Breaking News
श्री साधुमार्गी जैन श्रावक संघ द्वारा विशाल रक्तदान शिविर का आयोजन A.I.I.M.S के तत्वाधान में किया गया।  |  गोरखपुर:चैनल में करंट उतर से एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत  |  चुनाव आयोग ने महाराष्ट्र और हरियाणा विधानसभा चुनाव की तारीखों का किया ऐलान, ये 4 मुद्दे हो सकते हैं भाजपा के लिए गेमचेंजर !   |  दिल्ली यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव 2019 : अध्यक्ष समेत तीन सीटों पर ABVP की जबरदस्त जीत, NSUI को मिला सचिव पद !  |  रांची पहुंचे पीएम नरेंद्र मोदी, झारखंड को दी 7 नई सौगातें !   |  देहदान अंगदान समाज की एक बड़ी जरूरत - हर्ष मल्होत्रा  |  वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का 95 साल की उम्र में निधन, राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ने जताया शोक, सुब्रमण्यम स्वामी ने लिखा- `अलविदा दोस्त`   |  LIVE : आज रात चूमेगा चांद की जमीन को चंद्रयान -2 देखे लाइव लैंडिंग  |  Assam NRC : गृह मंत्रालय ने अंतिम सूची की जारी, 19 लाख लोग साबित नहीं कर सके नागरिकता, अब सामने है ये विकल्प !   |  दिलशाद गार्डन जी टी बी एनक्लेव के अल्ट्रासाउंड सेंटर पर छापा मारकर भ्रूण लिंग जांच पकड़ी  |  
न्यूज़ ग्राउंड विशेष
By   V.K Sharma 31/08/2019 :16:01
Assam NRC : गृह मंत्रालय ने अंतिम सूची की जारी, 19 लाख लोग साबित नहीं कर सके नागरिकता, अब सामने है ये विकल्प !
Total views  516




 

न्यू दिल्ली, (न्यूज ग्रॉउंड) आकाश मिश्रा : असम की राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची शनिवार को जारी कर दी गई, जिसमें से 19 लाख से ज्यादा लोगों को निकाल दिया गया है। अंतिम सूची से 19,06,657 लोगों को निकाल दिया गया और 3,11,21,004 लोगों को भारतीय नागरिक बताया गया। एनआरसी की अंतिम सूची में जिन लोगों का नाम इस लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है उन्हें घबराने की जरूरत नहीं है। उनके पास अपनी नागरिकता सिद्ध करने के लिए 120 दिन में विदेशी ट्राइब्यूनल में अपील करने का अधिकार होगा। उसके बाद भी उच्चतम न्यायलय तक के विकल्प खुले रहेंगे। पिछले साल जारी लिस्ट में 41 लाख लोगों के नाम छूट गए थे। जिनमें बड़ी संख्या मुसलमान व बंगाली हिंदुओं की है। एनआरसी की अंतिम सूची सुबह लगभग 10 बजे ऑनलाइन जारी की गई, जिसके बाद असम में अवैध रूप से रह रहे विदेशियों की पहचान करने वाली छह साल की कार्यवाही पर विराम लग गया। असम के लोगों के लिए एनआरसी का बड़ा महत्व है क्योंकि राज्य में अवैध बांग्लादेशी नागरिकों को हिरासत में लेने और उन्हें वापस भेजने के लिए छह साल तक (1979-1985) आंदोलन चला था।

 

