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अध्यात्म
By   V.K Sharma 09/05/2020 :19:57
आखिर क्यों लव कुश से हारी अयोध्या की सेना, लक्ष्मण, भरत भी हुए अचेत !
 

नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : लव कुश की शक्ति का रहस्य : उत्तर रामामयण में एक प्रसंग है जिसमें भगवान राम के अश्वमेध यज्ञ का घोड़ा लव कुश पकड़ लेते हैं और बाल हठ कर बैठते हैं कि जबतक राम स्वयं नहीं आएंगे तब तक वह घोड़े को नहीं वापस करेंगे। इस बात पर पहले तो लव कुश को घोड़े के रक्षक प्यार से समझाते हैं और घोड़े को छोड़ देने के लिए कहते हैं। लेकिन जब वह किसी भी तरह नहीं मनाते हैं तो रामजी की सेना बल प्रयोग करने लगती है। इसके बाद तो महासंग्राम आरंभ हो जाता है। लव कुश के बाणों से घायल होकर सेनापति अचेत हो जाते हैं। इसके बाद भगवान राम के छोटे भाई शत्रुघ्न सेना लेकर आते हैं और घोड़े को मुक्त करवाने की कोशिश करते हैं लेकिन वह भी अचेत हो जाते हैं।
लव कुश ने किया लक्ष्मणजी को अचेत : शत्रुघ्न के अचेत हो जाने पर लक्ष्मणजी आवेश में आ जाते हैं और अश्व को छुड़ाने सेना लेकर महर्षि बाल्मीकि के आश्रम में आ जाते हैं। लक्ष्मणजी को मेघनाद को पराजित करने का अहंकार हो गया था। इसलिए लव कुश को अपनी शक्ति का बखान करके डराने की कोशिश करते हैं लेकिन लक्ष्मणजी भी युद्ध में अचेत हो जाते हैं। इसके बाद भरतजी का भी यही हाल होता है। अंत में भगवान राम स्वयं आते हैं तब जाकर अश्वमेध का अश्व लव कुश छोड़ते हैं। क्या आपके मन में यह सवाल नहीं उठता है कि लव कुश ने आखिर कैसे लक्ष्मण और भरतजी को भी पराजित कर दिया।
देवी सीता महाशक्ति : दरअसल लव कुश के विजय के पीछे वही शक्ति काम कर रही थी जिस शक्ति के बल पर भगवान राम और लक्ष्मणजी ने रावण और मेघनाद का अंत किया था। वह शक्ति थीं देवी सीता। देवी सीता को जगत जननी आदि शक्ति का स्वरूप कहा गया है। इन्होंने बचपन में ही अपने एक हाथ से भगवान शिव के दिव्य धनुष को उठा लिया था। इसी को देखकर जनकजी ने स्वयंवर के लिए शिवजी के धनुष पर प्रत्यंचा चढाने की शर्त रखी थी। देवी सीता भगवान राम को मन ही मन पति मान चुकी थीं इसलिए स्वयंवर में देवी सीता की इच्छा के अनुसार भगवान राम धनुष भंग कर पाए।
सीता बन गईं काली : रामेश्वर चरित मिथिला रामायण में लिखा है कि देवी सीता ने रावण वध के बाद कहा कि जो भी सहस्रानंद का वध करेगा वह सही मायने में वीर होगा। भगवान राम अपनी वीरता साबित करने के लिए सहस्रानंद से युद्ध करने लगे लेकिन एक बाण लग जाने से रामजी अचेत हो गए। इस पर देवी सीता क्रोधित हो गईं और उनका रंग सांवला हो गया। देवी के इसी स्वरूप की पूजा मिथिला क्षेत्र दरभंगा में श्यामा काली के रूप में होती है।
लव कुश पर देवी सीता की कृपा : देवी सीता का साथ जब तक राम लक्ष्मण को प्राप्त था तब-तक राम लक्ष्मण ने अपने पराक्रम से चारों दिशाओं में अपने विजय का परचम लहराया। जब माता सीता के पुत्रों पर संकट के बादल मंडराने लगे तब देवी सीता ने अपने पुत्रों का साथ दिया। देवी सीता के आशीर्वाद से लव कुश ने अजेय सेना को भी जीत लिया।



V.K Sharma
Editor in Chief
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