बीजेपी का अब दक्षिण भारत 4 राज्यों पर ध्यान , 2019 में कांग्रेस को 'अखाड़े' में चित करने की बनायीं रणनीति !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा : देश की दो बड़ी
राष्ट्रीय पार्टियों को अपना सियासी किला मजबूत करने के लिए क्षेत्रीय
पार्टियोंके सहयोग की दरकार है. दोनों
दलों को पता है कि बिना क्षेत्रीय पार्टियों से उनका बेड़ा पार नहीं होगाकुछ पार्टियां थर्ड फ्रंट या फेडरल फ्रंट जैसा कोई गठजोड़
बनाना चाहती हैं जो गैर भाजपाई और गैर कांग्रेसी हो. उन्हें दोनों से दिक्कत है.
इसके बावजूद बीजेपी और कांग्रेस के लिए इन्हीं पार्टियों से उम्मीद ज्यादा है. ऐसे
में सबसे बड़ा सवाल ये है कि 2019 के लोकसभा चुनाव में कौन पार्टी किसके लिए खतरा बनेगी और
कौन सरकार बनाने में मददगार साबित होगी. लोकसभा चुनाव की तैयारी में जोरशोर से
जुटीबीजेपी ने 'सियासी अखाड़े' का रास्ता दक्षिण के चार प्रमुख राज्यों की ओर मोड़ दिया है. यहां
कांग्रेस और उसके सहायक दल साल 2004 से लगातार दो लोकसभा चुनाव में ज्यादा सीटें हासिल कर रहे
हैं. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और पॉन्डिचेरी की कुल 82 सीटों पर यूपीए और एनडीए
में दोनों अपनी-अपनी मजबूत तैयारी कर रहे हैं. साल 2004 और साल 2009 में कांग्रेस और उसके
सहयोगी दलों ने 70 सीटों से ज्यादा पर जीत हासिल की. हालांकि साल 2014 के लोकसभा चुनाव में यह 2 सीटों तक सिमट गया.इन सभी राज्यों में से तमिलनाडु पर बीजेपी और कांग्रेस
दोनों की नजर है. यह कोई नहीं जानता कि जयललिता और करुणानिधि के निधन के बाद राज्य
की राजनीति किस ओर जाएगी. हर खिलाड़ी फूंक-फूंककर कदम बढ़ा रहा है.इस महीने की
शुरुआत में मीडिया के साथ बातचीत में, एक शीर्ष कांग्रेस नेता ने दावा किया था कि अगला लोकसभा
चुनाव डीएमके, यूपीए के साथ मिल कर लड़ेगी. इसी के अगले हफ्ते, द्रमुक ने भाजपा अध्यक्ष
अमित शाह को इस महीने के अंत में करुणानिधि मेमोरियल सर्विस के लिए आमंत्रित किया.
शुरुआती रिपोर्ट्स की मानें तो शाह वहां जाएंगे. अब यह लग रहा है कि बीजेपी इस
कार्यक्रम में एक वरिष्ठ पार्टी नेता को भेज देगी. गुलाम नबी आजाद कांग्रेस का
प्रतिनिधित्व करेंगे. तमिलनाडु के अपने पिछले दौरे के वक्त अमित शाह ने कहा था कि
राज्य में बीजेपी का चुनाव से पूर्व गठबंधन होगा. लेकिन किससे? साल 2004 और साल 2009 के लिए तमिलनाडु में
सहयोगी के चुनाव ने बीजेपी को दो लोकसभा चुनावों के लिए दिल्ली की सत्ता से बाहर
रखा. इस बार बीजेपी के लिए समय और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है.आंध्र प्रदेश में 25 लोकसभा सीटों के साथ,
कांग्रेस की तरह बीजेपी
एक छोटी खिलाड़ी है. राज्य में चुनाव के दौरान टीडीपी और वाईएसआरसीपी के बीच सीधी
टक्कर होगी. दलित और अल्पसंख्यक वोटों को मजबूत करने का प्रयास करते हुए जगन मोहन
रेड्डी को बीजेपी के साथ नहीं देखा जा सकता है. तेलंगाना में, कांग्रेस सत्तारूढ़
टीआरएस का मुख्य विरोधी दल है. के. चंद्रशेखर राव के नुकसान से कांग्रेस का लाभ
होगा. हालांकि अगर यहां टीआरएस का प्रभुत्व कायम रहा तो यह बीजेपी के लिए अनुकूल
होगा.हाल ही में राज्य सभा के डिप्टी
चेयरमैन के चुनाव में टीआरएस और बीजेडी से समर्थन स्वीकार करके, बीजेपी अब केसीआर या नवीन
पटनायक के लिए कोई चुनौती नहीं है.पिछले
तीन सालों में, पार्टी ने 2014 में शीर्ष क्षेत्रों में किसी भी नुकसान के लिए पूर्व में
और 'कोरोमंडल तट' में अपनी स्थिति को मजबूत
करने की बात कही है. आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और ओडिशा में बीजेपी ने अपना मन बना लिया है.आगे
के महीनों में तमिलनाडु का भी समीकरण सामने आएगा.42 सीटों के साथ पश्चिम
बंगाल में बीजेपी अपनी उम्मीदों को पूरा करती दिख रही है.