफल रहे कि लक्ष्य के
प्रति समर्पण और जुनून के आगे कोई भी चीज असंभव नहीं है. उन्होंने आम जन के सपनों
को उड़ान भी दी. खास बात है कि जब नरेंद्र मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री बने, उस वक्त उन्होंने एक अदना सा चुनाव भी नहीं लड़ा था. दिल्ली
में बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन स्तर का कामकाज देखने के दौरान ही उन्हें पार्टी और
संघ की ओर से गुजरात का मुख्यमंत्री बनाने का फैसला हुआ था. प्रधानमंत्री बनने से
पहले नरेंद्र मोदी वर्ष 2001 से 2014( पीएम बनने से पहले) तक लगातार चार बार गुजरात के
मुख्यमंत्री रहे. जानिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़ी 10 बड़ी बातें.
नरेंद्र मोदी का जन्म 17 सितंबर 1950 को गुजरात के मेहसाणा जिला स्थित वडनगरमें हुआ. उनकी मां हीराबेन मोदी और पिता
दामोदरदास थे. मोदी अपने मां-बाप की छह संतानों में तीसरे नंबर के रहे.
आठ वर्ष की अवस्था में ही
बाल नरेंद्र मोदी का झुकाव संघ की तरफ हुआ तो शाखाओं में जाने लगे. 1967 में 17 साल की उम्र में हाईस्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद
उन्होंने घर छोड़ दिया और अहमदाबाद पहुंचे और फिर उन्होंने आरएसएस की औपचारिक
सदस्यता ग्रहण की.
नरेंद्र मोदी अहमदाबाद
में कई संघ प्रचारकों के साथ काम करने लगे. 1975 में जब इंदिरा गांधी
सरकार ने इमरजेंसी लगाई तो मोदी वेश बदलकर भूमिगत हो गए थे. उस समय वह संघ
प्रचारकों को अंडरग्राउंड रहकर मदद करते थे.तीस वर्ष की अवस्था में नरेंद्र मोदी
आरएसएस में संभाग प्रचारक बन गए. बतौर प्रचारक संघ के प्रचार-प्रसार में जोर-शोर
से जुटे रहे.
1985 में मोदी मुख्य धारा की राजनीति से जुड़े, जब संघ ने आवश्यकता
के मद्देनजर उन्हें बीजेपी में भेजा. जब लाल कृष्ण आडवाणी ने 1990 में सोमनाथ-अयोध्या रथ यात्रा निकाली तो नरेंद्र मोदी
सारथी बने. इसी तरह वर्ष 1991 में बीजेपी नेता मुरली मनोहर जोशी की कन्याकुमारी से
श्रीनगर एकता यात्रा के आयोजन में भी मोदी ने बढ़चढ़कर भूमिका निभाई. जिससे मोदी
खासे चर्चित हुए.
बड़े नेताओं से जुड़े
आयोजनों के सफल निर्वहन और संगठन के प्रति निष्ठा तथा लगन देख बीजेपी में नरेंद्र
मोदी का 1995 में कद बढ़ा, जब पार्टी ने उन्हें
राष्ट्रीय सचिव बनाया. इसके बाद मोदी दिल्ली मुख्यालय पहुंचे. इसके तीन साल बाद ही
1998 में उन्हें महासचिव (संगठन) बनाया गया. अक्टूसबर 2001 तक मोदी इस पद पर रहे
वर्ष 2001 में जब गुजरात में भूकंप आया तो भारी संख्या में जान-माल
की क्षति हुई. 20 हजार से ज्यादा लोगों की जान गई. तब पार्टी ने केशुभाई
पटेल को मुख्यमंत्री पद से हटाकर नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) को सीएम की जिम्मेदारी
दी. मुख्यमंत्री बनने से पहले मोदी एक भी चुनाव नहीं लड़े थे. उन्होंने अक्टूबर 2001 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली.
अभी सत्ता संभाले हुए
पांच महीने ही हुए थे कि गुजरात के गोधरा में दंगा भड़क उठा. रिपोर्ट्स के मुताबिक
गोधरा दंगे में दो हजार से ज्यादा लोग मारे गए. उस वक्त तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल
बिहारी वाजपेयी ने गुजरात के दौरे के दौरान नरेंद्र मोदी को राजधर्म का पालन करने
की नसीहत दी थी. कहा जाता है कि उस वक्त उन्हें सीएम पद से हटाने की भी बात चल रही
थी, मगर लालकृष्ण आडवाणी के समर्थन की वजह से वाजपेयी को निर्णय
बदलना पड़ा था.
दंगे के कुछ ही महीने बाद
गुजरात में विधानसभा चुनाव हुए तो मोदी बहुमत से सत्ता में लौटे. खास बात रही कि
दंगे में जो इलाके सर्वाधिक प्रभावित रहे, वहां पर बीजेपी को ज्यादा
लाभ मिलता दिखाई दिया. इसके बाद नरेंद्र मोदी ने गुजरात की सत्ता की इस कदर नब्ज
पकड़ी कि फिर प्रधानमंत्री बनने तक चार बार सीएम बने रहे
सितंबर 2013 में बीजेपी की नई दिल्ली में हुई संसदीय दल की बैठक में
नरेंद्र मोदी को 2014 के लोकसभा चुनाव के लिए प्रधानमंत्री उम्मीदवार चुना गया.
तब आडवाणी सहित कुछ अन्य वरिष्ठ नेताओं ने इसका विरोध किया था.भाजपा अध्यक्ष
राजनाथ सिंह ने उनकी उम्मीदवारी की घोषणा की थी.
2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की अगुवाई में बीजेपी 282 सीटों के साथ बहुमत से
सत्ता में पहुंची. फिर 26 मई 2014 को कई पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मौजूदगी में
नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली.