भारतीय मुद्रा की गिरती कीमत को थामने में जुटी केंद्र सरकार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुलाई अधिकारियों की मीटिंग ,
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा : डॉलर के मुकाबले
रुपए में गिरावट थम नहीं रही। बुधवार को यह 22 पैसे कमजोर होकर 72.91 के रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया। हालांकि, मिडसेशन में रिकवरी आ गई। रुपया मंगलवार को 24 पैसे गिरकर 72.69 पर बंद हुआ था। कच्चा
तेल महंगा होने और शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की बिकवाली से रुपए पर दबाव
बढ़ा। आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि सरकार और रिजर्व बैंक
पूरी कोशिश कर रहे हैं कि रुपए की कीमत हद से ज्यादा न गिरे। अंतरराष्ट्रीय बाजार
में ब्रेंट क्रूड का रेट बुधवार को 2% बढ़कर 79.34 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गया। उधर, अमेरिका-चीन के बीच ट्रेड वॉर तेज होने के आसार हैं। इससे
भी करंसी बाजार में दबाव बढ़ा। रुपए में गिरावट के 5 असर: पहला- तेल कंपनियों
पर दोहरी मार पड़ेगी। उनके लिए क्रूड का इंपोर्ट महंगा हो जाएगा। इससे
पेट्रोल-डीजल के रेट बढ़ेंगे। दूसरा- विदेशी कर्ज चुकाने के लिए सरकार ज्यादा रकम
खर्च करनी पड़ेगी। तीसरा- विदेशों में पढ़ाई और घूमने-फिरने का खर्च बढ़ेगा।
क्योंकि, करंसी एक्सचेंज के लिए ज्यादा कीमत चुकानी पड़ेगी।
चौथा-गिरावट बढ़ने पर आरबीआई ब्याज दरों में इजाफा कर सकता है। अक्टूबर में आरबीआई
मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा। पांचवा- आईटी और फार्मा कंपनियों को रुपए की
गिरावट से फायदा होगा। क्योंकि, इनका ज्यादातर कारोबार एक्सपोर्ट पर आधारित है। इस साल आईटी
और फार्मा कंपनियों के शेयरों में इसी वजह से तेजी आई।बुधवार को रुपया अब तक के अपने सबसे निचले स्तर
पर पहुंच गया। रुपया 9 पैसे की कमजोरी के साथ खुला। वहीं, शेयर बाजार में तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स 100 अंकों की तेजी के साथ खुला। रुपये में गिरावट बढ़ने से
महंगाई के और ज्यादा बढ़ने की आशंका हो गई है।वहीं आज पेट्रोल डीजल के दाम में किसी तरह की कोई तब्दीली नहीं हुई है। रुपया
आज 72.78 के स्तर पर खुला। खुलने के बाद रुपये में कमजोरी और बढ़ गई
है और इसने 72.86 का निचला स्तर छू लिया है। रुपये में कल भी कमजोरी आई थी।
डॉलर के मुकाबले रुपया कल 24 पैसे टूटकर 72.69 के स्तर पर बंद हुआ था। सेंसेक्स
107 अंक के उछाल के साथ 37,520 के स्तर पर और निफ्टी 14 अंककी बढ़त के
साथ 11,302 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। शुरुआती कारोबार में निफ्टी
11,340 तक पहुंचा था जबकि सेंसेक्स ने 37,638.2 तक दस्तक दी थी। वहीं, ऊपरी स्तरों से फिसलकर
निफ्टी 11,282.85 तक गिर गया जबकि सेंसेक्स ने 37,409 तक गोता लगाया। डॉलर के मुकाबले इस साल दुनियाभर की मुद्राओं में गिरावट
आई। लेकिन, एशिया में भारतीय रुपए का प्रदर्शन सबसे खराब रहा। जनवरी से
अब तक रुपया 14% गिर चुका है। देश में पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को
लेकर हाहाकार मचा हुआ है. लोग सरकार से किसी राहत की उम्मीद कर रहे हैं. ऐसे में
पेट्रोल-डीजल के बढ़े दाम और डॉलर के मुकाबले गिरते रुपये को संभालने को लेकर
सरकार हरकत में आ गई है. इसी कड़ी में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस हफ्ते के
आखिर में सीनियर अधिकारियों की मीटिंग बुलाई है. इस रिव्यू मीटिंग अर्थव्यवस्था पर
चर्चा होगी. प्राप्त जानकारी के मुताबिक, ये मीटिंग शनिवार को हो
सकती है. इसमें वित्त मंत्री अरुण जेटली भी शामिल होंगे. इसके अलावा कुछ और
कैबिनेट मंत्रियों के शामिल होने की उम्मीद है. इस बीच वित्त मंत्रालय ने कहा है
कि 'रुपये में निराधार गिरावट नहीं आए' इसके लिए सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक हर संभव कोशिश
करेंगे. एक अधिकारी ने अपना नाम न बताने के शर्त पर कहा कि रुपये में पिछले तीन
महीनों ने ऐसी गिरावट देखने को नहीं मिली थी. पीएम के साथ मीटिंग में यह तय हो
सकता है कि रुपये को किस तरह से मजबूत बनाया जाए और पेट्रोल-डीजल के दाम को कैसे
नीचे लाया जाए. आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने ट्वीट में कहा, 'रुपया ज्यादा नीचे नहीं जाए यह सुनिश्चित करने के लिए सरकार
और आरबीआई हर संभव कदम उठायेंगे. रुपये में आज हुआ सुधार इसे दर्शाता है.' बता दें कि पिछले कुछ दिनों से रुपये में गिरावट और
पेट्रोल-डीजल के दाम में बढ़ोतरी को लेकर केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार विपक्षी
पार्टियों के निशाने पर है. रुपये में गिरावट लगातार जारी है. मंगलवार को भी 24 पैसे गिरकर 72.69 पर बंद हुआ था, जबकि बुधवार को यह 22 पैसे कमजोर होकर 72.91 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंच गया. हालांकि, बाद में रुपये को थोड़ी मबजूती मिली और 24 पैसे गिरकर 72.69 पर बंद हुआ था. रुपये
में गिरावट के बाद देश में महंगाई तो बढ़ाएगी ही, साथ में पेट्रोल-डीजल के
रेट भी बढ़ेंगे. इसके साथ-साथ विदेश कर्ज चुकाने के लिए भारत को ज्यादा रकम देने
होंगे. इसके साथ-साथ विदेशों में पढ़ाई करने के साथ घूमने में ज्यादा पैसे खर्च
करने होंगे. डॉलर के मुकाबले रुपये में कमजोरी और कच्चा तेल महंगा होने से घर के
बजट में 10 से 15 फीसदी तक बढ़ोतरी हो गई है। पेट्रोलियम पदार्थों खासकर
डीजल के मूल्य में बढ़ोतरी का असर दैनिक उपभोग की वस्तुओं पर दिखना शुरू हो गया
है। इसकी वजह से आलू-प्याज और हरी सब्जियों की कीमत में 30 फीसदी तक का इजाफा हो चुका है, वहीं डबल रोटी व अंडा जैसी दैनिक उपयोग की चीजें भी महंगी
हो गई हैं।पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस
मंत्रालय के तहत काम करने वाले पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के
मुताबिक, बीते जुलाई महीने में इंडिया बास्केट क्रूड की औसत कीमत 73.73 डॉलर प्रति बैरल थी, जबकि उस समय डॉलर के
मुकाबले रुपया 67.68 के स्तर पर था।वहीं, बीते छह सितंबर को इंडियन बास्केट क्रूड की कीमत बढ़कर जहां
75.58 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई, वहीं उस दिन डॉलर के मुकाबले रुपया 71.92 के स्तर पर था। इसी का असर बाजार पर पड़ रहा है।इंडियन फाउंडेशन ऑफ ट्रांसपोर्ट रिसर्च एंड
ट्रेनिंग (आईएफटीआरटी) के सीनियर फेलो एसपी सिंह का कहना है कि सिर्फ बीते अगस्त
में ही दिल्ली में डीजल की कीमत में प्रति लीटर 2.39 रुपये, जबकि पेट्रोल की कीमत में 2.21 रुपये की बढ़ोतरी हुई
है।इस महीने सात दिनों में ही डीजल 1.65 रुपये प्रति लीटर, जबकि पेट्रोल 1.31 रुपये प्रति लीटर महंगा हो गया है। इसके कारण माल ढुलाई पर
खर्च चार से पांच फीसदी बढ़ गया है, जिससे आलू-प्याज से लेकर
तमाम फल-सब्जियों का ढुलाई खर्च तो बढ़ा ही है, उद्योग जगत की परिवहन
लागत भी बढ़ी है।बीते एक पखवाडे़ में
गृहस्थी चलाना 30 फीसदी तक महंगा हो गया है। दिल्ली के उपनगरीय इलाकों में
पिछले पखवाडे़ पहाड़ी आलू 20
रुपये किलो मिल रहा था, जो बढ़कर अब 25 रुपये हो गया है। नासिक वाला प्याज 20 रुपये किलो बिक रहा था, जो अब 25 रुपये किलो हो गया है। इसी तरह भिंडी व कद्दू की कीमत भी
पांच से 10 रुपये प्रति किलो बढ़ गई है। यही नहीं, चावल-दाल भी 10 रुपये किलो तक महंगे हो
गए हैं। डबल रोटी के 700 ग्राम वाले लोफ की कीमत 35 से बढ़कर 40 रुपये हो गई है, तो अंडे की कीमत 50 रुपये दर्जन से बढ़कर 55 रुपये दर्जन हो गई है।