घुसकांड में फसे सीबीआई के स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना और आलोक वर्मा, सीबीआई ने किया दोनों को निलंबित , जल्द कर सकती है इनसे से पूछताछ !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : देश की सबसे बड़ी जांच
एजेंसी सीबीआई के बीच चल रही कलह अब सबके सामने है. घूसकांड मुद्दे को लेकर शीर्ष
अधिकारियों में चल रही जंग के कारण सीबीआई की किरकरी हो रही है. इस विवाद के बीच
सरकार की तरफ से सीबीआई के दोनों शीर्ष अधिकारी सीबीआई डायरेक्टरआलोक वर्मा और स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना
को छुट्टी पर भेज दिया गया है. इस फैसले को सरकार का इस मुद्दे पर बड़ा एक्शन माना
जा रहा है. अपने ही विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ घूस लेने के आरोप में
दर्ज सीबीआई की एफआईआर रद्द नहीं की जाएगी। हालांकि, दिल्ली हाईकोर्ट ने
उन्हें गिरफ्तारी से फौरी राहत दे दी है। हाईकोर्ट ने मंगलवार को सीबीआई को
अस्थाना के खिलाफ शुरू की गई आपराधिक कार्रवाई पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश
दिया है। साथ ही स्पष्ट किया कि अस्थाना के खिलाफ जारी जांच पर कोई रोक नहीं है।
अस्थाना ने सीबीआई की एफआईआर को हाईकोर्ट में चुनौती दी है। मामले की अगली सुनवाई
29 अक्तूबर को होगी।सोमवार को गिरफ्तार
सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार ने भी हाईकोर्ट के जस्टिस नजमी वाजिरी के समक्ष
याचिका दायर की। कुमार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता दयान कृष्णन कुमार ने डीएसपी के
खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं करने का निर्देश देने का आग्रह किया, लेकिन अदालत ने केवल
अस्थाना के मामले में यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया। अदालत ने कहा कि अगले
आदेश तक अस्थाना के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया जाए। अदालत ने सीबीआई, निदेशक आलोक वर्मा,
संयुक्त निदेशक एके शर्मा,
कार्मिक व प्रशिक्षण
विभाग (डीओपीटी) को नोटिस जारी कर मामले में जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।
साथ ही अस्थाना और कुमार को मामले से जुड़े रिकॉर्ड व उनके मोबाइल रिकॉर्ड को
सुरक्षित रखने का निर्देश दिया है। बता दें कि देश की सर्वश्रेष्ठ जांच एजेंसी कही
जाने वाली सीबीआई में टॉप बॉस और सेकेंड बॉस के बीच चल रही कलह अब खुलकर सामने आने
लगी है। दो दिन पहले सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा ने अपने ही स्पेशल डायरेक्टर राकेश
अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज किया था तो वहीं अब अस्थाना ने भी
वर्मा के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। सीवीसी और कैबिनेट सचिव को लिखे अपने पत्र में
राकेश अस्थाना ने कई राज सार्वजनिक किए हैं। उनका कहना है कि आलोक वर्मा मुझे
फंसाने के लिए लंबे समय से तैयारी कर रहे थे। इस परिस्थिति में ज्वाइंट डायरेक्टर
नागेश्वर राव को सीबीआई का अंतरिम डायरेक्टर नियुक्त किया गया है. नागेश्वर राव ने
बुधवार सुबह ही अपना कार्यभार संभाला. नागेश्वर ने पदभार संभालते ही कड़ा एक्शन
लेना शुरू कर दिया है. बुधवार सुबह ही सीबीआई ने अपने दफ्तर के 10वें और 11वें
फ्लोर को सील कर दिया. हालांकि, बाद में उन्हें खोल दिया गया. बता दें कि 11वें फ्लोर पर ही
आलोक वर्मा और राकेश अस्थाना का दफ्तर है. किसी भी व्यक्ति को इन फ्लोर पर जाने की
इजाजत नहीं दी गई है.इस गिरफ्तारी के खिलाफ
देवेंद्र ने हाईकोर्ट में अपनी अर्जी दी है। सीबीआइ के प्रवक्ता अभिषेक दयाल ने
बताया था कि विशेष निदेशक राकेश अस्थाना, एजेंसी के अधिकारी देवेंद्र कुमार, रिश्वत देने में भूमिका
निभाने वाले मनोज प्रसाद और उसके भाई सोमेश के खिलाफ 15 अक्टूबर को मामला दर्ज