फाइनल असम एनआरसी लिस्ट में 3.1 करोड़ का नाम, 19.07 लाख लोग हटाए गए : एनआरसी को संशोधित करने की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 2013 में शुरू हुई। इसे सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा किया जा रहा है। असम में एनआरसी के संशोधन की प्रक्रिया शेष भारत से अलग है और इस पर नियम 4अ लागू होता है और नागरिकता की अनुसूची (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान कार्ड का मुद्दा) कानून, 2003 की इसी अनुसूची लागू है। एनआरसी अथॉरिटी द्वारा शनिवार को जारी बयान के अनुसार, “इन नियमों को असम समझौते के अनुसार निर्धारित 24 मार्च (मध्य रात्रि) 1971 की कट-ऑफ तिथि के अनुसार तैयार किया गया है। एनआरसी आवेदन फॉर्म्स ग्रहण करने की प्रक्रिया 2015 में मई के अंत से शुरू हो गई और 31 अगस्त तक जारी रही। इसके लिए 68,37,660 आवेदन पत्रों के माध्यम से कुल 3,30,27,661 लोगों ने आवेदन किया।एनआरसी में शामिल करने के लिए आवेदकों की योग्यता निर्धारित करने के लिए आवेदकों द्वारा दाखिल किए गए ब्योरों को जांच के लिए लाया गया था। बयान में कहा गया, “एनआरसी संशोधन एक विशाल प्रक्रिया है, जिसमें राज्य सरकार के 52,000 सरकारी अधिकारी लंबे समय से काम कर रहे हैं। सूची में नाम शामिल करने या सूची से नाम निकालने संबंधित सभी निर्णय इन अधिकारियों ने लिए हैं। यह पूरी प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से की गई है।

पिछले साल प्रकाशित एनआरसी की सूची में 2,89,83,677 लोगों को गलत पाया गया था। बयान के अनुसार, “इसलिए,36,26,630 लोगों ने सूची से अपना नाम निकाले जाने के खिलाफ अपील की।सरकार ने आश्वासन दिया है कि एनआरसी की अंतिम सूची से निकाले गए लोगों को हिरासत में नहीं लिया जाएगा और वे सूची से खुद को निकालने के खिलाफ फॉरनर्स ट्रिब्यूनलों और उसके बाद शीर्ष अदालतों में अपील कर सकते हैं। अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह राजनीति) कुमार संजय कृष्णा ने कहा, “ये लोग पहले फॉरनर्स ट्रिब्यूनल (एफटी) जा सकते हैं, और एफटी के आदेश से संतुष्ट नहीं होने पर उच्च अदालत में याचिका दायर कर सकते हैं।असम सरकार राज्य में राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर (एनआरसी) की अंतिम सूची से निकाले गए लोगों से संबंधित मामले देखने के लिए 400 फॉरनर्स ट्रिब्यूनल्स स्थापित करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार भी एनआरसी सूची से निकाले गए लोगों को जिला कानूनी सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए) के माध्यम से कानूनी सहायता प्रदान करने के लिए सभी जरूरी बंदोबस्त करेगी।

 

 

 

राज्य में हाई अलर्ट : लोगों में भय का माहौल देखते हुए पूरे राज्य को हाई अलर्ट पर रखा गया है, लेकिन लोगों को डरने की जरूरत नहीं है। केंद्र सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है कि जो लोग अपनी नागरिकता खो देंगे उन्हें डिटेंशन सेंटर नहीं भेजा जाएगा।

 

एनआरसी सेवा केंद्र के बाहर लंबी लाइन : एनआरसी की अंतिम लिस्ट जारी होने के बाद राज्य में लोगों की एनआरसी सेवा केंद्र के बाहर लंबी लाइन लग गई है। लोग लिस्ट में अपना नाम चेक करने के लिए यहां आए हैं।

 

साइट हुई क्रैस : एनआरसी की आधिकारिक वेबसाइट लिस्ट जारी होने के कुछ देर बाद ही क्रैस हो गई। www.nrcassam.nic.in वेबसाइट ज्यादा ट्रैफिक की वजह से क्रैश हो गई। यह साइट राष्ट्रीय पंजीकरण के राज्य समन्वयक (NRC) के कार्यालय से संबंधित है।

 

शांती बनाए रखने की अपील : असम के सीएम सर्वानंद सोनेवाल ने एनआरसी की अंतिम सूची जारी होने से पहले यहां के लोगों से शांती बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा 'मैं आप सभी से असम में शांति और धीरज बनाए रखने की अपील करता हूं। जब तक अपील करने का समय है तब तक किसी को विदेशी नहीं माना जाएगा। राज्य सरकार कानूनी समर्थन का विस्तार करेगी।' सरकार इन लोगों की परेशानियों पर ध्यान देगी और यह देखेगी कि उनका किसी तरह का उत्पीड़न न हो।

