कुछ गाने ऐसे होते है जिनको को हम गुनगुनाते है पर उनका शाब्दिक अर्थ पता नही होता बस वो गीत सुनने में ओर गाने में अच्छा लगता है। आइये हम आपको बतलाते है वर्ष 1955 में राजकपूर और नर्गिस अभिनीत फ़िल्म श्री 420 का एक बेहद लोकप्रिय गीत है
रमैया वस्तावैया का असली अर्थ आपके दिल
को छू लेगा
न्यूज़ ग्राउंड (नई दिल्ली) सुजाता मिश्रा :कुछ गाने
ऐसे होते है जिनको को हम गुनगुनाते है पर उनका शाब्दिक अर्थ पता नही होता बस वो गीत
सुनने में ओर गाने में अच्छा लगता है। आइये हम आपको बतलाते है वर्ष 1955 में राजकपूर और नर्गिस अभिनीत फ़िल्म श्री 420 का एक बेहद लोकप्रिय
गीत है "रमैया वस्तावैया - रमैया वस्तावैया - मैंने दिलतुझको दिया" का असली अर्थ... क्या आप जानते हैं इस गीत में "रमैया वस्तावैया एक लोकप्रिय तेलगू उद्धरण है
और क्या आप इस उद्धरण का अर्थ जानते हैं? "राम" तो तेलगू भाषा ही क्या क्या समस्त देश -दुनियाँ मे एक लोकप्रिय और सुप्रसिद्ध नाम है
और विशेषण भी है। "अइय्या" का इस्तेमाल तेलगू में पुल्लिंग(पुरूष) के प्रति
प्रेम और सम्मान हेतु प्रयोग किया जाता है ,जबकि ''वस्तावैया" का अर्थ हुआ क्या तुम आओगे? अथवा तुम कब आओगे?
राम +अइय्या +वस्तावैया = रमैया वस्तावैया -- राम तुम कब आओगे? अथवा
राम तुम आओगे?
भक्तिकाल से ही महाराष्ट्र मेंतेलगूभाषी द्रविड़ जनसंख्या भी बड़े पैमाने पर मौजूदहै , जिनमे मछुआरे भी शामिल हैं। सम्भवतः इसी
द्रविड़ प्रभाव के चलते गीतकार शैलेंद्रने
इस उद्धरण का प्रयोग किया, रोचक तथ्य यह है कि शैलेन्द्र खुद मूलतः रावलपिंडी से
थे,जो कि अब पाकिस्तान अधिकृत पंजाब में है।