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राष्ट्रीय
By   V.K Sharma 06/08/2019 :23:51
पूर्व विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का दिल का दौरा पड़ने से 67 वर्ष की उम्र में निधन, दिल्ली के एम्स अस्पताल में ली अंतिम सांस !
 

नई दिल्ली (न्यूज़ ग्राउंड) आकाश मिश्रा : पूर्व विदेश मंत्री और बीजेपी की सीनियर लीडर सुषमा स्वराज का दिल्ली के एम्स अस्पताल में दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया। वे लंबे अर्से से बीमार चल रही थीं और उनका किडनी ट्रांसप्लांट भी हुआ था। बीमारी की वजह से ही उन्होंने 2019 लोकसभा चुनाव से खुद को अलग रखा था।  2014 में सुषमा स्वराज को विदेश मंत्रालय का प्रभार मिला था। बीजेपी के शासन के दौरान सुषमा दिल्ली की मुख्यमंत्री भी रही थी। उन्हें दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनने का गौरव प्राप्त हुआ था। सुषमा स्वराज का जन्म 14 फरवरी 1952 को हुआ था। उन्होंने अंबाला में एसडी कॉलेज अम्बाला छावनी से बीए किया और पंजाब यूनिवर्सिटी से चंडीगढ़ से लॉ की पढ़ाई की थी। सुषमा स्वराज ने 1974 के छात्र आंदोलन में भी बढ़-चढकर हिस्सा लिया था। सुषमा स्वराज के निधन की खबर सुनते ही गृह मंत्री एवं पार्टी के पूर्व अध्यक्ष अमित शाह, उप राष्ट्रपति वैकेड नायडू, अरुण जेटली, महेन्द्र नाथ पांडेय, नीतिन गडकरी रवि शंकर प्रसाद , भाजपा के नए राष्ट्रीय अध्यक्ष जे पी नड्डा, भाजपा के नए संगठन महा मंत्री बी एल संतोष, डॉ. हर्षवर्धन, नितिन गडकरी, मनोज तिवारी , शिवराज सिंह चौहान सहित अन्य वरिष्ठ नेता उनके निवास स्थान पर पहुंचे एवं शोक जताया । निधन से करीब चार घंटे पहले ही सुषमा स्वराज ने ट्वीट कर संसद में जम्म कश्मीर पुनर्गठन विधेयक पारित होने को लेकर खुशी जताई थी और प्रधानमंत्री की तारीफ की थी। सुषमा ने अपने आखिरी ट्वीट में लिखा- 'प्रधान मंत्री जी - आपका हार्दिक अभिनन्दन. मैं अपने जीवन में इस दिन को देखने की प्रतीक्षा कर रही थी।' वहीं एक अन्य ट्वीट में उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह को बधाई दी थी। उन्होंने लिखा- श्री अमित शाह जी को उत्कृष्ट भाषण के लिए बहुत बहुत बधाई। सुषमा स्वराज के पार्थिव शरीर को कल सुबह 11 बजे तक उनके निवास स्थान पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा एवम 12 से 2 बजे तक भाजपा मुख्यालय में कार्यकर्ताओं के दर्शन के लिए रखा जाएगा और दोपहर 3 बजे लोधी रोड समशान घाट पर उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा। 

करोड़ों लोगों के लिए प्रेरणा थीं सुषमा स्वराज- मोदी : मोदी ने सुषमा के निधन पर कहा- भारतीय राजनीति के एक गौरवपूर्ण अध्याय का अंत हो गया। गरीबों और समाज के लिए जीवन देने वाली अद्वितीय नेता के निधन पर पूरा भारत दुखी है। सुषमा स्वराज जी अपनी तरह की अकेली इंसान थीं। वे करोड़ों लोगों की प्रेरणा का स्रोत थीं।

पहला चुनाव 1977 में लड़ा था : सुषमा ने सबसे पहला चुनाव 1977 में लड़ा। तब वे 25 साल की थीं। वे हरियाणा की अंबाला सीट से चुनाव जीतकर देश की सबसे युवा विधायक बनीं। उन्हें हरियाणा की देवीलाल सरकार में मंत्री भी बनाया गया। इस तरह वे किसी राज्य की सबसे युवा मंत्री रहीं।

1998 में दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं : 90 के दशक में सुषमा राष्ट्रीय राजनीति में सक्रिय हो गईं। अटलजी की सरकार में उन्हें मंत्री बनाया गया। 1998 में उन्होंने अटलजी की कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया और दिल्ली की पहली महिला मुख्यमंत्री बनीं। हालांकि, इसके बाद हुए दिल्ली विधानसभा चुनाव में भाजपा हार गई। पार्टी की हार के बाद सुषमा ने विधानसभा की सदस्यता छोड़ दी और राष्ट्रीय राजनीति में लौट आईं।

1999 में बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया से हारीं : 1996 में हुए लोकसभा चुनाव में सुषमा दक्षिण दिल्ली से सांसद बनी थीं। इसके बाद 13 दिन की अटलजी की सरकार में उन्हें केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्री बनाया गया। मार्च 1998 में दूसरी बार अटलजी की सरकार बनने पर वे एक फिर से आईबी मिनिस्टरबनीं। 1999 में उन्होंने बेल्लारी लोकसभा सीट पर सोनिया के खिलाफ चुनाव लड़ा, लेकिन वे यहां हार गईं।
2014 से 2019 तक विदेश मंत्री रहीं : सुषमा 2009 और 2014 में विदिशा से लोकसभा चुनाव जीतीं। 2014 से 2019 तक वे विदेश मंत्री रहीं और दुनियाभर में भारतीयों को उन्होंने एक ट्वीट पर मदद मुहैया कराई। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों के चलते 2019 का लोकसभा चुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया था। भाजपा की जीत के बाद मन जा रहा था कि वे दोबारा विदेश मंत्री बनेंगी, लेकिन उन्होंने खराब सेहत के चलते मंत्री पद नहीं लिया।



V.K Sharma
Editor in Chief
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