 

 

 

किसी को भी डरने की जरूरत नहीं : केंद्र : गृह मंत्रालय ने लोगों से अपील की है कि एनआरसी की अंतिम सूची आने से जुड़ी किसी भी प्रकार की अफवाह पर विश्वास न करें। मंत्रालय ने साफ किया है कि किसी व्यक्ति का लिस्ट में नाम शामिल नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि उसे विदेशी घोषित कर दिया गया है। मंत्रालय ने बताया कि अंतिम लिस्ट से बाहर रह गए सभी लोग विदेशी ट्रिब्यूनल में अपील कर सकते हैं। विदेशी ट्रिब्यूनल की संख्या बढ़ाई जा रही है।

 

ऐसे नाम करें चेक : एनआरसी की फाइनल लिस्ट असम एनआरसी की आधिकारिक बेवसाइट nrcassam.nic.in पर प्रकाशित होगी। assam.mygov.in. साइट पर नाम की खोजबीन की जा सकती है। इसके अलावा स्थानीय एनआरसी सेवा केंद्र पर जाकर इस लिस्ट में अपना नाम चेक किया जा सकता है।

 

राज्य में कड़ी सुरक्षा व्यवस्था : पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ने पूरे असम में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। राज्य के संवेदनशील इलाकों में धारा 144 लगा दी गई है। 14 जिलों को संवेदनशील घोषित किया गया है। इस दौरान केंद्रीय सुरक्षाबलों की 55 कंपनियों को जम्मू कश्मीर से वापस बुला लिया गया है। इन्हें पिछले महीने जम्मू कश्मीर भेजा गया था। इन्हें राज्य के अलग-अलग इलाकों में सुरक्षा के मद्देनजर लगाया गया है।

 

सुप्रीम कोर्ट ने अंतिम प्रकाशन की समयसीमा बढ़ाई थी : सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने एनआरसी के अंतिम प्रकाशन की समयसीमा को 31 जुलाई से बढ़ाकर 31 अगस्त कर दिया था। इस दौरान सैंपल वेरिफिकेशन के लिए एनआरसी की समयसीमा बढ़ाने की याचिका को खारिज कर दिया गया था।

 

 

क्या है एनआरसी : एनआरसी(NRC) असम में अधिवासित सभी नागरिकों की एक सूची है। वर्तमान में राज्य के भीतर बोनाफाइड नागरिकों को बनाए रखने और बांग्लादेश से अवैध रूप से प्रवासियों को बाहर निकालने के लिए इसका अद्यतन किया जा रहा है।

 

एनआरसी से बाहर होने पर ये है विकल्प 

1- 120 दिन के अंदर विदेशी ट्राइब्यूनल में अपील कर सकेंगे ऐसे लोग। 1000 ट्राइब्यूनल बनाए जाएंगे ऐसे मामलों की सुनवाई के लिए और 100 ट्राइब्यूनल तैयार, अन्य 200 सितंबर के पहले हफ्ते में तैयार होंगे।

2- ट्राइब्यूनल में केस हारने पर उच्च व उच्चतम न्यायालय में अपील का रास्ता

3- सुनवाई के दौरान किसी को शरण केंद्रों में नहीं रखे जाने का आश्वासन

 

क्या है मामला : साल 1951 के बाद पहली बार राज्य में नागरिकता की पहचान हो रही है। राज्य में बड़ी संख्या में अवैध तरीके से रह रहे लोग इसकी प्रमुख वजह है। इसकी अंतिम सूची सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में बन रही है। इससे पहले साल 2018 में आई एनआरसी लिस्ट में 3.29 करोड़ लोगों में से 40.37 लाख लोगों का नाम शामिल नहीं था। अब फाइनल एनआरसी में उन लोगों के नाम शामिल किए जाएंगे, जो 24 मार्च 1971 से पहले असम के नागरिक हैं या उनके पूर्वज राज्य में रहते आए हैं।



V.K Sharma
Editor in Chief
Live Tv
»»
Video
»»
Top News
»»
विशेष
»»


Copyright @ News Ground Tv