दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड ) 2009 से 2018 के बीच पाकिस्तान पर विदेशी क़र्ज़ 50 फ़ीसदी बढ़ने के कारण इस देश की अर्थव्यवस्था इन दिनों चरमराई स्थिति में पहुँच चुकी है, आईएमएफ के अनुसार पाकिस्तान पर क़र्ज़ का बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।पाकिस्तान का व्यापारिक क्षेत्र इनदिनों उस संकट के दौर से गुजर रहा है ,जहां सब कुछ खत्म होने की कगार पर स्थित है ,अंतरराष्ट्रीय बाजार में पाकिस्तान अपना विश्वास खोता जा रहा है , पाकिस्तान पर एक बहुत बढ़ी मुसीबत आ गई है।
पाकिस्तानी मुद्रा अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार अपना मूल्य खो जा रही है जिसके कारण वहां वित्तीय संकट पैदा हो गया है।विश्व बैंक ने अक्टूबर महीने में पाकिस्तान को चेतावनी दी थी कि उसे कर्ज भुगतान और करंट अकाउंट घाटे को पाटने के लिए इस साल 17 अरब डॉलर की जरूरत पड़ेगी ,जबकि पाकिस्तान आज इस स्थिति में नही है कि इस कर्ज़ से मुक्ति पा सके ,खबरें आ रही है कि आने वाले 10 दिनों मेें पाकिस्तान कंगाल हो जाएगा। फाइनेंशियल टाइम्स के मुताबिक पाकिस्तान के पास जितनी विदेशी मुद्रा है वो 10 हफ़्तों की आयात के बराबर है। इसके बाद पाकिस्तान का खजाना खाली हो जाएगा। रिपोर्ट के अनुसार विदेशों में नौकरी कर रहे पाकिस्तानी देश में जो पैसे भेजते थे उसमें भी गिरावट आई है।
इसके साथ ही पाकिस्तान का आयात बढ़ा है और चाइना पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर में लगी कंपनियों को भारी भुगतान के कारण भी विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो रहा है। चीन पाकिस्तान कॉरिडोर 60 अरब डॉलर की महत्वाकांक्षी परियोजना है। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार आर्थिक संकट से उबरने के लिए पाकिस्तान सरकार चीन से करीब 68-135 अरब रुपए कर्ज लेने जा रही है। अगर ऐसा हुआ तो इस साल जून में पाकिस्तान चीन का 5 अरब डॉलर का कर्जदार हो जाएगा। आर्थिक रूप से परेशान पाकिस्तान की स्थिति इस बात से समझी जा सकती है कि पिछले साल मई में उसके पास 16.4 अरब डॉलर विदेशी मुद्रा भंडार था जो बीते हफ्ते कम होकर 10.3 अरब डॉलर तक पहुंच गया है
पाकिस्तान पर आर्थिक संकट के कारण
दरअसल अमरीका ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को आर्थिक सहायता देना बंद कर दिया है। इसकी वजह से आर्थिक रूप से पाकिस्तान कमजोर हो चुका है। पाकिस्तान के चालू खाते भी लगातार घाटे में हैं। इसके अलावा विदेशी मुद्रा भंडार में भी भारी गिरावट आई है। इसकी वजह से पाकिस्तान कंगाल होने के कगार पर पहुंच चुका है