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राष्ट्रीय
By   V.K Sharma 06/08/2018 :15:58
हिन्दू मुस्लिम भाईचारे को बढ़ावा देते हुए सेना के जवानों का कहना है की दिवाली में अली और रमजान में राम आते है सेना को सर्वधर्म स्थल देने वाली जेके लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट !
 

 

 श्रीनगर (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा :   देश में एक ही रेजिमेंट है, जो किसी एक ही राज्य के जवानों से मिलकर बनी है- जम्मू-कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट। रेजिमेंट इस साल 70 बरस की हुई है। रेजिमेंट के सभी 15000 जवान जम्मू-कश्मीर से ही हैं। यह देश की इकलौती रेजिमेंट है जो यहीं के लोगों ने मिलकर खड़ी की थी। 1972 में भारतीय सेना का हिस्सा बनी यह रेजिमेंट 1947 में कबायलियों को खदेड़ने के लिए तैयार की गई थी। तब नाम था जम्मू एंड कश्मीर मिलिशिया। 1976 में नया नाम मिला- जम्मू-कश्मीर लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट। सेना में सर्वधर्म स्थल की शुरुआत भी इसी रेजिमेंट ने की। सर्वधर्म स्थल यानी वो जगह जहां मंदिर, मस्जिद और गुरुद्वारा एक ही जगह पर होता है। सभी धर्म के जवान-अफसर एक साथ पूजा, नमाज या अरदास करते हैं। रेजिमेंट में 50% मुसलमान और 50% बाकी धर्म के लोग हैं, जिनमें डोगरा और बौद्ध प्रमुख हैं। मिलकर रहने का ऐसा रिवाज कि मंगलवार को यहां किसी के लिए नॉनवेज नहीं बनता। वजह- डोगरे इस दिन नॉनवेज से परहेज करते हैं। सभी ऑफिसर रमजान में रोजे रखते हैं, फिर चाहे वो किसी भी धर्म के हों। दुर्गापूजा में अगर पंडित जी छुट्टी पर हों तो मौलवी साहब ही आरती करवाते हैं। दीपावली पर मुसलमान जवान सारे काम का जिम्मा लेकर हिंदू साथियों को छुट्टी पर भेज देते हैं। पिछले साल 6-7 जून को जेके लाइट इंफेंट्री की चौथी बटालियन उड़ी में तैनात थी। लांस नायक बाथर हुसैन को कुछ आतंकी दिखे। मेजर विजयंत बिष्ट टीम लीडर थे। आतंकियों और सेना की मुठभेड़ हुई। एक जवान घायल हुआ। लांस नायक हुसैन के कवर फायर में मेजर विजयंत नीचे लेटकर घायल जवान को सुरक्षित निकाल लाए। आतंकी भाग निकले पर मेजर बिष्ट ने 48 घंटे तक सर्च ऑपरेशन जारी रखा। आखिर बिष्ट और बाथर की टीम ने दोनों आतंकियों को मार गिराया। इस वीरता के लिए मेजर विजयंत बिष्ट को कीर्ति चक्र और लांस नायक बाथर हुसैन को शौर्य चक्र दिया गया। ले. जन सतीश दुआ जेके लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट के कर्नल ऑफ रेजिमेंट हैं। ले. जन दुआ रेजिमेंट के पहले ऑफिसर हैं, जो कोर कमांडर और आर्मी कमांडर बने। बुरहान वानी एनकाउंटर के बाद बिगड़े हालात संभालना और सफल सर्जिकल स्ट्राइक कराना उनका बड़ा अचीवमेंट रहा।

 

जेके मिलिशिया से इंफेंट्री रेजिमेंट तक : दिसंबर 1972- रेगुलर आर्मी का दर्जा मिला , मई 1974- कर्नल ऑफ रेजिमेंट बनाए गए , 1976- जेके मिलिशिया से जेके लाइट इंफेंट्री रेजिमेंट नाम हुआ।

 

रेजिमेंट के तीन नायक : नायब सूबेदार बाना सिंह को परमवीर चक्र, लेफ्टिनेंट त्रिवेणी सिंह को अशोक चक्र और नायब सूबेदार चुन्नी लाल को अशोक चक्र, वीर चक्र और सेना मेडल।

 



V.K Sharma
Editor in Chief
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