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राजनीति
By   V.K Sharma 24/08/2018 :12:17
आप संकट : आखिर क्यों दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल से किनारा करने लगे हैं उनके मंत्री,ऐसी क्या वजह है की “आप की सरकार ” टूटने की कगार पर आ गयी है !
 

 

नई दिल्ली [न्यूज़ ग्राउंड] आकाश मिश्रा :  दिल्ली की सत्ता पर कब्जा करने के बाद देश की सियासत में विकल्प बनने का सपना देख रहे अरविंद केजरीवाल की मुश्किल लगातार बढ़ती जा रही है। आम आदमी पार्टी (आप) का ग्राफ लगातार नीचे गिर रहा है। बवाना विधानसभा उपचुनाव छोड़ दिया जाए तो अन्य चुनावों में 'आप' का प्रदर्शन बेहद निराशाजनक रहा है। वहीं, एक के बाद एक उनके करीबी नेता उनसे किनारा करने लगे हैं। इससे उनके सामने सियासी वजूद को कायम रखने और जनता में अपना विश्वास बनाए रखने का संकट खड़ा होने लगा है। पार्टी में जो अंदरूनी लड़ाई चल रही है, उससे आने वाले दिनों में संकट और बढ़ने वाला है। छह साल पूर्व बनी आम आदमी पार्टी में लगभग साढ़े तीन वर्षों से भगदड़ मची हुई है। बारी-बारी से इसके संस्थापक सदस्य या फिर बाद में आने वाले बड़े चेहरे इसे अलविदा कह रहे हैं, जबकि कई बड़े नेता बगावत की राह पर हैं। यह स्थिति पंजाब से लेकर दिल्ली तक है। इससे पार्टी में बेचैनी है। एक सप्ताह के भीतर आम आदमी पार्टी (AAP) के दो बड़े नेताओं (आशुतोष-आशीष खेतान) के इस्तीफों से पार्टी में भूचाल आ गया है। हालांकि, यह पहला मौका नहीं है जब लोगों ने पार्टी को अलविदा कहा है, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव और 2020 विधानसभा चुनाव से पहले इसे एक बड़े मुद्दे के तौर पर देखा जा रहा है। हैरानी की बात है कि दोनों ने राजनीतिक उपेक्षा के चलते ही इस्तीफा दिया है, लेकिन पार्टी का शीर्ष नेतृत्व इसकी लगातार अनदेखी करता दिखाई दे रहा है। इस बीच AAP के वरिष्ठ नेताओं में शुमार और हासिये पर चल रहे कुमार विश्वास ने बेहद तीखा तंज कसा है और वह भी सीधे अरविंद केजरीवाल पर। उन्होंने आशीष खेतान के AAP से इस्तीफे पर ट्वीट करके तीखा प्रतिक्रिया के साथ तंज कसा है- 'हम तो चंद्र गुप्त बनाने निकले थे, हमें क्या पता था चंदा गुप्ता बन जाएगा।' पूरा ट्वीट कुछ इस तरह है-'सब साथ चले, सब उत्सुक थे, तुमको आसन तक लाने में। कुल सफल हुए निर्वीर्य तुम्हें यह राजनीति समझाने में। इस आत्मप्रवंचित बौनों का दरबार बनाकर क्या पाया। जो शिलालेख बनता उसको अखबार बनाकर क्या पाया। एक और आत्मसमर्पित कुर्बानी। हम तो चंद्र गुप्त बनाने निकले थे, हमें क्या पता था चंदा गुप्ता बन जाएगा। यह भी गौर करने वाली बात है कि अब तक AAP से जितने भी नेता अलग हुए उन्होंने सीधा अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधा है। केजरीवाल पर तानाशाही का आरोप तक लगा है। पंजाब में बगावत पर उतरे नेता भी दिल्ली नेतृत्व पर निशाना साध रहे हैं। जहां पार्टी से अलग हुए लोग पार्टी नेतृत्व पर सवाल उठाते रहे हैं वहीं पार्टी प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज का कहना है कि हर पार्टी में कुछ न कुछ लोग किसी वजह से नाराज होते ही हैं। खेतान दिल्ली डायलॉग कमीशन के उपाध्यक्ष रहने के साथ ही केजरीवाल के विश्वासपात्र भी थे। बताया जा रहा है कि दोनों नेता शीर्ष नेतृत्व के कामकाज के तरीके से नाराज थे। वे अपने आप को उपेक्षित भी महसूस कर रहे थे। जिस तरह से पार्टी के लिए पसीना बहाने वालों को नजरअंदाज कर दो उद्योगपतियों को राज्यसभा में भेजा गया, इससे इनकी नाराजगी और बढ़ गई थी। आखिरकार इन्होंने पार्टी छोड़ने का फैसला कर लिया। इनकी नाराजगी पार्टी के लिए महंगी साबित हो सकती है, इसलिए इनकी मान-मनौव्वल की भी कोशिश हो रही है। दरअसल, कुमार विश्वास और दिल्ली सरकार में मंत्री रहे कपिल मिश्रा लगातार पार्टी नेतृत्व पर हमलावर हैं। ऐसे में अन्य बड़े नेताओं की नाराजगी से दिल्ली में चुनावी समीकरण बिगड़ सकता है। वैसे