प्रधानमंत्री मोदी को 'संयुक्त राष्ट्र चैंपियंस ऑफ द अर्थ' पुरस्कार से नवाजा , मोदी बोले- ये किसानों का है ये सम्मान !
नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) आकाश मिश्रा : पर्यावरण के क्षेत्र में
ऐतिहासिक कदम उठाने के लिए संयुक्त राष्ट्र (UN) ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र
मोदी को संयुक्त राष्ट्र के सर्वोच्च पर्यावरण पुरस्कार ‘चैंपियंस ऑफ अर्थ’
से सम्मानित किया गया है.
स्थायी विकास एवं जलवायु बदलाव के क्षेत्र में अनुकरणीय नेतृत्व और सकारात्मक कदम
उठाने के लिए पीएम मोदी को इस पुरस्कार से सम्मानित किया गया. पीएम मोदी के साथ
फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को भी इस पुरस्कार के लिए चुना गया है. यूएन
महासचिव एंतोनियो गुतारेस पीएम मोदी को यह अवॉर्ड देने खुद दिल्ली पहुंचे हैं. इस अवॉर्ड
के लिए पीएम मोदी ने यूएन और भारतीय जनता के प्रति आभार जताया.इस दौरान विदेश मंत्री सुषमा स्वराज भी वहां पर
उपस्थित रहीं. कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि भारत हमेशा
प्रकृति को मां के रूप में देखता है. उन्होंने कहा कि ये भारत के आदिवासी, किसान और मछुआरों का
सम्मान है. इन सभी के लिए भी जीवन प्रकृति के अनुसार ही चलता है. PM ने कहा कि ये भारत की
नारी का सम्मान है, जो पौधों का ख्याल रखती हैं. पीएम मोदी ने कहा कि क्लाइमेट
की चिंता जबतक कल्चर से नहीं होगी, इस समस्या को खत्म कर पाना मुश्किल है. हमने प्रकृति को
सजीव माना है. पर्यावरण के प्रति भारत की संवेदना को आज विश्व स्वीकार कर रहा है,
लेकिन ये हज़ारों वर्षों
से हमारी जीवन शैली का हिस्सा रहा है. PM बोले कि आज हमारे देश में गरीबों की संख्या घट रही है,
गरीबी रेखा से लोग ऊपर उठ
रहे हैं.उन्होंने कहा कि आबादी को
पर्यावरण पर, प्रकृति पर अतिरिक्त दबाव डाले बिना, विकास के अवसरों से
जोड़ने के लिए सहारे की आवश्यकता है, हाथ थामने की ज़रूरत है. विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस
कार्यक्रम में कहा कि देश के लिए गौरव का दिन है. जब पेरिस समझौते से कुछ विकसित
देशों ने बाहर निकलने की बात की, तब पीएम मोदी ने कहा था कि भारत ने पेरिस समझौते पर
हस्ताक्षर किसी दबाव में नहीं किया था. जब हमारी सरकार आई तो पीएम ने जलवायु
परिवर्तन पर समिति बनाई थी, पूरी सभा दो भाग में बंट गई थी. एक तरफ पर्यावरण वाले और
दूसरी तरफ विकास वाले थे. पर्यावरण वाले प्रकृति को नुकसान पहुंचाने वाले विकास का
विरोध किया. सुषमा ने कहा कि पीएम मोदी के विजन की वजह से ही 17.19 पैसे वाली ऊर्जा (सौर
ऊर्जा) आज आम आदमी को 2 रुपये प्रति यूनिट के हिसाब से मिल रही है. यूएन चीफ
एंटोनियो गुटेरेस ने कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक
ऐतिहासिक कदम उठाया है, जो दुनिया को राह दिखा रहा है. पेरिस समझौता दुनिया के लिए
जरूरी है, लेकिन कुछ देश उसे पूरा
नहीं कर रहे हैं. ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में भारत इसमें
अगुवाई कर रहा है. यूनाइटेड नेशन के अनुसार, फ्रांस के राष्ट्रपति
मैक्रों को पर्यावरण के लिए वैश्विक समझौते करने और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 2022
तक प्लास्टिक का इस्तेमाल
पूरी तरह खत्म करने की शपथ के लिए यह सम्मान दिया गया है. प्रधानमंत्री मोदी को
अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन की पैरवी के लिए अग्रणी कार्यों तथा 2022 तक एकल उपयोग वाली सभी
तरह की प्लास्टिक को भारत से हटाने के संकल्प के कारण नेतृत्व श्रेणी में चुना गया
है. वार्षिक ‘‘चैम्पियंस आफ अर्थ’’ पुरस्कार सरकार, सिविल सोसाइटी एवं निजी
क्षेत्र में ऐसे असाधारण नेताओं को दिया जाता है जिनके कदमों से पर्यावरण पर
सकारात्मक प्रभाव पड़ा है.