किया गया है। मामले में खुफिया संगठन रॉ के विशेष निदेशक सामंत कुमार गोयल का नाम
भी दर्ज किया गया है, लेकिन उन्हें अभियुक्त नहीं बनाया गया है। सीबीआई ने
अस्थाना और कई अन्य के खिलाफ कथित रूप से मांस निर्यातक मोइन कुरैशी से घूस लेने
के आरोप में रविवार को एफआईआर दर्ज की थी। बतादें कि कुरैशी धनशोधन और भ्रष्टाचार
के कई मामलों का सामना कर रहा है। सीबीआई का आरोप है कि दिसंबर 2017 और अक्टूबर
2018 के बीच कम से कम पांच बार रिश्वत दी गई। शनिवार को इस सिलसिले में देवेंद्र
के दिल्ली स्थित आवास पर छापेमारी भी की गई। ये मुकदमे सतीश साना की शिकायत के
आधार पर दर्ज किए गए हैं। साना मांस कारोबारी मोईन कुरैशी से संबंधित मामले में
जांच का सामना कर रहा है। रिश्वतखोरी व अवैध उगाही के आरोपों में फंसे सीबीआई के
उप-अधीक्षक(डीएसपी) देवेंद्र कुमार को अदालत ने सात दिन की रिमांड पर सीबीआई को
सौंप दिया है। इस मामले में सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना का नाम भी सामने
आ रहा है। सीबीआई ने कोर्ट में कहा कि जांच के नाम पर उगाही हो रही थी।पटियाला हाउस स्थित सीबीआई के विशेष न्यायाधीश संतोष स्नेही
मान की अदालत ने सीबीआई अधिकारी पर लगे आरेापों को गंभीर माना। अदालत ने कहा कि यह
बेहद चौंकाने वाली बात है कि देश की सर्वश्रेष्ठ जांच एजेंसी मानी जाने वाली
सीबीआई के अधिकारियों पर जांच के नाम पर अवैध उगाही का गिरोह चलाने जैसे गंभीर
आरोप लगे हैं। इससे पहले कोर्ट में सीबीआई ने डीएसपी देवेंद्र को दस दिन की हिरासत
पर देने की मांग की।सीबीआई का कहना था कि
देवेंद्र कुमार के घर और कार्यालय से आपत्तिजनक दस्तावेज बरामद हुए हैं। इन
दस्तावेजों की छानबीन करनी है। सीबीआई ने अदालत में यह भी कहा कि उन्हें ऐसे
साक्ष्य मिले हैं जिससे आरोपी देवेंद्र के अवैध वसूली के गिरोह में शामिल होने के
तथ्य मिल रहे हैं। सीबीआई का कहना था कि एक बड़े गिरोह के इसमें शामिल होने के
संकेत हैं। आरोपी देवेंद्र को हिरासत में लेकर व प्रत्येक आरोपी की भूमिका की जांच
करना चाहते हैं। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने अपने मुवक्किल पर झूठे आरोप लगने की
दलील देते हुए हिरासत का विरोध किया। अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी
देवेंद्र कुमार को सात दिन की हिरासत पर सीबीआई को सौंपने के निर्देश दिए हैं। आरोपी
अधिकारी देवेंद्र कुमार के वकील राहुल त्यागी की तरफ से अदालत में जमानत याचिका
दाखिल की गई। इस याचिका में कहा गया कि उनके मुवक्किल को झूठे मामले में फंसाया
गया है। अभी सीबीआई के पास ऐसे कोई साक्ष्य नहीं है। वह बड़े स्तर का अधिकारी है।
उनका मामले की जांच से भागने की कोई संभावना नहीं है। साथ ही यह भी कहा गया कि
उनके मुवक्किल को गिरफ्तार करने से पहले भ्रष्टाचार रोकथाम कानून की धारा 17 के
तहत प्राधिकृत अधिकारी से मंजूरी नहीं ली गई है। साथ ही इसमें यह भी कहा गया कि
कोई पुलिस अधिकारी सरकारी कर्मचारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की जांच नहीं कर सकता। हालांकि
अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया। अदालत ने कहा कि अभी मामले में जांच चल रही
है। इसलिए इस स्तर पर मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं है। इसके बाद बचाव पक्ष ने
जमानत याचिका पर सुनवाई पर जोर नहीं दिया।सीबीआई ने आरोपी अधिकारी
देवेंद्र कुमार की जमानत याचिका का विरोध करते हुए दलील दी कि लगातार आरोपी व उससे
जुड़े लोगों के यहां तलाशी अभियान जारी है। कुछ महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद हुए
हैं। जिनके आधार पर देर शाम तक इस मामले में अतिरिक्त गंभीर आरोप जोड़े जा सकते
हैं। उसी के हिसाब से आरोपी की जमानत याचिका पर विचार किया जाना चाहिए।