शिव-गंगा के बाद अब राम लला की शरण में , तय कार्यक्रम के तहत प्रियंका रोड शो शुरू करने से पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी जानें अयोध्या दौरे के सियासी मायने !
लखनऊ(न्यूज़ ग्राउंड)आकाश मिश्रा : कांग्रेस महासचिव और पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी अमेठी और रायबरेली के दौरे के बाद अयोध्या में होंगी। उनके इस दौरे को इसलिए अहम बताया जा रहा है कि क्योंकि कांग्रेस का कोई बड़ा करीब चार साल बाद अयोध्या की यात्रा कर रहा है। इस दौरे पर राजनीतिक दलों की निगाह टिकी है कि अयोध्या पहुंचने के बाद वो राम मंदिर पर क्या बयान देती है। बीजेपी लगातार आरोप लगाती रही है कि कांग्रेस की वजह से ही राम मंदिर निर्माण में मुश्किलें आ रही हैं। राम मंदिर निर्माण पर कांग्रेस का कहना है कि देश में सामाजिक समरसता को बनाए रखने के लिए इस मुद्दे का हल बातचीत या अदालत है। बता दें कि राम मंदिर के संबंध में अदालत ने मध्यस्थों की नियुक्ति की है। प्रियंका गांधी के दौरे को मध्य यूपी में कांग्रेस की तैयारी से भी जोड़कर देखा जा रहा है। अगर मध्य यूपी या अवध इलाके की बात करें तो सिर्फ कांग्रेस का रायबरेली और अमेठी पर कब्जा है। यह इलाका परंपरागत तौर पर कांग्रेस के कब्जे में रहा है। लेकिन बीएसपी और एसपी के मजबूत होने के बाद कांग्रेस इन इलाकों से सिमट गई। अयोध्या में प्रियंका रोड शो और नुक्कड़ सभा करेंगी. रोड शो से पहले वह हनुमान गढ़ी मंदिर जाकर दर्शन-पूजन कर संतों का आशीर्वाद भी लेंगी. पहले प्रयागराज से वाराणसी तक गंगा यात्रा और अब विवादित राम जन्मभूमि अयोध्या की यात्रा. कांग्रेस की पूर्वी उत्तर प्रदेश की प्रभारी प्रियंका गांधी अपने क्षेत्रों की यात्रा में व्यस्त हैं, लेकिन बड़ा सवाल ये है कि ये यात्राएं केवल यात्राएं हैं, या फिर इनके कोई राजनीतिक मायने भी हैं?जहां उनकी गंगा यात्रा का उद्देश्य राज्य की अधिकतर पिछड़ी जातियों को संदेश भेजना था वहीं लगता है कि अयोध्या यात्रा को पार्टी की 'मिशन 30' योजना के तहत आने वाली कुछ चुनिंदा सीटों पर डायरेक्ट इलक्ट्रोल एक्शन के रूप में योजनाबद्ध किया गया है.पार्टी ने गांधी के लिए दिल्ली से अयोध्या तक ट्रेन यात्रा की योजना बनाई थी, उन्हें सड़क के रास्ते सुल्तानपुर होते हुए अमेठी जाना था. हालांकि, बाद में यह योजना बदल दी गई पार्टी नेता ने बुधवार को लखनऊ के लिए उड़ान भरी और सड़क मार्ग से अमेठी की यात्रा जारी रखी. वह अमेठी में कैंप लगाएंगी और अपने भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र में पार्टी कार्यकर्ताओं से मिलेंगी. शुक्रवार को वह सड़क मार्ग से सुल्तानपुर होते हुए अयोध्या पहुंचेगी. रास्ते में वह स्थानीय निवासियों से मिलेंगी और विभिन्न मुद्दों पर बात करेंगी.लेकिन आम आदमी नब्ज टटोलने की इस पहल से परे, लखनऊ से बाराबंकी और उसके बाद अयोध्या, सुल्तानपुर और अमेठी ऐसे क्षेत्र हैं जो पार्टी के 'मिशन 30' की रणनीति के तहत आते हैं.2009 के चुनाव में कांग्रेस ने इस क्षेत्र की ज्यादातर सीटों पर जीत हासिल की थी. यहां पार्टी का वोट पर्सेंटेज भी बेहतर है. फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र से सटा अयोध्या के नजदीक गोंडा और बहराइच सीट भी पड़ती है. ये दोनों सीटें 2009 के चुनाव में कांग्रेस के खाते में गई थीं.ऐसे में प्रियंका गांधी का अयोध्या दौरा और भी अहम हो जाता है. तय कार्यक्रम के तहत प्रियंका रोड शो शुरू करने से पहले हनुमानगढ़ी मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी. इसे कांग्रेस के 'सॉफ्ट हिंदुत्व' से भी जोड़कर देखा जा रहा है. कांग्रेस शासन काल में ही अयोध्या में राम मंदिर का ताला खोला गया, वहीं बाबरी विध्वंस भी कांग्रेस शासन काल में हुआ. 2016 में राहुल गांधी ने अयोध्या का दौरा किया था. अब प्रियंका 'सॉफ्ट हिंदुत्व' का कार्ड खेलकर वोट में सेंधमारी करने की कोशिश में हैं.बता दें कि प्रियंका से पहले कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी विवादित ढांचा विध्वंस के 26 साल बाद सितंबर 2016 में अपनी अयोध्या यात्रा के दौरान पहली बार हनुमानगढ़ी में दर्शन के लिए पहुंचे थे, जहां उन्होंने संतों का आशीर्वाद भी हासिल किया था. अमेठी में प्रियंका ने पूछा- राहुल जी आते हैं? महिलाएं बोलीं- कौनो नहीं आतअब बात करते हैं फैजाबाद सीट की. 2019 के चुनाव के लिए कांग्रेस ने यहां से निर्मल खत्री को उम्मीदवार बनाया है. खत्री ने यहां से 2009 का चुनाव जीता था, लेकिन 2014 में वह बीजेपी से हार गए. 2009 की तुलना में 2014 में उन्हें 15% वोटों का भारी नुकसान झेलना पड़ा था. इसी तरह सुल्तानपुर में संजय सिंह 2009 का चुनाव जीते. लेकिन, 2014 के आम चुनाव में इस सीट पर कांग्रेस का प्रदर्शन बेहद खराब रहा. पार्टी ने 38% वोट खो दिए. अब 2019 के चुनाव में कांग्रेस ने संजय सिंह को फिर से उम्मीदवार बनाया है.ये भी पढ़ें: कार्यकर्ताओं ने प्रियंका से कहा इसी तरह 2009 के चुनाव में लखनऊ और फैजाबाद के बीच स्थित बाराबंकी के आरक्षित निर्वाचन क्षेत्र से कांग्रेस के पीएल पुनिया ने जीत हासिल की थी. लेकिन, 2014 हालात फिर बदल गए. पुनिया बीजेपी प्रत्याशी से बड़े अंतर से हार गए. इस बार पुनिया के बेटे तनुज इस सीट से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं.गिरि इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल स्टडीज के प्रोफेसर प्रशांत त्रिवेदी कहते हैं, 'प्रयागराज के संगम और वाराणसी में गंगा की यात्रा के पीछे काफी राजनीतिक कोशिशें रहीं. अब अयोध्या में चुनौतियां हैं. कांग्रेस इन इलाकों में पिछले 3 दशकों से अपनी खोई जगह को दोबारा से पाने की पुरजोर कोशिश में जुटी है.'बहरहाल, देखना ये है कि क्या कांग्रेस अपने इस रणनीति में सफल हो पाती है या फिर उसकी किस्मत में कुछ और लिखा है.