इनके जैसे बेटों पर किसको नहीं होगा नाज , बूढ़े मां-बाप को कंधे पर बैठाकर कांवड़ यात्रा करा रहे पांच भाई !
पंचकूला (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : हरियाणा निवासी चार
भाई अपने बूढ़े मां बाप को कंधे पर बिठाकर कांवड़ यात्रा करा रहे हैं। लोगों को
माता-पिता की सेवा के प्रति जागरूक भी कर रहे हैं। हरियाणा के पलवल जिले के
औरंगाबाद गांव निवासी बंशी लाल, राजू, महेंद्र, जगपाल चारों भाई पिछले 24 वर्ष से कांवड़ यात्रा
करते आ रहे हैं। इस बार वे पिता चंद्रपाल (78), माता रूपवती (65) को कंधे पर लेकर यात्रा
करने निकले हैं। सोमवार को वे ट्रेन से हरिद्वार पहुंचे। मंगलवार को हरकी पैड़ी पर
गंगा स्नान के बाद गंगाजल भरा और पालकी में दोनों को बैठा दिया। इसके बाद वे पालकी
कंधे पर उठाकर हरिद्वार से हरियाणा तक की यात्रा पर निकल गए। बड़े बेटे बंशीलाल का
कहना है कि वे मजदूरी करते हैं। सभी भाइयों की वर्षों से एक ही मन्नत थी कि
मां-बाप को कंधे पर बैठाकर कांवड़ यात्रा कराने की। छोटा बेटा कहता है कि माता-पिता
की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। उन्हें यात्रा के दौरान तेज धूप और बरसात होने की परवाह
नहीं है। जब माता-पिता को यात्रा कराने की मन्नत भगवान भोले शंकर ने पूरी की है तो
यात्रा में भी वही मदद करेंगे। भगवान ने पूरी कर दी। यात्रा में ये भाई बुजुर्ग
माता-पिता की सेवा करने और उनके साथ खुशी से रहने का संदेश भी देते जा रहे हैं।
यात्रा हरिद्वार से शुरू होकर वापस हरियाणा के पलवल में सम्पन्न होगी पलवल के ये
पांच भाई हरिद्वार से कांवड़ पर गंगाजल के साथ-साथ चलने-फिरने में असमर्थ अपने
माता-पिता को पालकी में लेकर पैदल पंचकूला के मनसा देवी मंदिर तक पहुंचे। वहां
उन्हों ने मनसा देवी मंदिर में स्थित शिवालय में माता-पिता के संग भगवान भोले शंकर
का जलाभिषेक किया। ऐसा वे दो साल से कर रहे हैं। पिछले साल भी वे इसी तरह
माता-पिता को लेकर हरिद्वार से कांवड़ लेकर आए थे। बता दें कि भगवान शंकर में
आस्था रखने वालों के लिए सावन का महीना सबसे पवित्र होता है। इस महीने शिव भक्त
गंगा से जल भर कर पैदल चलते हुए देश भर के शिवालयों में जल चढ़ाते हैं। ऐसे ही शिव
भक्तों में हरियाणा के पलवल के रहने वाले पांच भाई और उनके माता-पिता भी शामिल
हैं। माता-पिता 78 साल के पिता चंद्रपाल व 66 वर्ष की मां रूपवती भी
कांवड़ लेकर हरिद्वार से गंगाजल लाना चाहते थे, लेकिन चारों भाई
माता-पिता और अन्यपरिजनों के साथ कांवड़
यात्रा के लिए हरिद्वार पहुंचे। भगवान शिव को जलाभिषेक करने के लिए गंगा से कांवड़
में जल लेकर पैदल ही शिव मंदिर तक पहुंचना होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार
इस दौरान किसी वाहन का उपयोग करना वर्जित किया गया है। हरिद्वार के पास नीलकंठ मे
भगवान शिव की पूजा-अर्चना करने के बाद चारों भाइयों ने गंगाजल भरा और कांवड़
यात्रा पर परिजनों के साथ रवाना हुए। उनके माता-पिता पैदल चलने में असमर्थ थे तो
तब चारों भाइयों ने तय किया कि वेउन्हेंढोकर ले जाएंगे। इसके लिए
