मसूद अजहर पर चीन मेहरबान , वीटो से बचाया ग्लोबल आतंकी घोषित होने से यूएनएससी के सदस्य देश नाराज, कहा-उठा सकते हैं 'दूसरा कदम' !
नई दिल्ली (न्यूज ग्राउंड) आकाश मिश्रा : पुलवामा आतंकी हमले के बाद आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के प्रस्ताव पर चीन ने एक बार फिर से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में अड़ंगा लगा दिया है। यह चौथा मौका था, जब चीन ने वीटो पावर का इस्तेमाल कर प्रस्ताव को गिरा दिया, लेकिन इस बार सुरक्षा परिषद के सदस्य अन्य विकल्पों पर भी विचार कर सकते हैं। चीन ने इस प्रस्ताव का विरोध किया, लेकिन भारत के लिए यह बड़ी बात है कि अन्य 4 स्थायी सदस्यों, अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और रूस, ने मसूद पर बैन का समर्थन किया। सुरक्षा परिषद के जिम्मेदार सदस्यों ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि वह अपनी इस नीति पर ही कायम रहता है तो भी अन्य कार्रवाइयों पर विचार किया जा सकता है। सुरक्षा परिषद के एक डिप्लोमैट ने चीन को चेतावनी देते हुए कहा, 'यदि चीन इस प्रस्ताव को रोकने की नीति जारी रखता है तो अन्य जिम्मेदार सदस्य सुरक्षा परिषद में अन्य ऐक्शन लेने पर मजबूर हो सकते हैं। ऐसी स्थिति पैदा नहीं होनी चाहिए।' अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा, 'संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति के विचार-विमर्श गोपनीय हैं, हम किसी विशिष्ट मामलों पर टिप्पणी नहीं करते हैं। लेकिन हम यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबंध समिति के साथ काम करना जारी रखेंगे ताकि पदनाम सूची को अपडेट और सटीक बनाया जा सके। चीन के संबंध में, संयुक्त राज्य अमेरिका और चीन क्षेत्रीय स्थिरता और शांति प्राप्त करने के लिए आपसी हित साझा करते हैं, मसूद अजहर को आतंकी घोषित न किया जाना इस लक्ष्य के उलट है। यदि इसी तरह चीन अजहर को बचाता रहा तो सुरक्षा परिषद् के अन्य सदस्यों को सख्त रुख अपनाने पड़ेंगे। लेकिन हालात को यहां तक नहीं आना चाहिए। वहीं एक अन्य दूत ने चीन को असामान्य कड़ी चेतावनी देते हुए समाचार एजेंसी ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा, ‘‘ यदि चीन इस कार्य में बाधा पैदा करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं। एक अन्य दूत ने एक प्रश्न के जवाब में कहा, ‘‘चीन ने चौथी बार सूची में अजहर को शामिल किए जाने के कदम को बाधित किया है। चीन को समिति को अपना वह काम करने से रोकना नहीं चाहिए, जो सुरक्षा परिषद ने उसे सौंपा है।’’ अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमैन ने चीन के इस कदम को अस्वीकार्य करार दिया और कहा, ‘‘ चीन ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र को उस जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने से रोक दिया, जिसने फरवरी में भारत में पुलवामा हमला किया था। मैं चीन से अपील करता हूं कि वह संयुक्त राष्ट्र को अजहर पर प्रतिबंध लगाने दे।’’ गौरतलब है कि मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिश को बुधवार को उस समय एक और झटका लगा जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसे वैश्विक आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी। फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘‘1267 अल कायदा सैंक्शन्स कमेटी’’ के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश किया था। गौरतलब है कि 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था, जिसमें 40 जवानों की मौत हो गई थी। इस हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है।डिप्लोमैट ने नाम उजागर न करने की शर्त पर कहा कि चीन की ओर से मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के प्रस्ताव पर अड़ंगे के बाद अन्य सदस्यों की यही राय है। इससे पहले भी चीन ने तीन बार मसूद अजहर को ग्लोबल टेररिस्ट घोषित करने के प्रस्ताव पर वीटो का इस्तेमाल कर अड़ंगा लगाया था। भारत में अमेरिकी दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सेंक्शंस कमिटी की सिफारिशों पर खुली चर्चा नहीं की जा सकती है। लेकिन, हम कहना चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की प्रतिबंध सूची में आतंकियों के नाम शामिल कराने के लिए प्रयास जारी रहेंगे। संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में होने वाला विचार- विमर्श गोपनीय होता है और इसलिए सदस्य देश सार्वजनिक रूप से इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते। इसलिए दूतों ने भी अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने का आग्रह किया। हेरिटेज फाउंडेशन के जेफ स्मिथ और अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सदानंद धूमे समेत अमेरिकी थिंक टैंक के कई सदस्यों ने भी चीन के इस कदम की निंदा की।