एन.डी.ए को लगा बड़ा झटका , राज्यसभा उपसभापति पद के लिए प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने उन दावों को खारिज किया !
लोक लेखा समिति यानि पीएसी सदस्य की दो सीटों के लिए ये चुनाव हुआ था. चुनाव में राज्यसभा के कुल 245 सदस्यों में से 205 सदस्यों ने मतदान किया. मतदान के बाद एनडीए के उपसभापति पद के उम्मीदवार हरिवंश को मात्र 26 वोटों से ही संतोष करना पड़ा.
चंडीगढ़ (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा :राज्यसभा के उपसभापति पद के लिए होने
वाले चुनाव से ठीक पहले नेशनल डेमोक्रेटिक अलायंस (एनडीए) को एक झटका लगा है. संसद
की सबसे अहम लोक लेखा समिति के राज्यसभा कोटे से सदस्य बनने के लिए कल हुए चुनाव
में शिरोमणि अकाली दल के सांसद प्रेम सिंह चंदूमाजरा ने उन दावों को खारिज किया है
जिसमें कहा जा रहा था कि पार्टी ने राज्यसभा उपसभापति पद के लिए दावा किया था।
उन्होंने कहा कि वह एनडीए गठबंधन का हिस्सा हैं, जो भी गठबंधन का फैसला होगा वह शिअद को मान्य है। बता दें, इससे पूर्व चर्चाएं थी कि भाजपा ने राज्यसभा के उप सभापति पद के लिए अपने
गठबंधन सहयोगी शिरोमणि अकाली दल के दावे को खारिज कर दिया है। शिअद ने सुखदेव सिंह
ढींडसा और नरेश गुजराल के दो सदस्यीय पैनल में से किसी एक के नाम पर विचार करने का
प्रस्ताव दिया था, लेकिन इसे भाजपा ने इसे खारिज कर दिया। इस बात
को चंदूमाजरा ने खारिज कर दिया है। बताया जा रहा था कि अस्वीकृति पर उलझन के चलते
शिअद अध्यक्ष सुखबीर बादल ने अकाली संसदीय समूह की एक बैठक बुलाई है। यहां तक कहा
जा रहा था कि शिअद राज्यसभा के उपसभापति के चुनाव के लिए मतदान का बहिष्कार कर
सकता है।लोक लेखा समिति के राज्यसभा कोटे से खाली पड़े दो
सदस्यों की जगह के लिए सोमवार को चुनाव करवाना पड़ा क्योंकि सत्ता पक्ष और विपक्ष
के बीच सहमति नहीं बन पाई और दो सीटों के लिए तीन उम्मीदवार खड़े हो गए. आमतौर पर
समिति के सदस्यों का चयन आम सहमति से हो जाया करता है लेकिन आखिरी दो सदस्यों के
लिए नामों पर सहमति नहीं बन पाई और तीन लोगों ने दावा ठोंक दिया. विपक्ष के
सूत्रों ने दावा किया कि उनकी तरफ़ से बीजेपी को ये प्रस्ताव दिया गया था कि एक सीट
सत्तापक्ष और एक सीट विपक्ष को दे दिया जाए. लेकिन बात नहीं बन पाई. चुनाव के बाद
सीएम रमेश और भूपेंद्र यादव लोक लेखा समिति के सदस्य चुन लिए गए. राज्यसभा के उपसभापति पद
के चुनाव के ऐन पहले आए इस नतीजे ने सरकार की चिंताएं ज़रूर बढ़ा दी होंगी. सरकार के
प्रबंधक तर्क़ तो दे रहे हैं कि चुनाव में केवल 205 वोट पड़े और उनके कई सदस्यों
ने वोट नहीं किया. लेकिन टीडीपी उम्मीदवार को मिले 110 वोट एनडीए के मैनेजरों के
लिए ख़तरे की घन्टी बज गई होगी. राज्यसभा के संख्याबल से साफ़ है कि उपसभापति पद के
चुनाव में कांटे की टक्कर होगी और हर एक वोट क़ीमती होने वाला है.लोक लेखा समिति का चौंकाने वाला परिणाम तब
आया है जब एनडीए के सबसे पुराने घटक दलों में शामिल अकाली दल की नाराजगी की खबरें
आ रही हैं . उपसभापति पद के लिए जेडीयू के सांसद को उम्मीदवार बनाए जाने से अकाली
दल खुश नहीं है क्योंकि इस पद पर पहले से पार्टी सांसद नरेश गुजराल का नाम चल रहा
था. ऐसी भी संभावना है कि अगर नाराजगी बरक़रार रहती है तो पार्टी उपसभापति के चुनाव
पर मतदान में शामिल नहीं होगी. वहीं शिवसेना को लेकर भी कुछ नहीं कहा जा सकता है. लोक
लेखा समिति में 22 सदस्य होते हैं जिनमें 15 लोकसभा के और 7 राज्यसभा के सदस्य होते हैं. संसदीय समितियों
में इसे सबसे अहम और शक्तिशाली माना जाता है. समिति का मुख्य काम सीएजी द्वारा दी
गई रिपोर्टों की समीक्षा करना होता है. इसके अलावा समिति स्वतः भी सरकारी खर्चे और
आमदनी से जुड़े मुद्दों की समीक्षा करती है. समिति के अध्यक्ष परम्परागत तौर पर
लोकसभा में सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी का कोई सदस्य होता है और सदस्यों का चयन आमतौर
पर आमसहमति से ही होता है. कांग्रेस सांसद मल्लिकार्जुन खड़गे फिलहाल इस समिति के
अध्यक्ष हैं. समिति का गठन एक साल के लिए होता है और हर साल इसका पुनर्गठन होता
है.