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अन्तरराष्ट्रीय
By   V.K Sharma 15/03/2019 :11:08
जल-वायु का बढ़ता प्रदूषण 2050 तक हो जाएगा घातक
 
नई दिल्ली दुनिया में बढ़ते प्रदूषण के कारण हवापानी बुरी तरह प्रभावित हो रहा है और इसके कारण यह जनलेवा बनता जा रहा है। इसका अंदाजा इस बात से आसानी से लगाया जा सकता है कि हर साल दुनियाभर में करीब 9 मिलियन (90 लाख) लोगों की मौत हो जाती है। इसी सिलसिले में संयुक्त राष्ट्र ने पर्यावरण खराब होने के विनाशकारी परिणामों से मानवता को बचाने के लिए तत्काल कार्रवाई का आह्वान किया।

संयुक्त राष्ट्र ने एक रिपोर्ट जारी करते हुए चेतावनी दी कि अगर अभी भी सभी देशों ने एकजुट होकर पर्यावरण को बचाने के लिए सख्त कदम नहीं उठाए तो एशिया, पश्चिमी एशिया और अफ्रीका के शहरों व क्षेत्रों में 2050 तक लाखों लोगों की अकाल मृत्यु हो सकती है। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि 2050 तक जल प्रदूषण ही मौतों का अकेला कारण बन जाएगा। फ्रेश वॉटर सिस्टम प्रदूषकों की वजह से कीटाणु प्रतिरोधक हो जाएंगे। इसकी वजह से न सिर्फ लोगों की अकाल मृत्यु होगी बल्कि पुरुषों और महिलाओं की प्रजनन क्षमता पर भी बुरा असर डालेगा। भारत सहित 70 से अधिक देशों के 250 वैज्ञानिकों और विशेषज्ञों ने यह रिपोर्ट बनाई, जिसे केन्या के नैरोबी में चल रही संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण सभा के दौरान पेश किया गया।

इस रिपोर्ट में अमीर देशों द्वारा बर्बाद किए जाने वाले फूड वेस्टेज के चौंकाने वाले आंकड़े भी पेश किए गए, जबकि गरीब देश अपनी आबादी को खिलाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। वर्तमान में, ग्लोबल एडिबल फूड (खाने योग्य भोजन) का एक तिहाई हिस्सा बर्बाद हो जाता है। इस बर्बादी का 56 फीसदी हिस्सा औद्योगिक देशों में होता है।



V.K Sharma
Editor in Chief
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