भी दिल्ली विधानसभा चुनाव के बाद केजरीवाल दिल्ली में नगर निगम चुनाव व राजौरी गार्डन विधानसभा उपचुनाव बुरी तरह से हार चुके हैं। सिर्फ बवाना विधानसभा उपचुनाव में ही उन्हें जीत नसीब हुई है। अब लोकसभा चुनाव नजदीक है और पार्टी अंदरूनी कलह से जूझ रही है। यह पार्टी के लिए शुभ नहीं है। दिल्ली में आप सरकार के आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक की खामियां सामने आने लगी हैं। एक तो इसकी वजह से दिल्ली सरकार की स्थाई सरकारी डिस्पेंसरियों की हालत बिगड़ रही है, क्योंकि वहां का ज्यादातर स्टॉफ मोहल्ला क्लीनिक में तैनात है। दूसरी तरफ मोहल्ला क्लीनिक में भी लोगों को पर्याप्त सुविधाएं और दवाईयां नहीं मिल पा रही हैं। ये आरोप दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष विजेंद्र गुप्ता ने लगाए हैं। उनका कहना है कि अब दिल्ली सरकार ने भी मोहल्ला क्लीनिक में गड़बड़ी की बात स्वीकार ली है। इसीलिए अब वह नए मोहल्ला क्लीनिक खोलने के बजाय पुराने की खामियां दूर करने की बात कर रही है। दिल्ली विधानसभा में विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि विपक्ष शुरू से ही इस योजना में भ्रष्टाचार और लोगों के स्वास्थ्य के साथ हो रहे खिलवाड़ को लेकर आवाज उठाता रहा है। अब दिल्ली सरकार भी यह बात मानने लगी है। गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सत्येंद्र जैन ने इस सप्ताह समीक्षा बैठक करने और मौके पर जायजा लेने के बाद मोहल्ला क्लीनिक की बदहाली की बात स्वीकार की है। इसलिए उन्होंने अधिकारियों को नए मोहल्ला क्लीनिक खोलने से पहले पुराने क्लीनिकों की दशा सुधारने पर ध्यान केंद्रित करने को कहा है। दिल्ली सरकार ने माना है कि इन क्लीनिकों में दवाई और आधारभूत सुविधाओं की बहुत कमी है। आधारभूत ढांचा उपलब्ध कराने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) ठीक तरह से काम नहीं कर रहा है। यहां तक कि मोहल्ला क्लीनिक के लिए द्वारका स्थित नोडल ऑफिस का काम भी ठीक नहीं है। विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री ने 22 जून को आजादपुर मंडी में बने मोहल्ला क्लीनिक का औचक निरीक्षण करने के बाद 1 जुलाई से 30 नए क्लीनिक शुरू करने की घोषणा की थी, लेकिन अब तक ये शुरू नहीं हुए हैं। सरकार ने मौलाना आजाद अस्पताल को मोहल्ला क्लीनिक के लिए डॉक्टर और नर्स नियुक्त करने का काम सौंपा था। अब तक एक भी नियुक्ति नहीं हुई है। आम आदमी मोहल्ला क्लीनिक खोलने के चक्कर में दिल्ली सरकार की डिस्पेंसरियों का ढांचा भी बर्बाद होने लगा है। यहां के कर्मचारियों को मोहल्ला क्लीनिक में लगा दिया गया है, जिससे यहां आने वाले मरीजों का सही इलाज नहीं हो रहा है। भाजपा का कहना है कि 'आप' मुखिया ने निहित स्वार्थ और सत्ता के चलते विभिन्न विचारधारा वाले राजनीतिक महत्वाकाक्षियों का एक जमावड़ा जमाया, जो वक्त के साथ-साथ एक अखाड़े में बदल गया। 'आप' के जमावड़े में शामिल सदस्य अपने मुखिया की सच्चाई जान गए हैं, इसलिए पार्टी बिखर रही है। बहुत जल्द यह पार्टी एक इतिहास बन जाएगी। पार्टी के नेताओं का कहना है कि कई संस्थापक सदस्यों के बाद खेतान और आशुतोष के इस्तीफे से यह स्पष्ट है कि केजरीवाल तुगलकी तानाशाह हैं, जो मत भिन्नता को सहन नहीं कर पाते। दिल्ली प्रदेश भाजपा अध्यक्ष मनोज तिवारी कहते हैं कि अगले विधानसभा चुनाव से पहले 'आप' का अस्तित्व समाप्त हो जाएगा। 'आप' मुखिया की सच्चाई जानने के बाद एक-एक करके सभी नेता पार्टी से किनारा कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा प्रवक्ता प्रवीण शंकर कपूर का कहना है कि फर्जी सर्वे के आधार पर मुख्यमंत्री लोकसभा चुनाव में भाजपा को हराने का सपना देख रहे थे, लेकिन उनके अपने साथी ही उन्हें छोड़कर जा रहे हैं। कहीं लोकसभा चुनाव से पहले केजरीवाल की विदाई न हो जाए।




V.K Sharma
Editor in Chief
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