चारों भाइयों ने तराजूनुमा पालकी तैयार की। इसमें उन्होंने एक ओर माता और दूसरी ओर
पिता को बैठाया। फिर कंधे में ढोते हुए नीलकंठ से हरियाणा के पंचकूला के माता मनसा
देवी मंदिर परिसर में स्थित शिवालय मंदिर पहुंचे और भगवान शिव का जलाभिषेक किया।
हरियाणा के पलवल जिले के गांव फुलवारी निवासी चंद्रपाल सिंह व उनकी पत्नी रूपवती
अपने पांच पुत्र बंसीलाल, रोहताश, राजू, महेंद्र व जगपाल के साथ गांव में रहते हैं। चंद्रपाल सिंह
के बेटे मजदूरी करके परिवार का खर्चा चलाते हैं। चंद्रपाल सिंह भी मजदूरी करते थे।
चंद्रपाल ने बताया कि उनकी बड़ी इच्छा थी कि वह हरिद्वार से कांवड़ लेकर आएं लेकिन
ऐसा नहीं हो सका। उम्र बढ़ती गई और पैरों ने भी साथ छोड़ दिया। एक साल पहले यह बात
जब उन्होंने अपने बेटों को बताई तो बेटों ने प्रण किया कि इस बार इनकी इच्छा को
जरूर पूरा करेंगे। चंद्रपाल के बड़े बेटे बंसीलाल ने बताया कि हम पांच भाइयों के
अलावा गांव के पांच अन्य युवकों ने भी उनकी मदद की। बंसीलाल ने बताया कि उन्होंने 12 जुलाई को हरिद्वार में
माता-पिता को गंगा स्नान कराकर कांवड़ उठाई थी। रोहताश के अनुसार, वह हर दिन आठ से दस
किलोमीटर का ही सफर करते थे, ताकि माता-पिता को परेशानी न हो। हम बेहद खुश है कि अपने
मां-बाप को कांवड़ यात्रा करवाकर उनकी इच्छा पूरी की है। पिता चंद्रपाल भी अपने
बेटों के सेवाभाव से गदगद हैं। उनका कहना है कि जब देश का हर बेटा उनके बेटों के
समान अपने मां-बाप की देखभाल करेगा तो हमारा समाज और बेहतर होगा। चारों भाई अपने
मां-बाप को कांवड़ पर बिठाकर जहां से भी निकले, लोगों उनको श्रवण कुमार
कहते थे। हरिद्वार से चारों भाई अपने मां-बाप को तीर्थयात्रा करवाकर वापस लौट रहे
हैं। भाइयो ने कहा कि वे लोगों को संदेश देना चाहते थे कि माता-पिता की सेवा करो,
उनका ध्याेन रखो। यात्रा
के दौरान लोगों ने जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। उनके साथ 32 लोगों का ग्रुप था,
जिसमें महिलाएं और बच्चे
भी थे। रोहताश , बंसीलाल, राजू, महेंद्र व जगपाल बीते 24 साल से कांवड़ यात्रा
करते रहे हैं। उनका कहना है कि बुजुर्गों के प्रति समाज को सकारात्मक संदेश देने
के लिए उन्होंने यह कदम उठाया है। बेटे रोहताश ने बताया कि मां-बाप ने हमारे लिए
सबकुछ किया है। ऐसे में उनकी हर इच्छा पूरी करना हमारा फर्ज बनता था। इसीलिए
बंसीलाल, राजू, जगपाल और महेंद्र के साथ
मिलकर उनको तीर्थयात्रा कराने का फैसला लिया था। परिवार ट्रैक्टर ट्राली से
हरिद्वार आया था। हरकी पैड़ी पर गंगा स्नान और प्रमुख मंदिरों के दर्शन करने के
बाद गंगाजल लेकर रवाना हुए। चारों भाई अपने कंधों पर मां बाप को लेकर गंतव्य की
तरफ बढ़े। जब उनमें कोई भी भाई थक जाता था, तो पांचवां भाई उसकी जगह
ले लेता। गत वर्ष भी इसी तरह पांचों बेटों नेमाता-पिता को कांवड़ यात्रा करवाई थी। उनके माता-पिता चंद्रपाल और रूपमति
ने बताया कि हमें श्रवण कुमार के माता-पिता की तरह कोई समस्या नहीं है। बता दें कि
श्रवण कुमार अपने अंधे माता-पिता को चारों धाम की यात्रा करने के लिए इसी तरह कंधे
पर लेकर घर से निकले थे।